नीट पेपर लीक 2026: सीबीआई ने तीन गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों की जांच शुरू की, सुप्रीम कोर्ट ने NTA को नोटिस दिया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों की संपत्तियों की गहन जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को संदेह है कि इन आरोपियों ने पेपर लीक रैकेट से अर्जित धन से अवैध संपत्तियाँ खरीदी हैं। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने 26 मई को केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।
संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन की जांच
अधिकारियों के अनुसार, सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों द्वारा खरीदी गई संपत्तियाँ पेपर लीक रैकेट की कमाई से तो नहीं हैं। जांच एजेंसी यह भी खँगाल रही है कि क्या ये आरोपी 2024 में सामने आए कथित नीट पेपर लीक मामले में भी संलिप्त थे। दोनों मामलों के बीच संभावित कड़ी की पड़ताल की जा रही है ताकि यह स्थापित किया जा सके कि कहीं एक ही गिरोह लंबे समय से यह रैकेट संचालित तो नहीं कर रहा था।
पुणे के शिक्षकों पर छापेमारी
सोमवार को सीबीआई ने पुणे की बॉटनी शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स लेक्चरर मनीषा हवलदार से जुड़े ठिकानों पर दोबारा छापेमारी की। जब्त दस्तावेजों और तलाशी अभियान से मामले में अहम सुराग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पुणे के कुछ अन्य प्रोफेसर भी जांच के दायरे में आ सकते हैं और उनसे पूछताछ की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने 26 मई को केंद्र सरकार, NTA और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। यह नोटिस उन याचिकाओं पर जारी किया गया जिनमें नीट-यूजी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और कथित 2026 पेपर लीक विवाद के बाद तत्काल कंप्यूटर-आधारित परीक्षा लागू करने की माँग की गई है। पीठ ने याचिकाओं की प्रतियाँ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सौंपने का निर्देश दिया और अगली सुनवाई 29 मई, शुक्रवार को तय की।
अदालत की तीखी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह दुखद है कि उन्होंने इससे कोई सबक नहीं लिया।' अदालत ने याद दिलाया कि नीट-यूजी 2024 विवाद के बाद पूर्व इसरो प्रमुख प्रोफेसर के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशें स्वीकार की गई थीं और निगरानी तंत्र भी लागू किया गया था — फिर भी परीक्षा की पारदर्शिता पर सवाल फिर से उठ रहे हैं।
NTA और राधाकृष्णन को हलफनामे का निर्देश
सर्वोच्च न्यायालय ने NTA को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया, जिसमें 14 नवंबर 2024 को गठित निगरानी समिति की सिफारिशों के पालन की वर्तमान स्थिति और उसके कामकाज का विवरण हो। प्रोफेसर राधाकृष्णन से भी अलग हलफनामे में यह स्पष्ट करने को कहा गया कि समिति की सिफारिशों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को लागू करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। ये निर्देश फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिए गए। आने वाले दिनों में सीबीआई की जांच और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई दोनों मिलकर यह तय करेंगी कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता पुनः स्थापित हो पाती है या नहीं।