चंपत राय पर आरोप बेबुनियाद, जर्जर पैतृक घर है ईमानदारी का सबूत: परिजन व स्थानीय लोग
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी के लगाए जा रहे आरोपों को उनके परिजनों और बिजनौर के स्थानीय निवासियों ने 29 जून को पूरी तरह निराधार बताया। परिवार का कहना है कि चंपत राय का जीवन दशकों से सादगी, पारदर्शिता और समाज सेवा को समर्पित रहा है, और उन्हें जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
परिवार का पक्ष: जर्जर घर बोलता है सच
चंपत राय के छोटे भाई सुनील कुमार बंसल ने कहा कि उनके भाई के विरुद्ध लगाए जा रहे सभी आरोप झूठे और निराधार हैं। उन्होंने परिवार के करीब 150 साल पुराने जर्जर पैतृक मकान की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि चंपत राय के पास अवैध संपत्ति होती, तो परिवार की यह स्थिति कदापि न होती।
बंसल ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'अगर देश में कहीं भी चंपत राय के नाम कोई अवैध जमीन या संपत्ति निकल आए तो सरकार उसे तुरंत अपने कब्जे में ले ले।' उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल साजिश के तहत चंपत राय, राम मंदिर और उत्तर प्रदेश सरकार की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं।
चंपत राय का जीवन परिचय: आपातकाल से राम मंदिर तक
सुनील कुमार बंसल ने बताया कि वर्ष 1977 में आपातकाल के दौरान चंपत राय करीब 18 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद वर्ष 1980 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े इंटर कॉलेज में प्रवक्ता की नौकरी छोड़ दी और अपना संपूर्ण जीवन समाज सेवा, राम मंदिर आंदोलन, RSS और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को समर्पित कर दिया।
उन्होंने बताया कि चंपत राय ने आजीवन अविवाहित रहकर समाज और राष्ट्र के लिए काम किया है। गौरतलब है कि चंपत राय लंबे समय तक VHP के वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राम मंदिर आंदोलन की जिम्मेदारी संभालते रहे।
दानपात्र विवाद पर स्थानीय निवासियों की राय
स्थानीय निवासी मनोज अरोड़ा ने कहा कि एसआईटी जांच जारी है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, चंपत राय जैसे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
एक अन्य स्थानीय निवासी नौबार ने कहा कि अभी तक सीधे तौर पर चंपत राय पर नहीं, बल्कि उनके कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं। उनके अनुसार, इलाके के अधिकांश लोग आज भी चंपत राय को ईमानदार और निर्दोष मानते हैं। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों के गबन जैसे आरोप सही होते तो उसका असर उनकी जीवनशैली में स्पष्ट दिखाई देता, लेकिन ऐसा कुछ भी नज़र नहीं आता।
राजनीतिक साजिश का आरोप
शीतल कुमार अग्रवाल ने कहा कि चंपत राय पर लगाए जा रहे सभी आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं। उनके अनुसार, चुनावी माहौल को देखते हुए कुछ राजनीतिक दल इस विवाद के जरिए राम मंदिर से जुड़े लोगों की छवि धूमिल करना चाहते हैं।
नवीन कुमार ने कहा कि पूरे मामले में कोषाध्यक्ष का नाम सामने नहीं लाया जा रहा, जबकि केवल चंपत राय का नाम उछाला जा रहा है — यह असंतुलन अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
आगे क्या होगा
दानपात्र मामले में एसआईटी की जांच जारी है। सुनील कुमार बंसल ने कहा कि यदि किसी ने गड़बड़ी की है, तो उसने चंपत राय के विश्वास का गलत फायदा उठाया है और ऐसे लोगों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए। जांच के नतीजे ही इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।