केटीआर का कांग्रेस-भाजपा पर हमला: ईडी छापों के दो साल बाद भी 'सन्नाटा', अपवित्र गठबंधन का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव (केटीआर) ने 27 सितंबर 2026 को कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तेलंगाना में 'अपवित्र गठबंधन' बनाने का आरोप लगाया और दावा किया कि यह गठजोड़ ठीक दो साल पहले सार्वजनिक हो गया था। केटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के उन छापों का हवाला दिया, जो 27 सितंबर 2024 को तेलंगाना के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी से जुड़ी 16 जगहों पर पड़े थे।
केटीआर का आरोप: छापे के बाद छा गया सन्नाटा
केटीआर ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को टैग करते हुए कहा, 'तेलंगाना में कांग्रेस-भाजपा का अपवित्र गठबंधन आधिकारिक हुए ठीक दो साल हो गए हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी की छापेमारी के दो साल बाद भी न तो एजेंसी ने और न ही BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने छापेमारी के नतीजों या जब्त वस्तुओं का कोई आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया है।
केटीआर ने सवाल उठाया, 'भाजपा अलग-अलग केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके विपक्षी नेताओं को परेशान करती है, लेकिन जब निशाना कांग्रेस का कोई मंत्री होता है, तो एकदम सन्नाटा क्यों छा जाता है? कांग्रेस पार्टी के मंत्री को भाजपा से छूट क्यों मिल रही है? अजब प्रेम की गजब कहानी।'
ईडी की छापेमारी: क्या हुआ था 2024 में
27 सितंबर 2024 को ईडी की टीमें नई दिल्ली से हैदराबाद पहुँची थीं और मनी-लॉन्ड्रिंग मामले में मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी तथा अन्य से जुड़े 16 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें मंत्री का नरसिंगी स्थित आवास और जुबली हिल्स व बंजारा हिल्स के कार्यालय शामिल थे। उस समय उनके आवास से कई कैश-काउंटिंग मशीनें बरामद होने की खबरें सुर्खियों में रही थीं। गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर 2023 में विधानसभा चुनावों के दौरान भी ईडी श्रीनिवास रेड्डी के घर और दफ्तरों की तलाशी ले चुकी थी।
पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी: राजनीतिक सफर
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कैबिनेट में श्रीनिवास रेड्डी राजस्व, आवास और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे अहम विभाग सँभाल रहे हैं। राजनीति में आने से पहले वे एक बिजनेसमैन थे और उनके नाम पर एक कंस्ट्रक्शन कंपनी भी है जो उनके बेटे राघव के नाम पर है।
वे 2014 में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के टिकट पर खम्मम से सांसद चुने गए, फिर बीआरएस में शामिल हुए। 2019 में बीआरएस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। 2023 के विधानसभा चुनावों से पहले वे कांग्रेस में आ गए और खम्मम जिले की पलायर विधानसभा सीट से विजयी हुए।
राजनीतिक संदर्भ: बीआरएस का व्यापक हमला
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में बीआरएस विपक्ष की भूमिका में है और 2023 के चुनावों में सत्ता खोने के बाद से कांग्रेस सरकार पर लगातार दबाव बनाए हुए है। केटीआर की यह पोस्ट दो साल की उस सालगिरह पर आई जब ईडी छापे पड़े थे, जो इसे एक रणनीतिक राजनीतिक संदेश के रूप में स्थापित करती है। आलोचकों का कहना है कि इस मुद्दे पर केंद्र की चुप्पी सवाल खड़े करती है, हालाँकि ईडी और सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह देखना होगा कि क्या इस मुद्दे पर कांग्रेस और BJP दोनों की ओर से कोई स्पष्टीकरण आता है, या यह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेलंगाना की राजनीति में नई बहस छेड़ेगा।