22 अगस्त 2026
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हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: दूसरे दिन भी हंगामा, राष्ट्रगान विवाद पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने

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हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र: दूसरे दिन भी हंगामा, राष्ट्रगान विवाद पर कांग्रेस-BJP आमने-सामने

सारांश

हिमाचल विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही दो दिन में दो बार स्थगित हो चुका है। राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रगीत के विवाद ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को परिसर में ही आमने-सामने खड़ा कर दिया — और प्रदेश की बाढ़-राहत जैसी ज़रूरी चर्चाएँ ठप पड़ी हैं।

मुख्य बातें

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन, 22 अगस्त को भी हंगामे के कारण कार्यवाही स्थगित हुई।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और BJP पर राष्ट्रगान अपमान का आरोप लगाया।
विवाद की जड़ राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत गाने की BJP की माँग है, जिसे विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने प्रक्रिया के विरुद्ध बताया।
पहले दिन 21 अगस्त को सदन की कार्यवाही मात्र 10 मिनट में स्थगित हो गई थी।
मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष से जिम्मेदारी से भूमिका निभाने की अपील की।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र लगातार दूसरे दिन 22 अगस्त को भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर के भीतर विरोध प्रदर्शन किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायकों पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया। बारिश में भीगते हुए तख्तियाँ थामे और नारे लगाते कांग्रेस विधायकों का यह दृश्य शिमला में सदन की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विवाद की जड़ — राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रगीत

विवाद की शुरुआत शुक्रवार, 21 अगस्त को मानसून सत्र के पहले दिन से ही हो गई थी, जब सदन की कार्यवाही मात्र 10 मिनट में स्थगित करनी पड़ी। सदन शुरू होते ही राष्ट्रगान गाया गया, जिसके बाद विपक्ष (BJP) ने माँग उठाई कि राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत भी गाया जाए।

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि सदन में राष्ट्रगीत गाने की परंपरा है, लेकिन यह सत्र के समापन के समय होता है। इस व्यवस्था को विपक्षी विधायकों ने नकार दिया और नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष का आरोप था कि कांग्रेस सरकार राष्ट्रगीत से परहेज कर रही है और उसका रवैया 'राष्ट्रविरोधी' है।

दूसरे दिन परिसर में विरोध प्रदर्शन

शनिवार को सत्र के दूसरे दिन स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। कांग्रेस विधायकों ने BJP पर पलटवार करते हुए विधानसभा परिसर के अंदर ही प्रदर्शन किया और भाजपा विधायकों पर राष्ट्रगान का अपमान करने का आरोप मढ़ा। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाने लगे, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया। हंगामा बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष पठानिया ने सदन की कार्यवाही एक बार फिर स्थगित कर दी।

सरकार की प्रतिक्रिया

हिमाचल सरकार के मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष के रवैये पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'विपक्ष को अपनी भूमिका जिम्मेदारी से निभानी चाहिए। चाहे वह सरकार से सवाल पूछे या चर्चा के लिए मुद्दे उठाए और प्रदेश की समस्याओं पर सरकार के साथ चर्चा करे, यही विपक्ष का मुख्य काम है और उन्हें वही करना चाहिए।'

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब हिमाचल प्रदेश में मानसून के कारण कई ज़िलों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में विधानसभा का बार-बार हंगामे में डूबना राज्य के नागरिकों के लिए चिंताजनक है, क्योंकि सत्र में राहत और पुनर्निर्माण से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। गौरतलब है कि यह हिमाचल विधानसभा में राजनीतिक टकराव का पहला मामला नहीं है — पिछले कई सत्रों में भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इसी तरह की नारेबाजी और स्थगन देखे गए हैं।

क्या होगा आगे

सदन के सुचारू संचालन के लिए विधानसभा अध्यक्ष पठानिया की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक की संभावना जताई जा रही है। यदि दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो मानसून सत्र का बड़ा हिस्सा बिना किसी ठोस विधायी कार्य के बीत जाने का जोखिम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असल में यह हिमाचल में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गहरे राजनीतिक अविश्वास का प्रतिबिंब है। चिंताजनक यह है कि मानसून सत्र — जो मूलतः बाढ़, भूस्खलन और राहत कार्यों पर विधायी चर्चा के लिए बुलाया गया था — अपने पहले दो दिनों में एक भी ठोस मुद्दे पर आगे नहीं बढ़ सका। जब तक दोनों पक्ष प्रतीकात्मक मुद्दों पर अपनी ऊर्जा खपाते रहेंगे, असली जनहित के सवाल विधानसभा की दहलीज़ तक भी नहीं पहुँचेंगे।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र में हंगामा क्यों हुआ?
विवाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर है। BJP ने माँग की कि सत्र की शुरुआत में राष्ट्रगान के साथ राष्ट्रगीत भी गाया जाए, जबकि विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि राष्ट्रगीत सत्र के समापन पर गाया जाता है। इस पर BJP विधायकों ने नारेबाजी शुरू की और कांग्रेस ने BJP पर राष्ट्रगान अपमान का पलटवार किया।
हिमाचल विधानसभा सत्र कब-कब स्थगित हुआ?
मानसून सत्र के पहले दिन 21 अगस्त को कार्यवाही मात्र 10 मिनट में स्थगित हो गई। दूसरे दिन 22 अगस्त को भी हंगामा जारी रहा और विधानसभा अध्यक्ष पठानिया को एक बार फिर सदन स्थगित करना पड़ा।
कांग्रेस और BJP के बीच विवाद में क्या आरोप-प्रत्यारोप हुए?
BJP ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राष्ट्रगीत नहीं गाना चाहती और सरकार का रवैया 'राष्ट्रविरोधी' है। जवाब में कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री सुक्खू के नेतृत्व में परिसर में प्रदर्शन कर BJP पर राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया।
हिमाचल सरकार ने इस हंगामे पर क्या कहा?
मंत्री जगत सिंह नेगी ने विपक्ष से अपील की कि वह जिम्मेदारी से भूमिका निभाए और प्रदेश की समस्याओं पर सरकार के साथ रचनात्मक चर्चा करे। उन्होंने कहा कि यही विपक्ष का मुख्य काम है।
इस हंगामे का आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
मानसून सत्र में बाढ़, भूस्खलन और राहत कार्यों से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी। सदन के बार-बार स्थगित होने से इन ज़रूरी विधायी कार्यों में देरी हो रही है, जिसका सीधा असर प्रदेश के प्रभावित नागरिकों पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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