हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: दूसरे दिन भी हंगामा, राष्ट्रगान विवाद पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र लगातार दूसरे दिन 22 अगस्त को भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। बारिश में भीगते हुए तख्तियाँ थामे और नारे लगाते कांग्रेस विधायकों का यह दृश्य शिमला में सदन की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विवाद की जड़ — राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रगीत
विवाद की शुरुआत शुक्रवार, 21 अगस्त को मानसून सत्र के पहले दिन से ही हो गई थी, जब सदन की कार्यवाही मात्र 10 मिनट में स्थगित करनी पड़ी। सदन शुरू होते ही राष्ट्रगान गाया गया, जिसके बाद विपक्ष (BJP) ने माँग उठाई कि राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत भी गाया जाए।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि सदन में राष्ट्रगीत गाने की परंपरा है, लेकिन यह सत्र के समापन के समय होता है। इस व्यवस्था को विपक्षी विधायकों ने नकार दिया और नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप था कि कांग्रेस सरकार राष्ट्रगीत से परहेज कर रही है और उसका रवैया 'राष्ट्रविरोधी' है।
दूसरे दिन परिसर में विरोध प्रदर्शन
शनिवार को सत्र के दूसरे दिन स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। कांग्रेस विधायकों ने BJP पर पलटवार करते हुए विधानसभा परिसर के अंदर ही प्रदर्शन किया और भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप मढ़ा। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाने लगे, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष पठानिया ने सदन की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर दी।
सरकार की प्रतिक्रिया
हिमाचल सरकार के मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'विपक्ष को अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए। चाहे वह सरकार से सवाल पूछे या चर्चा के लिए मुद्दे उठाए और प्रदेश की समस्याओं पर सरकार के साथ चर्चा करे, यही विपक्ष का मुख्य काम है और उन्हें वही करना चाहिए।'
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण कई ज़िलों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विधानसभा का बार-बार हंगामे में डूबना राज्य के नागरिकों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि सत्र में राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। गौरतलब है कि यह हिमाचल विधानसभा में राजनीतिक टकराव का पहला मामला नहीं है — पिछले कई सत्रों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इसी तरह की नारेबाजी और स्थगन देखे गए हैं।
क्या होगा आगे
सदन के सुचारू संचालन के लिए विधानसभा अध्यक्ष पठानिया की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक की संभावना जताई जा रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा बिना किसी ठोस विधायी कार्य के बीत जाने का जोखिम है।