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सीबीएसई: विज्ञान की परीक्षा में नए पैटर्न का प्रभाव, ज्ञान और तर्क पर जोर

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सीबीएसई: विज्ञान की परीक्षा में नए पैटर्न का प्रभाव, ज्ञान और तर्क पर जोर

सारांश

सीबीएसई ने १०वीं विज्ञान परीक्षा में नए पैटर्न के तहत छात्रों को ज्ञान और तर्क पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित किया। पढ़ाई की नई प्रक्रिया ने परीक्षा को सरल बना दिया है।

मुख्य बातें

नए पैटर्न से परीक्षा में स्पष्टता आई है।
ज्ञान और तर्क पर जोर दिया गया है।
परीक्षा का समय और प्रक्रिया में सुधार हुआ है।
छात्रों को दोहरे अवसर का लाभ मिलेगा।
शिक्षा मंत्रालय के नए बदलाव छात्रों के लिए सुविधा प्रदान कर रहे हैं।

नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। सीबीएसई की १०वीं बोर्ड के लिए विज्ञान की परीक्षा बुधवार को लाखों विद्यार्थियों ने सम्पन्न की। इस वर्ष विज्ञान की परीक्षा नए पैटर्न पर आयोजित की गई थी।

पहली बार १०वीं बोर्ड के लिए विज्ञान का प्रश्नपत्र तीन अलग-अलग खंडों में विभाजित किया गया था, अर्थात् जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और भौतिकी। सामान्यतः यह पैटर्न बड़े कक्षाओं की परीक्षाओं में ही उपयोग किया जाता था, लेकिन इस वर्ष प्रश्न अलग-अलग खंडों में पूछे गए।

नई दिल्ली के एक परीक्षा केंद्र से बाहर आए छात्र नीरज गुप्ता ने बताया कि विज्ञान की परीक्षा पूरी तरह से पाठ्य पुस्तक पर आधारित थी। हालांकि प्रश्न अलग-अलग खंडों में विभाजित थे, लेकिन इससे उत्तर देने में स्पष्टता बनी रही। नीरज ने कहा कि उनकी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर जो चिंताएं थीं, उनके अनुसार परीक्षा सरल थी। उन्होंने यह भी बताया कि यह परीक्षा रटने के बजाय पढ़ाई पर आधारित थी।

दूसरी ओर, छात्रा पूजा शर्मा ने कहा कि विज्ञान की परीक्षा का यह नया पैटर्न काफी स्पष्टता प्रदान करता है। परीक्षा का यह तरीका छात्रों को अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद कर सकता है। प्रश्न ऐसे थे जो कक्षा में चर्चा किए गए थे।

शिक्षाविदों ने इसे एक संतुलित प्रश्न पत्र माना। शिक्षाविद केके कांडपाल के अनुसार यह परीक्षा पूरी तरह से ज्ञान पर आधारित थी। सिलेबस से बाहर का कोई प्रश्न नहीं पूछा गया। इस बार तर्क को अधिक महत्व दिया गया है, जिससे रटने की परंपरा को कम किया गया है।

यह ध्यान देने योग्य है कि जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, और भौतिकी में विभाजित प्रश्नों के लिए इस परीक्षा में कुल ८० अंक निर्धारित किए गए थे। सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं मंगलवार १७ फरवरी से भारत समेत २६ देशों में प्रारंभ हुई थीं। ४.३ मिलियन से अधिक छात्र १०वीं और १२वीं कक्षा की ये परीक्षाएं दे रहे हैं।

बुधवार को भी सामान्य दिनों की तरह बोर्ड परीक्षा अपने निर्धारित समय पर सुबह १० बजकर ३० मिनट पर शुरू हुई। छात्र सुबह १० बजे से पहले ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए थे। परीक्षा दोपहर १:३० बजे तक चली। बोर्ड परीक्षाओं के देश भर में ८,००० से अधिक परीक्षा केंद्र हैं। विज्ञान की यह परीक्षा भारत समेत २६ देशों में लाखों छात्रों ने दी है।

सीबीएसई ने इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में कई नए और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जहां विज्ञान की परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया गया है, वहीं १०वीं कक्षा के छात्रों को साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं देने का विकल्प दिया गया है। इसके अलावा, १२वीं बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग के तरीके में भी बड़ा बदलाव किया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन सभी नए बदलावों का उद्देश्य छात्रों को अधिक सरलता और सुलभता प्रदान करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो छात्रों को वास्तविक ज्ञान अर्जित करने में मदद करेगा।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीएसई विज्ञान परीक्षा का नया पैटर्न क्या है?
इस वर्ष विज्ञान परीक्षा को तीन भागों - जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, और भौतिकी में विभाजित किया गया है।
क्या छात्रों को परीक्षा में रटने की जरूरत थी?
नहीं, इस परीक्षा में प्रश्नों का गठन ऐसा किया गया था कि छात्रों को ज्ञान और तर्क के आधार पर उत्तर देना था।
सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं कब शुरू हुईं?
सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं १७ फरवरी से भारत और २६ अन्य देशों में शुरू हुई थीं।
इस वर्ष कितने छात्रों ने परीक्षा दी?
इस वर्ष ४.३ मिलियन से अधिक छात्र १०वीं और १२वीं की परीक्षाएं दे रहे हैं।
इस परीक्षा के माध्यम से क्या बदलाव देखे गए हैं?
सीबीएसई ने इस वर्ष परीक्षा के पैटर्न में बदलाव किया है और छात्रों को साल में दो बार परीक्षा देने का विकल्प दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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