29 अक्टूबर 2026
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चावल घोटाला: AAP के सौरभ भारद्वाज ने CBI से मंत्री मनजिंदर सिरसा की भी जांच की मांग की

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चावल घोटाला: AAP के सौरभ भारद्वाज ने CBI से मंत्री मनजिंदर सिरसा की भी जांच की मांग की

सारांश

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने CBI को पूरक शिकायत सौंपकर चावल घोटाले में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका जांचने की माँग की। आरोप है कि सब्सिडी वाला चावल ₹23.20 के बजाय ₹46 प्रति किलोग्राम की दर से निजी कंपनियों को बेचा गया और 22 हफ्तों में सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।

मुख्य बातें

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 29 अक्टूबर 2026 को CBI निदेशक को पूरक शिकायत सौंपी।
माँग की गई कि खाद्य मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को चावल घोटाले की जांच के दायरे में शामिल किया जाए।
निलंबित अधिकारी अरुण कुमार झा के लिखित जवाब में कथित तौर पर 7 अलग-अलग स्थानों पर मंत्री का नाम है।
सब्सिडी वाला चावल ₹23.20 प्रति किलो की दर के बजाय ₹46 प्रति किलो पर कथित तौर पर बेचा गया।
कथित नुकसान प्रति सप्ताह ₹13.67 करोड़ ; गतिविधि करीब 22 सप्ताह तक चली।
CBI से जनवरी-जून 2026 की फाइलें, ईमेल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित करने की अपील।

आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने 29 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के निदेशक को एक पूरक शिकायत सौंपकर दिल्ली के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की कथित भूमिका को चावल घोटाले की जांच के दायरे में शामिल करने की माँग की है। भारद्वाज का आरोप है कि दिल्ली के गरीबों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाला चावल निजी कंपनियों के माध्यम से खुले बाज़ार में बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने मंत्री से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित करने की भी अपील की है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

भारद्वाज के अनुसार, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने चावल की खरीद और आवंटन से संबंधित प्रस्तावों को बार-बार मंजूरी दी, लेकिन CBI की प्राथमिकी में उनका नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों पर कार्रवाई हो रही है, जबकि उन्हें कथित तौर पर निर्देश देने वाले वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका की जांच अभी तक नहीं हुई।

AAP नेता ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के निलंबित अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा के लिखित जवाब का हवाला दिया। उनके अनुसार, अधिकारी ने अपने जवाब में सात अलग-अलग स्थानों पर मंत्री सिरसा का नाम लिया है और यह भी कहा है कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) को भेजे गए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC), प्रसंस्करण संबंधी निर्देश और अन्य प्रशासनिक मंजूरियाँ मंत्री के साथ चर्चा तथा उनके निर्देशों के बाद दी गई थीं।

31,000 मीट्रिक टन चावल का विवादित आवंटन

भारद्वाज ने आरोप लगाया कि नेरामेक ने 7 जनवरी 2026 को 31,000 मीट्रिक टन चावल की आपूर्ति के लिए अनुरोध किया था। मंत्री ने 8 अप्रैल 2026 को संबंधित प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करने के निर्देश दिए। इसके बाद 4 मई 2026 को उसी मात्रा के लिए दोबारा अनुरोध किया गया — पहले आवंटन के स्टॉक रिकॉर्ड और उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध हुए बिना।

उन्होंने बताया कि 31,000 मीट्रिक टन चावल लगभग 3.1 करोड़ किलोग्राम के बराबर है। भारद्वाज के अनुसार, सब्सिडी वाला चावल ₹23.20 प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाना था, जबकि इसे कथित तौर पर ₹46 प्रति किलोग्राम की दर से हरियाणा की व्यावसायिक इकाइयों को बेचा गया। इस कथित लेनदेन में मैसर्स उत्पालक्षी एग्रो प्रोडक्ट्स, मैसर्स दिबेश कमर्शियल और मैसर्स सुपर ग्रेन्स जैसी निजी कंपनियों का उल्लेख किया गया है।

सरकारी खजाने को अनुमानित नुकसान

भारद्वाज ने दावा किया कि इस कथित लेनदेन से सरकार को प्रति सप्ताह लगभग ₹13.67 करोड़ के सब्सिडी मूल्य अंतर का नुकसान हुआ। उनके अनुसार, यह गतिविधि करीब 22 सप्ताह तक चली और सार्वजनिक वितरण के उद्देश्य से उपलब्ध कराए जाने वाले अनाज को कथित तौर पर निजी लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। AAP नेता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि चावल वास्तव में गरीबों में वितरित करने के लिए था, तो इसे लेकर कोई सार्वजनिक सूचना या प्रेस विज्ञप्ति क्यों नहीं जारी की गई।

