23 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजस्थान नगर निकाय चुनाव: भाजपा ने 301 में से 197 निकायों में जीत दर्ज की, 'भजनलाल मॉडल' को श्रेय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजस्थान नगर निकाय चुनाव: भाजपा ने 301 में से 197 निकायों में जीत दर्ज की, 'भजनलाल मॉडल' को श्रेय

सारांश

राजस्थान के 301 नगर निकायों में भाजपा ने 197 जीते — 'भजनलाल मॉडल' की पहली बड़ी परीक्षा में पास। लेकिन वोट शेयर में महज 0.94% का अंतर और निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा बताता है कि ज़मीन पर असली मुकाबला कहीं ज़्यादा कड़ा था।

मुख्य बातें

301 नगर निकायों के नतीजों में भाजपा ने 197 में बोर्ड बनाए, कांग्रेस को 94 मिले।
पार्षद चुनावों में भाजपा को 10,235 में से 4,179 वार्ड मिले; कांग्रेस को 3,613 और निर्दलीय को 2,273 ।
भाजपा का वोट शेयर 35.18% , कांग्रेस का 34.24% — अंतर महज 0.94 प्रतिशत अंक ।
जोधपुर संभाग में भाजपा ने 41 में से 35 निकाय जीते — 87% सफलता दर; यह पूर्व CM अशोक गहलोत का गढ़ है।
जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के चुनाव 25 सितंबर 2026 को होने हैं।
भाजपा ने जीत का श्रेय 'भजनलाल मॉडल' को दिया — जिसमें CM की सीधी भागीदारी और पहली बार रोड-शो प्रचार शामिल था।

राजस्थान के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 22 सितंबर 2026 को घोषित आधिकारिक नतीजों के अनुसार, जिन 301 निकायों के परिणाम आए, उनमें से 197 में भाजपा ने बोर्ड गठित किए, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) को 94 निकायों में सफलता मिली। शेष स्थानीय निकायों में अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। भाजपा नेताओं ने इस प्रदर्शन का श्रेय 'भजनलाल मॉडल' को दिया — वह चुनावी रणनीति जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उम्मीदवारों के सर्वे से लेकर प्रचार तक हर चरण में व्यक्तिगत रूप से सक्रिय रहे।

मुख्य घटनाक्रम और संभाग-वार प्रदर्शन

जोधपुर संभाग में भाजपा ने 41 में से 35 शहरी स्थानीय निकायों पर कब्जा किया, जिसे पार्टी ने 87 प्रतिशत सफलता दर बताया। यह नतीजा विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि जोधपुर पारंपरिक रूप से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गढ़ माना जाता है। भाजपा ने बूथ-स्तर की तैयारी, संगठनात्मक तालमेल और स्थानीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने को इस सफलता का आधार बताया।

भरतपुर संभाग — जो मुख्यमंत्री शर्मा का गृह जिला भी है — में भाजपा ने 32 में से 24 निकायों में बोर्ड गठित किए, जबकि कांग्रेस को सात निकायों में सफलता मिली। अजमेर संभाग में भाजपा ने 52 में से 36 निकायों में जीत का दावा किया — यानी करीब 69 प्रतिशत सफलता दर।

बीकानेर संभाग में भाजपा ने 37 में से 24 निकायों में बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस को 10 निकायों में सफलता मिली। उदयपुर संभाग में भाजपा ने 28 में से 18 निकाय जीते और कांग्रेस को 9 में सफलता मिली। कोटा संभाग में भाजपा ने 28 में से 15 और कांग्रेस ने 10 निकाय जीते। जयपुर संभाग में भाजपा ने 91 में से 48 निकायों में बोर्ड बनाए, जबकि कांग्रेस ने 40 में जीत हासिल की।

नगर निगमों में रोचक राजनीतिक समीकरण

पाली नगर निगम में पार्षद चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही — उसे 29 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को 21 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 15 सीटें मिलीं। बावजूद इसके, भाजपा उम्मीदवार नमिता बुबाकिया ने पार्टी के पार्षदों की संख्या से बाहर के समर्थन से मेयर पद जीता।

भरतपुर नगर निगम में एक अनोखा राजनीतिक समीकरण सामने आया — निर्दलीय उम्मीदवारों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर अकेले बहुमत पार किया, जबकि भाजपा ने 20 और कांग्रेस ने 7 सीटें जीतीं। फिर भी भाजपा की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं।

अजमेर नगर निगम में पार्षद चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही, किंतु भाजपा की अनामिका शर्मा निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन से मेयर पद पर काबिज हुईं।

बीकानेर में कांग्रेस ने नगर निगम स्तर पर अपना वर्चस्व बनाए रखा — मेयर चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 वोटों से हराया। उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी ने कांग्रेस उम्मीदवार पूनम कंवर को 55-25 वोटों से पराजित किया।

