हिमाचल विधानसभा राष्ट्रगान विवाद: विपिन परमार बोले — वीडियो देखें, BJP ने किया पूरा सम्मान
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में राष्ट्रगान के कथित अपमान को लेकर छिड़े सियासी विवाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने 21 अगस्त को कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। परमार ने कहा कि BJP विधायकों ने राष्ट्रगान के दौरान पूरी शालीनता और सम्मान के साथ खड़े होकर अपना कर्तव्य निभाया, और जो विवाद उठाया जा रहा है वह तथ्यों पर आधारित नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
परमार के अनुसार, जब हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही की शुरुआत राष्ट्रगान से करने की घोषणा की, तब BJP विधायक अपनी-अपनी सीटों पर खड़े हो गए और राष्ट्रगान को पूरा सम्मान दिया। राष्ट्रगान की समाप्ति के बाद वे अपनी बेंचों पर बैठ गए और नियमों के तहत पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाने की मांग की। परमार ने कहा, 'इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो मौजूद है — उसे देखा जा सकता है।'
BJP की मूल मांग क्या थी
परमार ने स्पष्ट किया कि BJP विधायकों की मुख्य मांग राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को छह छंदों के साथ पूरा गाने की थी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से हाल ही में राष्ट्रगीत के सम्मान और उससे जुड़े प्रोटोकॉल संबंधी निर्देश जारी किए गए हैं, और BJP की मांग थी कि उन निर्देशों की पालना की जाए। जब यह मांग स्वीकार नहीं की गई, तो BJP विधायकों ने शालीनता से 'वंदे मातरम' के नारे लगाए।
सदन स्थगन पर सवाल
परमार ने विधानसभा की कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक स्थगित किए जाने को भी तर्कसंगत नहीं बताया। उन्होंने कहा कि BJP विधायक युवाओं से जुड़े मुद्दे, शोक प्रस्ताव और स्वास्थ्य से संबंधित विषय सदन में उठाना चाहते थे, लेकिन अचानक स्थगन के कारण वे ऐसा नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए विधायकों की सदन में अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाने की जिम्मेदारी होती है और इसमें बाधा डालना उचित नहीं है।
कांग्रेस पर पलटवार और अपील
BJP नेता ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि 15 अगस्त से जुड़े एक कथित घटनाक्रम पर कांग्रेस नेताओं को देश की जनता से स्पष्टीकरण और माफी मांगनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की कि वे इस मुद्दे पर बड़ा दिल दिखाएं। परमार ने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान जैसे विषयों पर सभी पक्षों को प्रोटोकॉल और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह
परमार ने 'वंदे मातरम' के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1937 में कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान इसे लेकर बदलाव किए गए थे। उन्होंने कहा कि करोड़ों देशवासी 'वंदे मातरम' को मातृभूमि के प्रति संकल्प और सम्मान की भावना के रूप में देखते हैं। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा अपनी लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के लिए जानी जाती है और इस विवाद ने सदन की गरिमा पर सवाल खड़े किए हैं। परमार ने कहा कि नई परंपराएं बनाने की जिम्मेदारी प्रदेश की चुनी हुई सरकार की भी होती है और इस दिशा में सकारात्मक पहल होनी चाहिए।