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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में सीपी राधाकृष्णन की मेजबानी, भारत को बताया 'लोकतंत्र की जननी'

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12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में सीपी राधाकृष्णन की मेजबानी, भारत को बताया 'लोकतंत्र की जननी'

सारांश

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच में राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भारत की सदियों पुरानी लोकतांत्रिक जड़ों — वैशाली के गणतंत्र से लेकर चोल की 'कुडावोलाई' प्रणाली तक — का हवाला देकर भारत को 'लोकतंत्र की जननी' करार दिया और ब्रिक्स को वैश्विक सहयोग का अनिवार्य स्तंभ बताया।

मुख्य बातें

राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 27 अक्टूबर 2026 को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के प्रतिनिधियों के सम्मान में नई दिल्ली में दोपहर भोज आयोजित किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा उपसभापति हरिवंश समेत ब्रिक्स सदस्य व साझेदार देशों के वरिष्ठ संसदीय अधिकारी उपस्थित रहे।
राधाकृष्णन ने वैशाली की गणतांत्रिक परंपरा और दक्षिण भारत की 'कुडावोलाई' प्रणाली का उल्लेख कर भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताया।
सितंबर 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी के इस कथन को दोहराया गया कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार के केंद्र बन रहे हैं।
12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन से नवाचार और वैश्विक सहयोग के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुलने की उम्मीद जताई गई।

राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के प्रतिभागियों के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत की प्राचीन लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए देश को सही मायनों में 'लोकतंत्र की जननी' बताया। कार्यक्रम में ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के पीठासीन अधिकारी और संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नेता सहभागी रहे।

कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थिति

दोपहर भोज में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा एवं लोकसभा के महासचिव तथा ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह आयोजन 12वें ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन के समानांतर हुआ, जो वैश्विक संसदीय सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण मंच माना जाता है।

भारत की लोकतांत्रिक विरासत पर राधाकृष्णन का संबोधन

राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के लिए लोकतंत्र कोई आयातित अवधारणा नहीं है। उन्होंने उत्तर भारत में वैशाली की लोकतांत्रिक व्यवस्था और दक्षिण भारत में चोल शासकों की 'कुडावोलाई' प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का संसदीय लोकतंत्र जमीनी स्तर से लेकर सर्वोच्च संस्थाओं तक सदियों में विकसित हुआ है। गौरतलब है कि वैशाली को विश्व के सबसे प्रारंभिक गणतांत्रिक राज्यों में से एक माना जाता है।

ब्रिक्स की भूमिका और PM मोदी का संदर्भ

राधाकृष्णन ने ब्रिक्स को वैश्विक सहयोग के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में रेखांकित किया — एक ऐसा मंच जहाँ विविध संस्कृतियाँ और तेज़ी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाएँ समावेशी विश्व व्यवस्था की साझा प्रतिबद्धता के साथ एकजुट होती हैं। उन्होंने सितंबर 2026 में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का स्मरण करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उस अवसर पर इस बात को रेखांकित किया था कि ब्रिक्स देश वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्रों के रूप में उभर रहे हैं।

आतिथ्य और मानवीय संबंधों पर जोर

सभापति ने कहा कि भारतीय परंपरा में दोपहर भोज का आयोजन केवल औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि आत्मीयता और आपसी सम्मान की सच्ची अभिव्यक्ति है। उनके अनुसार साथ बैठकर भोजन करना नेताओं को नीतियों और शासन से परे जाकर मानवीय संबंधों को सुदृढ़ करने का अवसर देता है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों का मूल आधार है।

आगे की राह

राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि 12वाँ ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन सदस्य एवं साझेदार देशों में हो रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के सामूहिक संकल्प को और सुदृढ़ करेगा। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब ब्रिक्स समूह के विस्तार और वैश्विक भू-राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे बहुपक्षीय मंचों पर बार-बार दोहराया जाता है। लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या ब्रिक्स जैसा मंच — जिसमें अलग-अलग शासन प्रणालियों वाले देश शामिल हैं — भारत की लोकतांत्रिक साख को व्यावहारिक रूप से मज़बूत करता है या यह केवल औपचारिक संसदीय कूटनीति तक सीमित रहता है। ब्रिक्स का विस्तार और उसमें विविध राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देशों की भागीदारी इस समूह के भीतर 'लोकतांत्रिक मूल्यों' की साझा परिभाषा को और जटिल बनाती है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच क्या है और यह कहाँ आयोजित हुआ?
12वाँ ब्रिक्स संसदीय मंच ब्रिक्स सदस्य एवं साझेदार देशों के संसदीय नेताओं का वार्षिक सम्मेलन है, जो इस बार 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारतीय संसद में आयोजित किया गया। इसमें ब्रिक्स देशों के पीठासीन अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल नेता भाग लेते हैं।
सीपी राधाकृष्णन ने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' क्यों कहा?
राधाकृष्णन ने उत्तर भारत में वैशाली की प्राचीन गणतांत्रिक व्यवस्था और दक्षिण भारत में चोल शासकों की 'कुडावोलाई' मतपत्र प्रणाली का हवाला देते हुए यह तर्क दिया कि भारत में लोकतांत्रिक परंपराएँ आधुनिक युग से बहुत पहले से विद्यमान थीं। इसी ऐतिहासिक आधार पर उन्होंने भारत को 'लोकतंत्र की जननी' बताया।
ब्रिक्स संसदीय मंच में कौन-कौन से प्रमुख नेता उपस्थित थे?
इस कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय मंत्री, दोनों सदनों के महासचिव तथा ब्रिक्स सदस्य व साझेदार देशों के संसदीय अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी उपस्थित रहे।
PM मोदी की ब्रिक्स संबंधी टिप्पणी का इस कार्यक्रम में क्या महत्व था?
राधाकृष्णन ने सितंबर 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी के उस कथन को उद्धृत किया जिसमें उन्होंने ब्रिक्स देशों को वैश्विक नवाचार और समाधान के महत्वपूर्ण केंद्र बताया था। यह संदर्भ 12वें संसदीय सम्मेलन की प्रासंगिकता को शिखर-स्तरीय दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए दिया गया।
ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन से आगे क्या अपेक्षाएँ हैं?
राधाकृष्णन ने विश्वास जताया कि 12वाँ ब्रिक्स संसदीय सम्मेलन सदस्य व साझेदार देशों में विकसित हो रहे नवाचारों के लिए नई संभावनाएँ खोलेगा और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के सामूहिक प्रयासों को मज़बूती देगा।
राष्ट्र प्रेस
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