वोट शेयर और पार्षद सीटों का हिसाब

पार्षद चुनावों में भाजपा ने घोषित 10,235 वार्डों में से 4,179 पर जीत हासिल की। कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में विजय दर्ज की। वोट शेयर के लिहाज से भाजपा 35.18 प्रतिशत पर रही, जबकि कांग्रेस का वोट शेयर 34.24 प्रतिशत रहा — दोनों के बीच महज 0.94 प्रतिशत अंकों का अंतर। यह संकीर्ण अंतर दर्शाता है कि ज़मीनी मुकाबला काफी कड़ा था।

गौरतलब है कि पाली, अजमेर, अलवर और भरतपुर समेत कई नगर निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने निर्णायक भूमिका निभाई — उनके समर्थन ने बोर्ड गठन और मेयर चुनावों के नतीजों को प्रभावित किया।

भजनलाल मॉडल: क्या है यह रणनीति

भाजपा नेताओं के अनुसार, 'भजनलाल मॉडल' में उम्मीदवार चयन के लिए व्यवस्थित सर्वे, बड़े शहरों में मुख्यमंत्री की सीधी प्रचार भागीदारी और राजस्थान के निकाय चुनावों में पहली बार रोड-शो आधारित प्रचार शामिल था। पार्टी ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय को भी इस मॉडल का अभिन्न हिस्सा बताया।

राज्य भाजपा अध्यक्ष मदन राठौर ने कहा कि ये नतीजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और राज्य सरकार के कामों के प्रति जनता के समर्थन को दर्शाते हैं। भाजपा नेताओं ने इन परिणामों को शर्मा सरकार के विकास और सुशासन के एजेंडे पर जनमत की मुहर करार दिया।

आगे क्या होगा

जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के चुनाव 25 सितंबर 2026 को होने हैं। जयपुर नगर निगम के मेयर पद पर भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता मावर आमने-सामने होंगे। जोधपुर नगर निगम में भी 25 सितंबर को मेयर का चुनाव होना है। इसका अर्थ है कि राजस्थान के शहरी स्थानीय निकायों की अंतिम राजनीतिक तस्वीर अभी पूरी तरह नहीं बनी है — और निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका इन बाकी बचे चुनावों में भी निर्णायक साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन वोट शेयर में कांग्रेस से महज 0.94 प्रतिशत अंक का अंतर बताता है कि जनादेश उतना एकतरफा नहीं है जितना पार्टी के दावे सुझाते हैं। निर्दलीय उम्मीदवारों का 2,273 वार्डों में जीत और कई नगर निगमों में मेयर-निर्माण की भूमिका संकेत देती है कि मतदाता किसी एक पार्टी पर पूरी तरह भरोसा करने से हिचक रहा है। 'भजनलाल मॉडल' की असली परीक्षा 25 सितंबर के मेयर चुनावों में होगी — खासकर जयपुर और जोधपुर जैसे हाई-प्रोफाइल निकायों में, जहाँ निर्दलीय समर्थन ही तराजू का पलड़ा झुकाएगा।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान नगर निकाय चुनाव 2026 में भाजपा ने कितने निकाय जीते?
भाजपा ने घोषित 301 नगर निकायों में से 197 में बोर्ड गठित किए, जबकि कांग्रेस को 94 निकायों में सफलता मिली। शेष निकायों में अन्य दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की।
'भजनलाल मॉडल' क्या है और इसे जीत का श्रेय क्यों दिया जा रहा है?
'भजनलाल मॉडल' वह चुनावी रणनीति है जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा उम्मीदवार सर्वे से लेकर टिकट वितरण और प्रचार तक हर चरण में सीधे शामिल रहे। राजस्थान के निकाय चुनावों में पहली बार रोड-शो आधारित प्रचार भी इस मॉडल का हिस्सा था।
राजस्थान निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में कितना अंतर रहा?
भाजपा का वोट शेयर 35.18 प्रतिशत और कांग्रेस का 34.24 प्रतिशत रहा — दोनों के बीच महज 0.94 प्रतिशत अंकों का अंतर। यह संकीर्ण अंतर बताता है कि ज़मीनी मुकाबला काफी कड़ा था।
राजस्थान में बाकी बचे मेयर चुनाव कब होंगे?
जयपुर, जोधपुर और कोटा में मेयर पद के चुनाव 25 सितंबर 2026 को होने हैं। जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी और कांग्रेस की सुनीता मावर आमने-सामने होंगे।
राजस्थान निकाय चुनावों में निर्दलीय उम्मीदवारों की क्या भूमिका रही?
निर्दलीय उम्मीदवारों ने 2,273 वार्डों में जीत दर्ज की और कई नगर निगमों में बोर्ड गठन व मेयर चुनावों के नतीजों पर निर्णायक प्रभाव डाला। भरतपुर नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर अकेले बहुमत पार किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले