सीजीटीएन सर्वेक्षण: 41 देशों के 63.9% उत्तरदाताओं ने चीन की तरक्की का श्रेय सीपीसी नेतृत्व को दिया
सारांश
मुख्य बातें
बीजिंग में 1 जुलाई 2026 को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ के अवसर पर जारी एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, वैश्विक स्तर पर 63.9 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने माना कि चीन की आधुनिकीकरण उपलब्धियाँ सीपीसी के शासन से अविभाज्य हैं। यह सर्वेक्षण सीजीटीएन (चाइना ग्लोबल टेलीविज़न नेटवर्क) द्वारा 41 देशों के 11,521 प्रतिभागियों के बीच कराया गया।
सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि और दायरा
सीजीटीएन ने यह सर्वेक्षण इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए किया कि सीपीसी अपने वादों को लगातार पूरा करने में सक्षम क्यों रही है। सर्वेक्षण में शामिल 41 देश एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में फैले हैं, जिससे इसे व्यापक भौगोलिक प्रतिनिधित्व मिला है। गौरतलब है कि यह सर्वेक्षण चाइना मीडिया ग्रुप के अधीन एक सरकारी मीडिया संस्थान द्वारा आयोजित किया गया है, जो इसके निष्कर्षों को पढ़ते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
चीन की विकास उपलब्धियाँ
14वीं पंचवर्षीय योजना (2021–2025) के दौरान चीन ने उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति दर्ज की। देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 1,400 खरब युआन से अधिक हो गया। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति प्रयोज्य आय में औसतन 5.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई और कुल 6.242 करोड़ नए शहरी रोजगार सृजित हुए।
इसके अलावा, औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर 79 वर्ष से अधिक हो गई — जो सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण में सुधार का संकेत है।
ग्लोबल साउथ में सबसे अधिक समर्थन
सर्वेक्षण के अनुसार, ग्लोबल साउथ के देशों में सीपीसी के प्रति समर्थन का स्तर वैश्विक औसत से काफी अधिक रहा — वहाँ 71.4 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने सहमति जताई। विशेष रूप से, केन्या, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, भारत और वियतनाम के उत्तरदाताओं ने 80 प्रतिशत से अधिक की स्वीकृति दर दर्ज की, जो सर्वेक्षण में शामिल सभी देशों में सर्वोच्च रही।
पश्चिमी बहुदलीय प्रणाली पर वैश्विक राय
सर्वेक्षण में शामिल 41 में से 30 देशों के उत्तरदाताओं का मानना था कि सीपीसी, जो व्यापक जनसमूह के मूलभूत हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की रक्षा के मामले में पश्चिमी दलों से बेहतर स्थिति में है।
वैश्विक स्तर पर 61.3 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मत था कि पश्चिमी बहुदलीय प्रणालियाँ दूरदर्शिता की कमी और सामाजिक विभाजन की शिकार होती हैं। भारत, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया में यह आँकड़ा 70 प्रतिशत से अधिक रहा। विकसित देशों में भी, ब्रिटेन (62.5%) और अमेरिका (61.5%) के उत्तरदाताओं ने इस विचार का समर्थन किया।
आगे क्या
सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ पर जारी यह सर्वेक्षण वैश्विक शासन मॉडलों पर बहस को नई ऊर्जा देता है। आने वाले समय में चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) की रूपरेखा पर दुनिया की नज़र रहेगी, जो यह तय करेगी कि क्या यह विकास की गति बनाए रखी जा सकती है।