CBI ने आयकर पूर्व आयुक्त जीवनलाल लावड़िया और CISF पूर्व DIG शिप्रा श्रीवास्तव के खिलाफ FIR दर्ज की, ₹1.11 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने 10 सितंबर 2026 को आयकर विभाग के पूर्व आयुक्त जीवनलाल लावड़िया और उनकी पत्नी, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की तत्कालीन उप महानिरीक्षक (DIG) शिप्रा श्रीवास्तव के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के कथित मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। CBI की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा-III, नई दिल्ली द्वारा दर्ज इस FIR के अनुसार, कथित तौर पर अर्जित अतिरिक्त संपत्ति ज्ञात आय से लगभग 57.10 प्रतिशत अधिक आँकी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 2004 बैच के अधिकारी जीवनलाल लावड़िया पर आरोप है कि उन्होंने 1 अप्रैल 2022 से 10 मई 2025 के बीच अपने पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से संपत्ति जमा की। CBI के अनुसार, जाँच अवधि में लावड़िया और उनके परिवार की कुल संपत्ति एवं व्यय ₹3,07,52,247 पाया गया, जबकि इस दौरान उनकी ज्ञात कुल आय ₹1,95,74,358 दर्ज की गई। इस आधार पर ₹1,11,77,889 की कथित आय से अधिक संपत्ति का अनुमान लगाया गया है।
FIR में यह भी उल्लेख किया गया है कि जाँच अवधि समाप्त होने तक लावड़िया और उनके परिवार की कुल संपत्तियों का मूल्य कथित तौर पर ₹4,31,60,820 था।
छापेमारी में क्या मिला
9 मई 2025 को CBI ने जीवनलाल लावड़िया और शिप्रा श्रीवास्तव के आवास सहित कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान चल और अचल संपत्तियों से संबंधित अनेक दस्तावेज बरामद किए गए, जो कथित तौर पर दंपती और उनके परिजनों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों से जुड़े थे।
दिल्ली स्थित आवास से कुछ हस्तलिखित दस्तावेज और संपत्तियों के ब्योरे वाली शीट्स भी कथित तौर पर मिलीं। इसके अलावा FIR में लगभग ₹54 लाख नकद से संबंधित विवरण बरामद होने का भी उल्लेख है।
पहले भी दर्ज हो चुका है मामला
CBI के अनुसार, 9 मई 2025 को लावड़िया और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ एक पृथक मामला भी दर्ज किया गया था। उस मामले में उन पर करदाताओं के पक्ष में कर अपीलों का निपटारा करने के बदले कथित तौर पर अनुचित लाभ लेने के आरोप लगाए गए थे। गौरतलब है कि लावड़िया हैदराबाद में कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (एग्ज़ेम्प्शंस) के पद पर तैनात थे और उनके पास कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स (अपील) — यूनिट 7 और यूनिट 8 का अतिरिक्त प्रभार भी था। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर CBI की सक्रियता बढ़ी है।
कानूनी आधार और जाँच की स्थिति
जीवनलाल लावड़िया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(2) और 13(1)(बी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं शिप्रा श्रीवास्तव पर इसी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत सहयोगी की भूमिका निभाने का आरोप है।
मामले की जाँच CBI के इंस्पेक्टर नवीन कुमार को सौंपी गई है। एजेंसी अब कथित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और बरामद दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल कर रही है। FIR दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जाँच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।