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जनगणना 2027: पश्चिम बंगाल में स्व-गणना प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू, 15 अगस्त तक करें ऑनलाइन पंजीकरण

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जनगणना 2027: पश्चिम बंगाल में स्व-गणना प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू, 15 अगस्त तक करें ऑनलाइन पंजीकरण

सारांश

पश्चिम बंगाल में जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू हुई — लेकिन यह शुरुआत राजनीतिक विवाद के साये में है। सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व ममता सरकार पर केंद्र की अनदेखी का आरोप लगाया, जिससे बंगाल अन्य राज्यों से पिछड़ गया। अब डिजिटल पद्धति से 15 अगस्त तक पंजीकरण का मौका।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल में जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया 1 अगस्त से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगी।
फॉर्म जमा करने पर 11 अंकों की सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी जेनरेट होगी, जो बाद में एन्यूमेरेटर को दिखानी होगी।
फॉर्म भरते समय कोई सहायक दस्तावेज़ अपलोड या जमा करना अनिवार्य नहीं।
इस बार जनगणना डिजिटल मोबाइल ऐप के ज़रिए होगी; डेटा सीधे केंद्रीय सर्वर पर जाएगा।
सुवेंदु अधिकारी ने पूर्व ममता बनर्जी सरकार पर केंद्र के संदेशों की अनदेखी का आरोप लगाया, जिससे बंगाल अन्य राज्यों से पीछे रहा।

पश्चिम बंगाल में जनगणना 2027 के लिए स्व-गणना (सेल्फ-एन्यूमरेशन) प्रक्रिया 1 अगस्त से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है और यह 15 अगस्त तक जारी रहेगी। राज्य के नागरिक जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन कर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं — यह देश में पहली बार डिजिटल माध्यम से संचालित होने वाली जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा है।

स्व-गणना प्रक्रिया कैसे काम करती है

नागरिक जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन कर आवश्यक जानकारी भरने के बाद फॉर्म जमा कर सकते हैं। फॉर्म सफलतापूर्वक जमा होने पर वेबसाइट एक 11 अंकों की सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी जेनरेट करेगी। यह आईडी नागरिकों को संभालकर रखनी होगी, क्योंकि बाद में घर आने वाले एन्यूमेरेटर को यही आईडी दिखानी होगी।

गौरतलब है कि फॉर्म भरते समय किसी भी सहायक दस्तावेज़ को अपलोड या जमा करने की आवश्यकता नहीं है। कोलकाता नगर निगम (KMC) की आयुक्त और मुख्य जनगणना अधिकारी स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया कि जब जनगणना कर्मचारी घर-घर जाएंगे, तब भी दस्तावेज़ प्रस्तुत करना अनिवार्य नहीं होगा।

डिजिटल जनगणना की विशेषताएँ

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल पद्धति पर आधारित होगी। जनगणना अधिकारी एक विशेष मोबाइल ऐप के ज़रिए डेटा संग्रह करेंगे और एकत्रित जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड की जाएगी। वेबसाइट के अनुसार, स्व-गणना प्रक्रिया से डेटा में अधिक सटीकता सुनिश्चित होती है, क्योंकि संबंधित व्यक्ति अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करता है।

विलंब पर राजनीतिक विवाद

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने राज्य में जनगणना प्रक्रिया में हुई देरी के लिए पूर्ववर्ती ममता बनर्जी नेतृत्व वाली सरकार के रवैये को ज़िम्मेदार ठहराया है। राज्य सचिवालय 'नबन्ना' में शुक्रवार को हुई आपातकालीन बैठक के बाद सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से कहा, 'पिछली राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के संदेश का जवाब देने की भी जहमत नहीं उठाई। पिछली राज्य सरकार ने संकीर्ण राजनीतिक कारणों से काम शुरू नहीं किया। पिछली सरकार के मुख्य सचिव इस मामले में राजनीतिक सहमति का इंतजार कर रहे थे।'

अधिकारी ने यह भी कहा, 'चूंकि पिछली सरकार ने इस मामले में कुछ नहीं किया, इसलिए पश्चिम बंगाल सरकार इस मामले में दूसरे राज्यों से पीछे रह गई है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब कई अन्य राज्य जनगणना की प्रारंभिक प्रक्रियाएँ पहले ही पूरी कर चुके हैं।

आम नागरिकों पर असर

स्व-गणना प्रक्रिया उन नागरिकों के लिए विशेष रूप से सुविधाजनक है जो अपनी जानकारी सटीक रूप से दर्ज करना चाहते हैं। 15 अगस्त की समय-सीमा के बाद जो नागरिक ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कर पाएंगे, उनका डेटा घर-घर जाने वाले एन्यूमेरेटरों द्वारा एकत्र किया जाएगा। जनगणना के आँकड़े सरकारी योजनाओं, बजट आवंटन और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

आगे की प्रक्रिया

स्व-गणना के बाद जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर डेटा का सत्यापन करेंगे और जिन नागरिकों ने ऑनलाइन फॉर्म नहीं भरा, उनकी जानकारी मोबाइल ऐप के ज़रिए दर्ज करेंगे। राज्य में जनगणना 2027 की पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करने के लिए प्रशासन ने युद्धस्तर पर तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि अब जब प्रक्रिया शुरू हुई है, तो क्या नई सरकार उस डेटा-गुणवत्ता की गारंटी दे सकती है जो एक दशक की नीति-निर्माण का आधार बनेगी। डिजिटल जनगणना की दिशा सही है, लेकिन डिजिटल विभाजन वाले राज्य में स्व-गणना की पहुँच सीमित रह सकती है — और इस अंतर को पाटने की ज़िम्मेदारी किसी भी सरकार की होती है, चाहे वह किसी भी दल की हो।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनगणना 2027 की स्व-गणना प्रक्रिया क्या है?
स्व-गणना वह प्रक्रिया है जिसमें नागरिक जनगणना की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉग इन कर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करते हैं। पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया 1 अगस्त से 15 अगस्त तक चलेगी और फॉर्म जमा होने पर 11 अंकों की सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी मिलेगी।
सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी क्यों ज़रूरी है?
यह 11 अंकों की आईडी इस बात का प्रमाण है कि आपने ऑनलाइन फॉर्म भर दिया है। बाद में जब जनगणना अधिकारी घर पर सत्यापन के लिए आएंगे, तब यही आईडी दिखानी होगी।
क्या स्व-गणना फॉर्म भरते समय दस्तावेज़ जमा करने होंगे?
नहीं। स्व-गणना फॉर्म भरते समय कोई भी सहायक दस्तावेज़ अपलोड या जमा नहीं करना होगा। मुख्य जनगणना अधिकारी स्मिता पांडे ने स्पष्ट किया है कि घर पर आने वाले एन्यूमेरेटर को भी दस्तावेज़ दिखाना अनिवार्य नहीं होगा।
पश्चिम बंगाल में जनगणना प्रक्रिया में देरी क्यों हुई?
सुवेंदु अधिकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने केंद्र सरकार के संदेशों का जवाब नहीं दिया और संकीर्ण राजनीतिक कारणों से काम शुरू नहीं किया, जिससे बंगाल अन्य राज्यों से पीछे रह गया।
जनगणना 2027 में डिजिटल पद्धति कैसे काम करेगी?
जनगणना अधिकारी एक विशेष मोबाइल ऐप के ज़रिए डेटा एकत्र करेंगे और यह जानकारी सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड होगी। यह पारंपरिक कागज़-आधारित जनगणना से पूरी तरह अलग और अधिक सटीक पद्धति है।
राष्ट्र प्रेस
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