11 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक 2026: सीबीआई ने तीन गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू की, सुप्रीम कोर्ट ने NTA को नोटिस दिया

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नीट पेपर लीक 2026: सीबीआई ने तीन गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू की, सुप्रीम कोर्ट ने NTA को नोटिस दिया

सारांश

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच अब वित्तीय नेटवर्क तक फैल गई है — तीन आरोपियों की संपत्तियाँ खँगाली जा रही हैं और 2024 के मामले से कड़ी जोड़ने की कोशिश है। ऊपर से सर्वोच्च न्यायालय की तीखी टिप्पणी कि 'कोई सबक नहीं लिया गया' — यह NTA की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू की।
जांच एजेंसी यह भी पड़ताल कर रही है कि क्या ये आरोपी 2024 के कथित नीट पेपर लीक में भी शामिल थे।
पुणे की शिक्षिकाओं मनीषा गुरुनाथ मंधारे और मनीषा हवलदार के ठिकानों पर सोमवार को दोबारा छापेमारी हुई।
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई को केंद्र सरकार और NTA को नोटिस जारी किया; अगली सुनवाई 29 मई को।
पीठ ने NTA और प्रोफेसर के.
राधाकृष्णन को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया — 14 नवंबर 2024 की निगरानी समिति की सिफारिशों के पालन का ब्यौरा माँगा।
अदालत की टिप्पणी: 'यह दुखद है कि उन्होंने इससे कोई सबक नहीं लिया।'

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संपत्तियों की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन आरोपियों ने पेपर लीक रैकेट से अर्जित धन से अवैध संपत्तियाँ खरीदी हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई को केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच

अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों द्वारा खरीदी गई संपत्तियाँ पेपर लीक रैकेट की कमाई से तो नहीं हैं। जांच एजेंसी यह भी खँगाल रही है कि क्या ये आरोपी 2024 में सामने आए कथित नीट पेपर लीक मामले में भी संलिप्त थे। दोनों मामलों के बीच संभावित कड़ी की पड़ताल की जा रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि कहीं एक ही गिरोह लंबे समय से यह रैकेट संचालित तो नहीं कर रहा था।

पुणे के शिक्षकों पर छापेमारी

सोमवार को सीबीआई ने पुणे की बॉटनी शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स लेक्चरर मनीषा हवलदार से जुड़े ठिकानों पर दोबारा छापेमारी की। जब्त दस्तावेजों और तलाशी अभियान से मामले में अहम सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुणे के कुछ अन्य प्रोफेसर भी जांच के दायरे में आ सकते हैं और उनसे पूछताछ की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने 26 मई को केंद्र सरकार, NTA और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। यह नोटिस उन याचिकाओं पर जारी किया गया जिनमें नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और कथित 2026 पेपर लीक विवाद के बाद तत्काल कंप्यूटर-आधारित परीक्षा लागू करने की माँग की गई है। पीठ ने याचिकाओं की प्रतियाँ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 29 मई, शुक्रवार को तय की।

अदालत की तीखी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह दुखद है कि उन्होंने इससे कोई सबक नहीं लिया।' अदालत ने याद दिलाया कि नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद पूर्व इसरो प्रमुख प्रोफेसर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशें स्वीकार की गई थीं और निगरानी तंत्र भी लागू किया गया था — फिर भी परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल फिर से उठ रहे हैं।

NTA और राधाकृष्णन को हलफनामे का निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने NTA को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें 14 नवंबर 2024 को गठित निगरानी समिति की सिफारिशों के पालन की वर्तमान स्थिति और उसके कामकाज का विवरण हो। प्रोफेसर राधाकृष्णन से भी अलग हलफनामे में यह स्पष्ट करने को कहा गया कि समिति की सिफारिशों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को लागू करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। ये निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए गए। आने वाले दिनों में सीबीआई की जांच और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई दोनों मिलकर यह तय करेंगी कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पुनः स्थापित हो पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल किसी एक परीक्षा पर। सीबीआई की संपत्ति जांच और 2024 के मामले से कड़ी जोड़ने की कोशिश संकेत देती है कि यह रैकेट छिटपुट नहीं, बल्कि संगठित और दीर्घकालिक हो सकता है। जब तक परीक्षा प्रणाली में कंप्यूटर-आधारित परीक्षा और स्वतंत्र ऑडिट जैसे ढाँचागत बदलाव नहीं होते, हर साल यही चक्र दोहराने का जोखिम बना रहेगा।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक 2026 मामले में सीबीआई क्या जांच कर रही है?
सीबीआई इस मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है, यह पता लगाने के लिए कि क्या ये संपत्तियाँ पेपर लीक रैकेट की कमाई से खरीदी गई हैं। इसके साथ ही एजेंसी 2024 के कथित नीट पेपर लीक से इन आरोपियों के संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है।
पुणे की शिक्षिकाओं पर सीबीआई ने छापेमारी क्यों की?
सीबीआई ने सोमवार को पुणे की बॉटनी शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स लेक्चरर मनीषा हवलदार से जुड़े ठिकानों पर दोबारा तलाशी ली। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि जब्त दस्तावेजों से पेपर लीक नेटवर्क में इनकी भूमिका के बारे में अहम सुराग मिलेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को नोटिस क्यों जारी किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई को केंद्र सरकार और NTA को नोटिस जारी किया, क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने नीट-यूजी परीक्षा में बड़े सुधार और तत्काल कंप्यूटर-आधारित परीक्षा लागू करने की माँग की है। अदालत ने यह भी कहा कि 2024 विवाद के बाद बनाई गई निगरानी समिति की सिफारिशों के बावजूद परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल फिर उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA से कौन सा हलफनामा माँगा है?
अदालत ने NTA को 14 नवंबर 2024 को गठित निगरानी समिति की सिफारिशों के पालन की वर्तमान स्थिति और उसके कामकाज का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। प्रोफेसर के. राधाकृष्णन से भी अलग हलफनामे में यह बताने को कहा गया कि समिति की सिफारिशें लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए।
नीट पेपर लीक मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई, शुक्रवार को तय की है। पीठ ने याचिकाओं की प्रतियाँ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपने का भी निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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