21 जुलाई 2026
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इंदौर: बिजली इंजीनियर शिवराम सेमिल के 9 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, आय से 258% अधिक संपत्ति उजागर

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इंदौर: बिजली इंजीनियर शिवराम सेमिल के 9 ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, आय से 258% अधिक संपत्ति उजागर

सारांश

इंदौर के बिजली इंजीनियर शिवराम सेमिल पर लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई — 9 ठिकानों पर छापे में ₹7 करोड़ से अधिक की संपत्ति उजागर, जो 33 साल की वैध आय से 258% अधिक है। ट्रांसफार्मर फैक्ट्री से लेकर तीन मंजिला आवास तक, परिवार के नाम पर बिखरी संपत्ति ने जाँचकर्ताओं को चौंकाया।

मुख्य बातें

लोकायुक्त ने 21 जुलाई 2026 को अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के 9 ठिकानों पर एकसाथ छापे मारे।
संपत्ति वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक; 33 वर्षों में ₹2 करोड़ की आय के मुकाबले ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक व्यय।
इंदौर के सिलिकॉन सिटी में ₹1 करोड़ 20 लाख का तीन मंजिला आवास और पीथमपुर में ₹1 करोड़ 25 लाख की ट्रांसफार्मर फैक्ट्री मिली।
परिवार के सदस्यों के नाम पर ₹50 लाख शेयर पूंजी की कंपनी और उज्जैन में ₹1 करोड़ 50 लाख की फैक्ट्री भी उजागर।
भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) व 13(2) के तहत अपराध पंजीबद्ध।

इंदौर में मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री शिवराम सेमिल के विरुद्ध 21 जुलाई 2026 को लोकायुक्त ने एकसाथ नौ ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसमें उनकी संपत्ति वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक पाई गई। 33 वर्षों के सेवाकाल में कुल वेतन ₹2 करोड़ के मुकाबले व्यय ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक आँका गया है। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

कहाँ-कहाँ चली तलाशी

लोकायुक्त की टीम ने इंदौर के 4 ठिकानों, पीथमपुर के 2 ठिकानों, धार के 2 ठिकानों और मुरैना के 1 ठिकाने पर एकसाथ दबिश दी। अधिकारियों के अनुसार, पहले सूचनाओं का परीक्षण किया गया और सही पाए जाने पर समन्वित छापामार कार्रवाई की गई।

मुख्य संपत्तियाँ जो मिलीं

इंदौर के सिलिकॉन सिटी, सी-44 स्थित भूखंड पर एक तीन मंजिला भव्य आवास पाया गया, जिसकी अनुमानित लागत ₹1 करोड़ 20 लाख बताई गई है। इसके अलावा पीथमपुर सेक्टर 3, प्लॉट क्रमांक 749 पर इंजीनियर सेमिल के पुत्र शुभम के नाम से 'शुभम इलेक्ट्रिकल' नामक फैक्ट्री मिली, जहाँ ट्रांसफार्मर बनाए जाते हैं। यह फैक्ट्री 880 वर्गमीटर क्षेत्र में फैली है और इसकी अनुमानित लागत ₹1 करोड़ 25 लाख आँकी गई है।

पुत्रवधू और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर एक कंपनी पंजीकृत है, जिसकी शेयर पूंजी ₹50 लाख है और एक ₹1 करोड़ लागत की फैक्ट्री भी स्थापित पाई गई। इसी तरह उज्जैन में भी लगभग ₹1 करोड़ 50 लाख की एक और फैक्ट्री का खुलासा हुआ है।

आय-व्यय का असंतुलन

लोकायुक्त के आकलन के अनुसार, 33 वर्षों के सेवाकाल में आरोपी इंजीनियर की कुल वैध आय लगभग ₹2 करोड़ रही, जबकि उनके द्वारा ₹6 करोड़ 50 लाख से अधिक व्यय किया गया। जीवन-यापन व्यय को कुल आय का 33 प्रतिशत जोड़ने पर कुल व्यय ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक बैठता है, जो वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जा रही है।

कानूनी कार्रवाई

लोकायुक्त ने शिवराम सेमिल के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और धारा 13(2) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया है। टीम द्वारा आगे की कार्रवाई जारी है। गौरतलब है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामलों में यह हाल के वर्षों में एक बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

आगे क्या होगा

लोकायुक्त की जाँच टीम अब एकत्रित दस्तावेज़ों और संपत्तियों की विस्तृत जाँच करेगी। संभावना है कि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर पंजीकृत कंपनियों और फैक्ट्रियों की भी गहन पड़ताल की जाएगी। मामले में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि बिजली वितरण क्षेत्र में संरचनागत कमज़ोरियों का आईना है — जहाँ ठेके, ट्रांसफार्मर खरीद और कनेक्शन अनुमोदन में अधिकारियों का एकाधिकार भ्रष्टाचार की उपजाऊ ज़मीन तैयार करता है। यह उल्लेखनीय है कि आरोपी के पुत्र की ट्रांसफार्मर फैक्ट्री उसी विभाग की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी हो सकती है जहाँ पिता कार्यरत थे — इस संभावित हितों के टकराव की जाँच अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। लोकायुक्त की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि 33 वर्षों तक यह सब विभागीय निगरानी की नज़र से कैसे बचा रहा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवराम सेमिल कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
शिवराम सेमिल मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, इंदौर में अधीक्षण यंत्री (सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर) के पद पर कार्यरत हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने 33 वर्षों के सेवाकाल में वैध आय से 258 प्रतिशत अधिक संपत्ति अवैध रूप से अर्जित की।
लोकायुक्त को कितनी और कहाँ-कहाँ संपत्ति मिली?
लोकायुक्त को इंदौर, पीथमपुर, धार, मुरैना और उज्जैन में कुल 9 ठिकानों पर संपत्तियाँ मिलीं। इनमें इंदौर में ₹1 करोड़ 20 लाख का तीन मंजिला आवास, पीथमपुर में ₹1 करोड़ 25 लाख की ट्रांसफार्मर फैक्ट्री और उज्जैन में लगभग ₹1 करोड़ 50 लाख की फैक्ट्री शामिल है।
इस मामले में कौन-सी धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ है?
लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(बी) और धारा 13(2) के अंतर्गत शिवराम सेमिल के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। ये धाराएँ लोक सेवक द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने से संबंधित हैं।
आय और व्यय में कितना अंतर पाया गया?
33 वर्षों में आरोपी की कुल वैध आय लगभग ₹2 करोड़ रही, जबकि व्यय ₹6 करोड़ 50 लाख से अधिक पाया गया। जीवन-यापन व्यय जोड़ने पर कुल व्यय ₹7 करोड़ 16 लाख से अधिक बैठता है, जो आय से 258 प्रतिशत अधिक है।
क्या परिवार के सदस्य भी इस मामले में शामिल हैं?
जाँच में सामने आया है कि पुत्र शुभम के नाम पर पीथमपुर में ट्रांसफार्मर फैक्ट्री पंजीकृत है। इसके अलावा पुत्रवधू और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर ₹50 लाख शेयर पूंजी की एक कंपनी और ₹1 करोड़ लागत की फैक्ट्री भी स्थापित पाई गई है। इन सभी की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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