भारत-खाड़ी देश डीपवॉटर एनर्जी पाइपलाइन की रिपोर्ट्स झूठी: पेट्रोलियम मंत्रालय का खंडन
सारांश
मुख्य बातें
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने मंगलवार, 16 जून को उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि केंद्र सरकार गुजरात को ओमान और अन्य खाड़ी देशों से जोड़ने वाली एक गहरे समुद्र की एनर्जी पाइपलाइन — 'मिडिल ईस्ट-इंडिया डीपवॉटर पाइपलाइन' (MEIDP) — विकसित करने पर तेज़ी से काम कर रही है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई प्रस्ताव फ़िलहाल विचाराधीन नहीं है और न ही किसी खाड़ी देश के साथ इस विषय पर कोई सक्रिय वार्ता हो रही है।
मंत्रालय का आधिकारिक खंडन
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, 'पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय साफ तौर पर यह स्पष्ट करना चाहता है कि इस समय मंत्रालय के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।' बयान में आगे जोड़ा गया कि इस परियोजना को लेकर ओमान या किसी अन्य खाड़ी देश के साथ मंत्रालय के किसी भी स्तर पर कोई सक्रिय चर्चा या बातचीत नहीं हो रही है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि यह स्पष्टीकरण इस मामले से जुड़ी सभी अटकलों को खत्म करने के लिए जारी किया गया है।
एलएनजी आपूर्ति सामान्य, 'दिशा' जहाज़ रवाना
इसी बीच, भारत मध्य पूर्व से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटा है। माल्टा के झंडे वाला एलएनजी कैरियर 'दिशा' सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरा। यह जहाज़ 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी लेकर गुजरात के दहेज की ओर रवाना है और 18 जून को भारत पहुँचने की उम्मीद है। इस जहाज़ का प्रबंधन शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाला एक समूह कर रहा है।
नाविकों की सुरक्षा और बंदरगाहों की स्थिति
सरकार ने बताया कि वह भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, विदेशों में भारतीय मिशनों, शिपिंग कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ निरंतर संपर्क में है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पूरे भारत में बंदरगाहों का कामकाज सामान्य बना हुआ है।
डीजीएस की नाविकों को तैनाती न करने की सलाह
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ओमान के तट पर एक वाणिज्यिक जहाज़ 'एमटी सेटेबेलो' पर अमेरिकी सेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इस घटना के कुछ ही दिनों बाद, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) ने शिपिंग कंपनियों और समुद्री भर्ती व प्लेसमेंट एजेंसियों को सलाह दी है कि वे अगले आदेश तक मध्य पूर्व के संघर्ष वाले इलाकों में भारतीय नाविकों की तैनाती न करें। गौरतलब है कि यह सलाह क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की समुद्री सुरक्षा नीति की स्पष्ट प्राथमिकता को दर्शाती है।
आने वाले दिनों में सरकार की ऊर्जा आपूर्ति रणनीति और नाविकों की सुरक्षा से जुड़े कदमों पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।