14 अगस्त 2026
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इंदौर नगर निगम अधिकारी जितेंद्र पाण्डेय पर लोकायुक्त का छापा, ₹2.5 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति उजागर

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इंदौर नगर निगम अधिकारी जितेंद्र पाण्डेय पर लोकायुक्त का छापा, ₹2.5 करोड़ की अनुपातहीन संपत्ति उजागर

सारांश

इंदौर में लोकायुक्त के छापे ने नगर निगम के एक अधिकारी की असली तस्वीर उजागर की — 31 साल की नौकरी में ₹80 लाख की तनख्वाह, मगर ढाई करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति। पत्नी के नाम पर दो भवन, छात्रावास और वाहन — भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज।

मुख्य बातें

लोकायुक्त ने 14 अगस्त 2026 को इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पाण्डेय के गजाधर नगर स्थित आवास पर छापा मारा।
31 वर्षों के सेवाकाल में कुल वैध आय ₹80 लाख के मुकाबले अनुमानित व्यय ₹2.5 करोड़ — अंतर 216.35% ।
पत्नी भावना पाण्डेय के नाम पर दो स्थानों पर भवन निर्माण — एक पर ₹1 करोड़ 20 लाख , दूसरे पर ₹91.5 लाख खर्च।
पत्नी के नाम पर गजाधर नगर में छात्रावास भी संचालित पाया गया।
पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम पर वाहनों सहित अन्य मदों में ₹14 लाख अतिरिक्त व्यय।
भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज; जाँच जारी।

मध्य प्रदेश के इंदौर में लोकायुक्त ने 14 अगस्त 2026 को नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पाण्डेय के गजाधर नगर स्थित आवास पर छापा मारा, जिसमें उनकी वैध आय की तुलना में 216.35 प्रतिशत अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ। अधिकारियों के अनुसार, 31 वर्षों के सेवाकाल में कुल वेतन ₹80 लाख रहा, जबकि अनुमानित व्यय ₹2.5 करोड़ से अधिक पाया गया।

मुख्य घटनाक्रम

लोकायुक्त की टीम ने जब जितेंद्र कुमार पाण्डेय के निवास की तलाशी ली, तो कई स्थानों पर उनके परिवार के नाम से संपत्तियाँ दर्ज मिलीं। जाँच में सामने आया कि पाण्डेय ने अपनी पत्नी भावना पाण्डेय के नाम से आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा चितावद, गजाधर नगर, इंदौर में 40×50 के भूखण्ड (क्रमांक 23) पर भूतल सहित तीन मंजिला भवन का निर्माण कराया, जिस पर कथित तौर पर लगभग ₹1 करोड़ 20 लाख खर्च हुए।

इसके अतिरिक्त, गजाधर नगर, चितावद गुलमोहर का बगीचा, इंदौर में भूखण्ड क्रमांक 32 पर भावना पाण्डेय के ही नाम से भूतल और दो मंजिला भवन बनाकर एक छात्रावास संचालित किया जा रहा है। इस निर्माण पर अनुमानित ₹91 लाख 50 हजार व्यय होना पाया गया।

वाहन और अन्य खर्च

जाँच दल ने यह भी पाया कि जितेंद्र पाण्डेय ने अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम पर चार पहिया एवं दो पहिया वाहनों की खरीद सहित अन्य मदों में लगभग ₹14 लाख अतिरिक्त व्यय किए। इस प्रकार कुल अनुमानित व्यय ₹2.5 करोड़ के करीब पहुँचता है, जो 31 वर्षों की वैध आय ₹80 लाख से लगभग ₹1.75 करोड़ अधिक है।

कानूनी कार्रवाई

लोकायुक्त अधिकारियों ने जितेंद्र कुमार पाण्डेय के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं। यह मामला इंदौर नगर निगम के राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की ओर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि नगर निगम का राजस्व विभाग संपत्ति कर, व्यापार लाइसेंस और अन्य नागरिक शुल्कों के संग्रह के लिए जिम्मेदार होता है। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की कार्रवाइयाँ तेज हुई हैं और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता की माँग बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों में इस खुलासे के बाद नगर निगम की जवाबदेही को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है।

क्या होगा आगे

लोकायुक्त की जाँच अभी जारी है और संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि पर कठोर दंड का प्रावधान है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं क्योंकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज संपत्तियों की भी जाँच की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ इस स्तर का भ्रष्टाचार संस्थागत विफलता को दर्शाता है। केवल एफआईआर से न्याय नहीं होगा — संपत्ति की त्वरित कुर्की और विभागीय जाँच ज़रूरी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर नगर निगम अधिकारी जितेंद्र पाण्डेय पर लोकायुक्त ने क्या कार्रवाई की?
लोकायुक्त ने 14 अगस्त 2026 को जितेंद्र कुमार पाण्डेय के इंदौर स्थित आवास पर छापा मारा और उनकी वैध आय से 216.35% अधिक संपत्ति पाई। भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
जितेंद्र पाण्डेय की कुल अनुपातहीन संपत्ति कितनी है?
31 वर्षों के सेवाकाल में उनकी कुल वैध आय ₹80 लाख आँकी गई, जबकि अनुमानित व्यय ₹2.5 करोड़ से अधिक पाया गया। इस प्रकार वैध आय से लगभग ₹1.75 करोड़ अधिक संपत्ति अर्जित की गई।
पाण्डेय की संपत्तियाँ किन-किन के नाम पर हैं?
अधिकांश संपत्तियाँ उनकी पत्नी भावना पाण्डेय के नाम पर दर्ज हैं — दो स्थानों पर बहुमंजिला भवन और एक छात्रावास। इसके अलावा पुत्र और पुत्री के नाम पर वाहन भी खरीदे गए।
इस मामले में आगे क्या होगा?
लोकायुक्त की जाँच अभी जारी है और संपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा रहा है। भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम के तहत दोषसिद्धि पर कठोर दंड और संपत्ति जब्ती का प्रावधान है।
इंदौर नगर निगम का राजस्व विभाग क्या काम करता है?
नगर निगम का राजस्व विभाग संपत्ति कर, व्यापार लाइसेंस और अन्य नागरिक शुल्कों के संग्रह के लिए जिम्मेदार होता है। इस विभाग में भ्रष्टाचार का सीधा असर आम नागरिकों की सेवाओं और सार्वजनिक राजस्व पर पड़ता है।
राष्ट्र प्रेस
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