बीपीएससी TRE-4: 5 लाख तक आवेदन पर एक दिन में परीक्षा, दो चरणों की व्यवस्था बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) ने 24 अगस्त 2026 को शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 के परीक्षा पैटर्न को लेकर फैली अफवाहों और भ्रम को आधिकारिक तौर पर दूर किया। आयोग के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि आवेदनों की संख्या 5 लाख तक सीमित रहती है, तो परीक्षा एक ही दिन में संपन्न कराई जाएगी, अन्यथा दो अलग-अलग तिथियों पर आयोजन होगा।
परीक्षा की तारीख और ढाँचा
परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि दो चरणों में परीक्षा कराने के निर्णय में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था केवल बिहार तक सीमित नहीं है — उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत देश के कई राज्य पहले से ही दो या तीन चरणों में परीक्षाएँ आयोजित करते हैं।
गौरतलब है कि नीट परीक्षा विवाद के बाद गठित राधाकृष्णन समिति ने भी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दो-चरणीय व्यवस्था की सिफारिश की थी। इसके अतिरिक्त, आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने भी पारदर्शिता और कदाचार रोकने के लिए यही सुझाव दिया था, जिसे आयोग ने स्वीकार किया।
नकारात्मक अंकन पर स्पष्टीकरण
नकारात्मक अंकन को लेकर उठ रहे सवालों पर राजेश कुमार सिंह ने कहा कि बीपीएससी की सभी वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं में नकारात्मक अंकन का प्रावधान है और यह सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू होता है। इसका उद्देश्य अनुमान के आधार पर उत्तर देकर चयन की संभावना को कम करना है।
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों से जुड़े आरोप खारिज
हिंदी माध्यम के अभ्यर्थियों को कम अंक दिए जाने के आरोपों को आयोग ने सिरे से नकार दिया। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि मुख्य परीक्षा का आवेदन भरते समय माध्यम संबंधी जानकारी ली ही नहीं जाती, इसलिए हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के आधार पर तुलना करने का कोई डेटा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विषय विशेषज्ञ करते हैं और एक प्रश्न का मूल्यांकन एक ही परीक्षक करता है — चाहे उत्तर हिंदी में हो या अंग्रेजी में।
60% से अधिक अंक और दोबारा जाँच की व्यवस्था
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 60 प्रतिशत से अधिक अंक देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। हालाँकि, ऐसे मामलों में उत्तर पुस्तिका की दोबारा जाँच हेड एग्जामिनर द्वारा की जाती है, ताकि मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
टीआरई-3 की उत्तर पुस्तिकाओं पर उदाहरण
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोग ने टीआरई-3 की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर उठे सवालों पर ठोस उदाहरण प्रस्तुत किया। परीक्षा नियंत्रक ने बताया कि तीसरे स्थान पर रहे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका में जीएस-1 के प्रश्न संख्या सात के दो उपभागों का उत्तर नहीं दिया गया था, जिसके कारण उन्हें उन दोनों में शून्य अंक मिले। उन्होंने कहा कि अंक उत्तर की गुणवत्ता से तय होते हैं, न कि केवल उत्तर पुस्तिका प्रस्तुत करने से।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थियों में गहरी चिंता है। आयोग के इस स्पष्टीकरण से लाखों अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी में स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।