ई20 पेट्रोल पर भूटान के इनकार की रिपोर्ट्स केंद्र ने नकारीं, पेट्रोलियम मंत्रालय बोला — कोई प्रस्ताव ही नहीं था
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 5 जुलाई 2026 को उन मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) की ओर से भूटान को ऐसा कोई प्रस्ताव दिया ही नहीं गया था, इसलिए इनकार का सवाल ही नहीं उठता।
मंत्रालय का स्पष्टीकरण
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर आधिकारिक पोस्ट के ज़रिये कहा, 'ये दावे गलत हैं कि भूटान ने भारत से ई20 पेट्रोल आयात करने का प्रस्ताव ठुकरा दिया।' मंत्रालय ने आगे जोड़ा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया गया है और भूटान को ई20 पेट्रोल निर्यात करने का भी कोई प्रस्ताव नहीं है। जनता से अपील की गई कि सही जानकारी के लिए केवल मंत्रालय और तेल वितरक कंपनियों की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
रिपोर्ट्स में क्या दावा किया गया था
शनिवार को कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि पड़ोसी देश भूटान ने भारतीय OMC से ई20 पेट्रोल — जिसमें 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल का मिश्रण होता है — आयात करने से मना कर दिया है। रिपोर्ट्स में इनकार की वजह भूटान की स्टोरेज संबंधी चुनौतियाँ बताई गई थीं। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यहीन करार दिया।
ई20 पर फैली भ्रामक जानकारी का खंडन
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ई20 पेट्रोल को लेकर सोशल मीडिया पर प्रचारित दावों को भी पूरी तरह भ्रामक और वैज्ञानिक तथ्यों से परे बताया। मंत्रालय के अनुसार, ई20 पेट्रोल के वाहनों के लिए नुकसानदायक होने, प्रदूषण बढ़ाने, इंजन खराब करने या एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी की खपत जैसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि इन दावों का प्रमुख ऑटोमोटिव अनुसंधान संस्थानों द्वारा किए गए व्यापक तकनीकी अध्ययनों से कोई मेल नहीं है।
ई20 के पर्यावरणीय फायदे
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ई20 पेट्रोल के उपयोग से वाहनों से निकलने वाले कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। एथेनॉल में मौजूद कार्बन जैविक स्रोत का होता है, जिससे वातावरण में शुद्ध कार्बन उत्सर्जन नहीं बढ़ता। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत अपने एथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्यों को तेज़ी से पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है।
आगे क्या
मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि ई20 या किसी भी ईंधन नीति से जुड़ी जानकारी के लिए केवल सरकारी और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें। गौरतलब है कि भारत सरकार 2025 तक 20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, और इस बीच गलत सूचनाओं का प्रसार नीति कार्यान्वयन में बाधा बन सकता है।