MP लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई: बिजली कंपनी अधिकारी के 9 ठिकानों पर रेड, आय से 258% अधिक ₹7.16 करोड़ की संपत्ति उजागर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश लोकायुक्त ने 22 जुलाई 2025 को मध्य प्रदेश वेस्ट जोन इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के एक वरिष्ठ वित्त अधिकारी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति के मामले में इंदौर, धार और मुरैना में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों को ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो यह संकेत देते हैं कि संबंधित अधिकारी की कुल संपत्ति उसकी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग 258 प्रतिशत अधिक है।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार सुबह से ही लोकायुक्त की टीमों ने अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और औद्योगिक परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई की अगुवाई लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक राजेश सहाय ने की। डीएसपी सुनील टलन, आनंद चौहान, दिनेश पटेल और दीपक शेजवार की टीमों ने अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी ली।
इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज़, बैंक खाते और कथित बेनामी निवेश की गहन पड़ताल की गई।
आय और संपत्ति का अंतर
लोकायुक्त के अनुसार, यह अधिकारी करीब 33 वर्षों से सरकारी सेवा में कार्यरत है। इस पूरी सेवा अवधि में उसे कुल मिलाकर लगभग ₹2 करोड़ वेतन प्राप्त हुआ। हालाँकि, जांच में अधिकारी और उसके परिवार के नाम पर ₹6.5 करोड़ से अधिक की संपत्ति और निवेश का पता चला है।
सेवा अवधि के दौरान हुए खर्चों को भी जोड़ने के बाद कुल खर्च और संपत्ति का मूल्य ₹7.16 करोड़ से अधिक आंका गया है — जो ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में करीब 258 प्रतिशत अधिक है।
जब्त और चिह्नित संपत्तियाँ
तलाशी के दौरान अधिकारियों को इंदौर के सिलिकॉन सिटी में लगभग ₹1.2 करोड़ का तीन मंजिला मकान और मुरैना में करीब ₹50 लाख का दो मंजिला मकान मिला। इसके अलावा पिथमपुर और धार में परिवार के सदस्यों के नाम पर ट्रांसफॉर्मर निर्माण इकाइयाँ और विद्युत उपकरणों का व्यवसाय संचालित होने की जानकारी सामने आई।
जांच में इंदौर में इन व्यवसायों से जुड़े औद्योगिक प्लॉट, फैक्ट्री परिसर, कंपनी कार्यालय, आवासीय प्लॉट और एक इलेक्ट्रिक कार भी चिह्नित की गई। इन कंपनियों के मालिकाना हक, निवेश और वित्तीय लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
आगे की जांच
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि तलाशी अभियान अभी जारी है। दस्तावेज़ों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच पूरी होने के बाद आय से अधिक संपत्ति का आंकड़ा और बढ़ सकता है। यह मामला मध्य प्रदेश में सार्वजनिक उपक्रमों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही लोकायुक्त की कार्रवाइयों की श्रृंखला में एक और कड़ी है।