चावल घोटाला: AAP के सौरभ भारद्वाज ने CBI से मंत्री मनजिंदर सिरसा की भी जांच की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 29 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक को एक पूरक शिकायत सौंपकर दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की कथित भूमिका को चावल घोटाले की जांच के दायरे में शामिल करने की माँग की है। भारद्वाज का आरोप है कि दिल्ली के गरीबों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाला चावल निजी कंपनियों के माध्यम से खुले बाज़ार में बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने मंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित करने की भी अपील की है।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
भारद्वाज के अनुसार, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने चावल की खरीद और आवंटन से संबंधित प्रस्तावों को बार-बार मंजूरी दी, लेकिन CBI की प्राथमिकी में उनका नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है, जबकि उन्हें कथित तौर पर निर्देश देने वाले वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका की जांच अभी तक नहीं हुई।
AAP नेता ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निलंबित अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा के लिखित जवाब का हवाला दिया। उनके अनुसार, अधिकारी ने अपने जवाब में सात अलग-अलग स्थानों पर मंत्री सिरसा का नाम लिया है और यह भी कहा है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेजे गए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), प्रसंस्करण संबंधी निर्देश और अन्य प्रशासनिक मंजूरियाँ मंत्री के साथ चर्चा तथा उनके निर्देशों के बाद दी गई थीं।
31,000 मीट्रिक टन चावल का विवादित आवंटन
भारद्वाज ने आरोप लगाया कि नेरामेक ने 7 जनवरी 2026 को 31,000 मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया था। मंत्री ने 8 अप्रैल 2026 को संबंधित प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने के निर्देश दिए। इसके बाद 4 मई 2026 को उसी मात्रा के लिए दोबारा अनुरोध किया गया — पहले आवंटन के स्टॉक रिकॉर्ड और उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध हुए बिना।
उन्होंने बताया कि 31,000 मीट्रिक टन चावल लगभग 3.1 करोड़ किलोग्राम के बराबर है। भारद्वाज के अनुसार, सब्सिडी वाला चावल ₹23.20 प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाना था, जबकि इसे कथित तौर पर ₹46 प्रति किलोग्राम की दर से हरियाणा की व्यावसायिक इकाइयों को बेचा गया। इस कथित लेनदेन में मैसर्स उत्पालक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कमर्शियल और मैसर्स सुपर ग्रेन्स जैसी निजी कंपनियों का उल्लेख किया गया है।
सरकारी खजाने को अनुमानित नुकसान
भारद्वाज ने दावा किया कि इस कथित लेनदेन से सरकार को प्रति सप्ताह लगभग ₹13.67 करोड़ के सब्सिडी मूल्य अंतर का नुकसान हुआ। उनके अनुसार, यह गतिविधि करीब 22 सप्ताह तक चली और सार्वजनिक वितरण के उद्देश्य से उपलब्ध कराए जाने वाले अनाज को कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। AAP नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि चावल वास्तव में गरीबों में वितरित करने के लिए था, तो इसे लेकर कोई सार्वजनिक सूचना या प्रेस विज्ञप्ति क्यों नहीं जारी की गई।
CBI से तीन प्रमुख माँगें
CBI निदेशक को भेजी गई पूरक शिकायत में सौरभ भारद्वाज ने तीन माँगें रखी हैं। पहली, मंत्री सिरसा की कथित भूमिका, प्रशासनिक मंजूरियों और वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए मौजूदा मामले का दायरा बढ़ाया जाए। दूसरी, जनवरी से जून 2026 के बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के कार्यालय से संबंधित फाइलों की आवाजाही, ईमेल, कर्मचारियों के रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को सुरक्षित किया जाए। तीसरी, निलंबित अधिकारी के लिखित जवाब में जिन व्यक्तियों का उल्लेख है, उनके बयान दर्ज किए जाएँ।
भारद्वाज ने यह भी कहा कि मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा उनके खिलाफ कथित मानहानि के प्रयासों के बाद मंत्री सिरसा भी मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं, लेकिन ऐसे कदम उन्हें सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने से नहीं रोक सकते। गौरतलब है कि यह शिकायत ऐसे समय में आई है जब CBI पहले से ही इस मामले में विभागीय अधिकारियों की जांच कर रही है।
आगे क्या होगा
CBI की ओर से अभी तक इस पूरक शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इन आरोपों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। यह मामला दिल्ली की राजनीति में नई जटिलताएँ पैदा कर सकता है, क्योंकि AAP विपक्ष की भूमिका में रहते हुए भाजपा नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।