CBI से तीन प्रमुख माँगें

CBI निदेशक को भेजी गई पूरक शिकायत में सौरभ भारद्वाज ने तीन माँगें रखी हैं। पहली, मंत्री सिरसा की कथित भूमिका, प्रशासनिक मंजूरियों और वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए मौजूदा मामले का दायरा बढ़ाया जाए। दूसरी, जनवरी से जून 2026 के बीच खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के कार्यालय से संबंधित फाइलों की आवाजाही, ईमेल, कर्मचारियों के रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को सुरक्षित किया जाए। तीसरी, निलंबित अधिकारी के लिखित जवाब में जिन व्यक्तियों का उल्लेख है, उनके बयान दर्ज किए जाएँ।

भारद्वाज ने यह भी कहा कि मंत्री प्रवेश वर्मा द्वारा उनके खिलाफ कथित मानहानि के प्रयासों के बाद मंत्री सिरसा भी मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं, लेकिन ऐसे कदम उन्हें सरकारी जवाबदेही और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाने से नहीं रोक सकते। गौरतलब है कि यह शिकायत ऐसे समय में आई है जब CBI पहले से ही इस मामले में विभागीय अधिकारियों की जांच कर रही है।

आगे क्या होगा

CBI की ओर से अभी तक इस पूरक शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी इन आरोपों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है। यह मामला दिल्ली की राजनीति में नई जटिलताएँ पैदा कर सकता है, क्योंकि AAP विपक्ष की भूमिका में रहते हुए भाजपा नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार पर लगातार दबाव बना रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो केंद्र सरकार के अधीन है, इस पूरक शिकायत पर कार्रवाई करती है या नहीं — क्योंकि किसी बैठे मंत्री को जांच के दायरे में लाना राजनीतिक रूप से संवेदनशील है। निलंबित अधिकारी के लिखित जवाब में मंत्री का नाम सात बार आना, यदि सत्यापित हो, तो जांच की दिशा पर दबाव बढ़ा सकता है — लेकिन इस दस्तावेज़ की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मुख्यधारा की कवरेज इस विवाद को महज आरोप-प्रत्यारोप के रूप में देख रही है, जबकि असली सवाल यह है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी का तंत्र कहाँ चूका।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली चावल घोटाला क्या है?
आरोप है कि दिल्ली के गरीबों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाला चावल निजी कंपनियों के जरिए खुले बाज़ार में बेचा गया। कथित तौर पर ₹23.20 प्रति किलोग्राम पर उपलब्ध कराया जाने वाला चावल ₹46 प्रति किलोग्राम की दर से हरियाणा की व्यावसायिक इकाइयों को बेचा गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
सौरभ भारद्वाज ने CBI से क्या माँगा है?
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने CBI निदेशक को पूरक शिकायत सौंपकर तीन माँगें रखी हैं — मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका को जांच के दायरे में लाना, जनवरी-जून 2026 के बीच के दस्तावेज़ व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित करना, और निलंबित अधिकारी के जवाब में उल्लिखित व्यक्तियों के बयान दर्ज करना।
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा पर क्या आरोप हैं?
भारद्वाज के अनुसार, मंत्री सिरसा ने चावल आवंटन से जुड़े प्रस्तावों को बार-बार मंजूरी दी। निलंबित अधिकारी अरुण कुमार झा के लिखित जवाब में कथित तौर पर सात स्थानों पर मंत्री का नाम है, जिसमें FCI को भेजे गए NOC और प्रशासनिक मंजूरियों को मंत्री के निर्देशों से जोड़ा गया है। ये आरोप भारद्वाज की शिकायत पर आधारित हैं और अभी जांच का विषय हैं।
इस कथित घोटाले से सरकार को कितना नुकसान हुआ?
AAP नेता के दावे के अनुसार, सब्सिडी दर और बाज़ार दर के अंतर से प्रति सप्ताह लगभग ₹13.67 करोड़ का नुकसान हुआ। यह गतिविधि करीब 22 सप्ताह तक चली। कुल 31,000 मीट्रिक टन, यानी करीब 3.1 करोड़ किलोग्राम चावल के आवंटन का मामला है।
CBI ने अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
CBI ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय अधिकारियों की जांच शुरू की है और खाद्य विभाग के अतिरिक्त आयुक्त अरुण कुमार झा को निलंबित किया जा चुका है। हालाँकि भारद्वाज की पूरक शिकायत पर अभी तक CBI की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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