इंदौर: बिजली इंजीनियर शिवराम सेमिल के 9 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, आय से 258% अधिक संपत्ति उजागर
सारांश
मुख्य बातें
इंदौर में मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के विरुद्ध 21 जुलाई 2026 को लोकायुक्त ने एकसाथ नौ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें उनकी संपत्ति वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक पाई गई। 33 वर्षों के सेवाकाल में कुल वेतन ₹2 करोड़ के मुकाबले व्यय ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक आँका गया है। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।
कहाँ-कहाँ चली तलाशी
लोकायुक्त की टीम ने इंदौर के 4 ठिकानों, पीथमपुर के 2 ठिकानों, धार के 2 ठिकानों और मुरैना के 1 ठिकाने पर एकसाथ दबिश दी। अधिकारियों के अनुसार, पहले सूचनाओं का परीक्षण किया गया और सही पाए जाने पर समन्वित छापामार कार्रवाई की गई।
मुख्य संपत्तियाँ जो मिलीं
इंदौर के सिलिकॉन सिटी, सी-44 स्थित भूखंड पर एक तीन मंजिला भव्य आवास पाया गया, जिसकी अनुमानित लागत ₹1 करोड़ 20 लाख बताई गई है। इसके अलावा पीथमपुर सेक्टर 3, प्लॉट क्रमांक 749 पर इंजीनियर सेमिल के पुत्र शुभम के नाम से 'शुभम इलेक्ट्रिकल' नामक फैक्ट्री मिली, जहाँ ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। यह फैक्ट्री 880 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली है और इसकी अनुमानित लागत ₹1 करोड़ 25 लाख आँकी गई है।
पुत्रवधू और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर एक कंपनी पंजीकृत है, जिसकी शेयर पूंजी ₹50 लाख है और एक ₹1 करोड़ लागत की फैक्ट्री भी स्थापित पाई गई। इसी तरह उज्जैन में भी लगभग ₹1 करोड़ 50 लाख की एक और फैक्ट्री का खुलासा हुआ है।
आय-व्यय का असंतुलन
लोकायुक्त के आकलन के अनुसार, 33 वर्षों के सेवाकाल में आरोपी इंजीनियर की कुल वैध आय लगभग ₹2 करोड़ रही, जबकि उनके द्वारा ₹6 करोड़ 50 लाख से अधिक व्यय किया गया। जीवन-यापन व्यय को कुल आय का 33 प्रतिशत जोड़ने पर कुल व्यय ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक बैठता है, जो वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।
कानूनी कार्रवाई
लोकायुक्त ने शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और धारा 13(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है। टीम द्वारा आगे की कार्रवाई जारी है। गौरतलब है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह हाल के वर्षों में एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
लोकायुक्त की जाँच टीम अब एकत्रित दस्तावेज़ों और संपत्तियों की विस्तृत जाँच करेगी। संभावना है कि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर पंजीकृत कंपनियों और फैक्ट्रियों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। मामले में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू होगी।