बीएलओ लोकतंत्र की जड़ें हैं — हर पात्र मतदाता को सूची में जोड़ें: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार
सारांश
मुख्य बातें
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को लखनऊ में बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ सीधे संवाद करते हुए कहा कि देश की चुनाव प्रक्रिया संविधान, कानून और भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अंतर्गत पूर्ण पारदर्शिता के साथ संचालित होती है। उन्होंने बीएलओ को लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण जमीनी कड़ी करार देते हुए उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सहभागिता बढ़ाने और हर पात्र नागरिक को मतदाता सूची में शामिल करने का स्पष्ट आह्वान किया।
मुख्य घटनाक्रम
ज्ञानेश कुमार ने बताया कि भारत में इस समय करीब 97 करोड़ मतदाता हैं, जो विश्व की सबसे विशाल लोकतांत्रिक चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन प्रक्रिया को संचालित करने में करीब 1.80 करोड़ लोग प्रतिनियुक्ति पर कार्य करते हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि इस विशाल तंत्र को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से चलाने में देशभर के करीब 12 लाख बीएलओ की भूमिका अपरिहार्य है।
उन्होंने यह भी बताया कि लखनऊ से उनका पुराना पारिवारिक और शैक्षणिक जुड़ाव है, और बीएलओ के साथ यह संवाद उनके लिए किसी औपचारिक बैठक की बजाय एक आत्मीय मिलन जैसा था।
बीएलओ की जिम्मेदारियाँ
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बीएलओ का दायित्व केवल मतदाता सूची तैयार करने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे नाम और अपात्र विदेशी नागरिकों के नाम हटाने के साथ-साथ 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में जोड़ना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। विशेष जोर युवाओं, पहली बार मतदान करने वालों और विवाह के बाद नए स्थानों पर पहुँची महिलाओं तक पहुँचने पर दिया गया।
पारदर्शिता की त्रिस्तरीय व्यवस्था
ज्ञानेश कुमार ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू त्रिस्तरीय समवर्ती ऑडिट व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि मतदाता सूची के प्रारूप चरण से लेकर मतदान और मतगणना तक प्रत्येक स्तर पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधि मौजूद रहते हैं। बीएलओ द्वारा तैयार सूची का परीक्षण राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों द्वारा किया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि मतदान के दिन मॉक पोल से लेकर फॉर्म-17सी के भाग-1 को भरने और ईवीएम को सील करने तक की पूरी प्रक्रिया उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंटों की उपस्थिति में पूरी की जाती है। मतगणना के दौरान भी काउंटिंग एजेंट निरंतर निगरानी रखते हैं।
आम जनता पर असर
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने जोर देकर कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए केवल निष्पक्ष चुनाव कराना पर्याप्त नहीं — अधिक से अधिक पात्र नागरिकों की चुनावी भागीदारी उतनी ही आवश्यक है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यह जिम्मेदारी और भी व्यापक हो जाती है, जहाँ मतदाता जागरूकता और सहभागिता बढ़ाना एक बड़ी चुनौती है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और निर्वाचन आयोग का यह संवाद अभियान उसी की कड़ी माना जा रहा है। बीएलओ को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित न रहे — और इस दिशा में जमीनी स्तर पर काम तेज किया जाए।