24 अगस्त 2026
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बौद्ध विकास निगम को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में शामिल करें: कर्नाटक CM शिवकुमार से बौद्ध प्रतिनिधिमंडल की मांग

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बौद्ध विकास निगम को अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में शामिल करें: कर्नाटक CM शिवकुमार से बौद्ध प्रतिनिधिमंडल की मांग

सारांश

बौद्ध भिक्षुओं का प्रतिनिधिमंडल कर्नाटक CM शिवकुमार से मिला और माँग की कि बौद्ध विकास निगम को सामाजिक कल्याण विभाग से हटाकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत लाया जाए — ठीक उसी तरह जैसे ईसाई विकास प्राधिकरण को दर्जा प्राप्त है।

मुख्य बातें

24 अगस्त 2026 को बौद्ध भिक्षुओं के प्रतिनिधिमंडल ने विधान सौधा, बेंगलुरु में CM डीके शिवकुमार से मुलाकात की।
प्रतिनिधिमंडल ने माँग की कि बौद्ध विकास निगम (BDC) को सामाजिक कल्याण विभाग के बजाय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन लाया जाए।
नेतृत्व कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य जिग्मेत वाग्दोष ज्योति ने किया; भिक्षु लोबसांग नोरबू और पानिचाइतो भी शामिल थे।
BDC का प्रावधान 2026-27 के राज्य बजट में किया गया था, जिसे समुदाय ने दीर्घकालिक माँग की पूर्ति बताया।
प्रतिनिधिमंडल ने ईसाई विकास प्राधिकरण को मिले दर्जे का हवाला देते हुए समान प्रशासनिक ढाँचे की माँग की।

बेंगलुरु में 24 अगस्त 2026 को बौद्ध भिक्षुओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर माँग की कि हाल ही में घोषित बौद्ध विकास निगम (BDC) को सामाजिक कल्याण विभाग के बजाय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन लाया जाए। यह बैठक विधान सौधा में हुई, जहाँ प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल की संरचना और मुख्य माँग

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य जिग्मेत वाग्दोष ज्योति ने किया। इसमें बौद्ध भिक्षु लोबसांग नोरबू, पानिचाइतो तथा विभिन्न राज्यों से आए कई अन्य भिक्षु शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि BDC को ईसाई विकास प्राधिकरण की तर्ज पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत संचालित किया जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक ढाँचा अधिक प्रभावी हो सके।

राज्य सरकार के कदम की सराहना

भिक्षुओं ने 2026-27 के बजट में बौद्ध समुदाय के लिए एक अलग विकास निगम का प्रावधान करने पर राज्य सरकार की सराहना की और इसे समुदाय की दीर्घकालिक माँग की पूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्नाटक में बौद्धों की सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पहचानने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।

विभाग परिवर्तन क्यों ज़रूरी — प्रतिनिधिमंडल का तर्क

प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत आने से BDC को एक बेहतर प्रशासनिक ढाँचा मिलेगा, जिससे कल्याण और विकास कार्यक्रम सही लाभार्थियों तक पहुँच सकेंगे। भिक्षुओं ने यह भी माँग की कि प्रस्तावित निगम को शीघ्र पूरी तरह चालू किया जाए और बौद्ध समुदाय के समग्र उत्थान के लिए ठोस कार्यक्रम शुरू किए जाएँ।

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ज्ञापन स्वीकार किया और प्रतिनिधिमंडल की माँगों पर विचार करने का आश्वासन दिया, हालाँकि किसी आधिकारिक निर्णय की घोषणा अभी नहीं की गई है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब कर्नाटक सरकार अल्पसंख्यक समुदायों की विकास संबंधी आवश्यकताओं को संस्थागत रूप देने की दिशा में सक्रिय है। BDC के विभागीय हस्तांतरण पर सरकार का अगला कदम बौद्ध समुदाय की प्रशासनिक स्थिति को निर्धारित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि सामाजिक कल्याण की छतरी के नीचे एक और निगम। कर्नाटक सरकार के लिए यह निर्णय नाज़ुक है — एक ओर बहुसंख्यक वर्ग की संवेदनाएँ हैं, दूसरी ओर अल्पसंख्यक समानता का संवैधानिक दायित्व। यदि BDC को अल्पसंख्यक विभाग में स्थानांतरित किया जाता है, तो यह राज्य में अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बौद्ध विकास निगम (BDC) क्या है और इसकी घोषणा कब हुई?
बौद्ध विकास निगम (BDC) कर्नाटक सरकार द्वारा 2026-27 के राज्य बजट में घोषित एक समर्पित निगम है, जिसका उद्देश्य राज्य में बौद्ध समुदाय की सामाजिक-आर्थिक और विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना है। फिलहाल यह सामाजिक कल्याण विभाग के अधीन प्रस्तावित है।
बौद्ध प्रतिनिधिमंडल BDC को किस विभाग में लाना चाहता है और क्यों?
प्रतिनिधिमंडल चाहता है कि BDC को सामाजिक कल्याण विभाग से हटाकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के तहत लाया जाए, ठीक उसी तरह जैसे ईसाई विकास प्राधिकरण को दर्जा प्राप्त है। उनका तर्क है कि इससे बेहतर प्रशासनिक ढाँचा मिलेगा और कल्याण योजनाएँ सही लाभार्थियों तक पहुँचेंगी।
इस बैठक में कौन-कौन शामिल थे?
बैठक का नेतृत्व कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य जिग्मेत वाग्दोष ज्योति ने किया। इसमें बौद्ध भिक्षु लोबसांग नोरबू, पानिचाइतो और विभिन्न राज्यों से आए अन्य भिक्षु भी शामिल थे, जिन्होंने CM डीके शिवकुमार को विधान सौधा में ज्ञापन सौंपा।
कर्नाटक सरकार ने इस माँग पर क्या रुख अपनाया है?
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने ज्ञापन स्वीकार किया और प्रतिनिधिमंडल की माँगों पर विचार करने का आश्वासन दिया। हालाँकि, विभागीय हस्तांतरण पर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।
BDC के अल्पसंख्यक विभाग में आने से बौद्ध समुदाय को क्या फायदा होगा?
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत आने से BDC को अल्पसंख्यक-केंद्रित नीतियों और संसाधनों तक सीधी पहुँच मिलेगी। इससे बौद्ध समुदाय के लिए कल्याण कार्यक्रम अधिक प्रभावी ढंग से लागू हो सकेंगे और संस्थागत दर्जे में समानता सुनिश्चित होगी।
राष्ट्र प्रेस
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