ब्रॉड पीक हिमस्खलन: निर्मल पुर्जा समेत सभी 10 पर्वतारोहियों की मौत, दो के शव बरामद
सारांश
मुख्य बातें
ब्रॉड पीक (पाकिस्तान) पर 30 जुलाई 2026 को 6,600 मीटर की ऊँचाई पर आए एक भीषण हिमस्खलन ने विश्वप्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा 'निम्स दाई' समेत 10 सदस्यीय दल को निगल लिया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 2 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की कि दल के सभी सदस्यों की मृत्यु हो गई है और अब तक दो पर्वतारोहियों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
हादसे का घटनाक्रम
दुनिया की 12वीं सबसे ऊँची चोटी ब्रॉड पीक पर चढ़ाई के दौरान यह त्रासदी कैंप-2 से कैंप-3 के बीच के रास्ते में घटी। 43 वर्षीय निर्मल पुर्जा एक अंतरराष्ट्रीय दल का नेतृत्व कर रहे थे, जब गुरुवार दोपहर हिमस्खलन आया। एडवेंचर ग्रुप एलीट एक्सपेड ने पुष्टि की कि हादसे के तुरंत बाद दल के सभी 10 सदस्यों से संपर्क टूट गया।
किन पर्वतारोहियों की हुई मौत
नेपाल के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मृतकों में प्रसिद्ध पर्वतारोही निर्मल पुर्जा 'निम्स दाई' के साथ-साथ नेपाली पर्वतारोही — पुर बहादुर गुरुंग 'युक्ता', किली पेम्बा शेरपा 'किलु', निमा शेरपा, नवांग थिंडू शेरपा और ग्यालु शेरपा — तथा अंतरराष्ट्रीय दल के अन्य सदस्य शामिल हैं। मंत्रालय ने इसे पर्वतारोहण जगत के लिए 'अपूरणीय क्षति' बताया।
शव बरामदगी और खोज अभियान
अब तक पुर बहादुर गुरुंग 'युक्ता' और ग्यालु शेरपा के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि शेष सदस्यों की तलाश जारी है। इस्लामाबाद स्थित नेपाली दूतावास शवों को स्वदेश लाने की प्रक्रिया में जुटा है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने खोज एवं बचाव अभियान में सहयोग के लिए पाकिस्तानी एजेंसियों की सराहना की और कहा, 'हम ऊँचे हिमालयी क्षेत्र में मुश्किल खोज अभियान चलाने में शामिल पाकिस्तानी और नेपाली पर्वतारोहण टीमों की बहादुरी की सराहना करते हैं।'
राजनीतिक प्रतिक्रिया और श्रद्धांजलि
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने पुर्जा के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने फेसबुक पर लिखा, 'पहाड़ कई पर्वतारोहियों को अपनी चोटियों तक पहुँचने का गौरव देते हैं, लेकिन कभी-कभी वे उन्हें हमेशा के लिए गले भी लगा लेते हैं। फिर भी पर्वतारोही अपनी हिम्मत और लगन से इतिहास में अमर रहते हैं।' नेपाल सरकार के विदेश मंत्रालय ने शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
पर्वतारोहण जगत पर असर
निर्मल पुर्जा पर्वतारोहण की दुनिया में एक असाधारण नाम थे — उन्होंने विश्व के सभी 14 आठ-हज़ारी शिखरों पर रिकॉर्ड समय में चढ़ाई कर इतिहास रचा था। उनके साथ गए शेरपा और अंतरराष्ट्रीय दल के सदस्य भी अनुभवी पर्वतारोही थे। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब उच्च-हिमालयी अभियानों में जोखिम और जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते हिमस्खलन को लेकर पर्वतारोहण समुदाय में गंभीर चिंता बढ़ रही है। खोज अभियान अभी जारी है और शेष सदस्यों के बारे में ताज़ा जानकारी की प्रतीक्षा है।