चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट: महंत राजू दास बोले — 'कालनेमियों के मुंह पर तमाचा'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या की हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को वित्तीय अनियमितता मामले में मिली क्लीन चिट का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने इसे उन लोगों के मुंह पर 'करारा तमाचा' बताया जो, उनके अनुसार, राम मंदिर के नाम पर सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश में लगे थे। महंत राजू दास ने यह प्रतिक्रिया 19 अगस्त 2026 को दी।
महंत राजू दास की प्रतिक्रिया
महंत राजू दास ने कहा, 'उन घड़ियाली आंसू बहाने वाले कालनेमियों को मुंह पर करारा तमाचा लगा है, जो राम मंदिर के नाम पर आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।' उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक और ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों की वित्तीय गड़बड़ी को आधार बनाकर सनातनियों को बदनाम करने की सुनियोजित कोशिश की गई। उनके अनुसार, चंपत राय ने राम मंदिर निर्माण के लिए निरंतर अथक परिश्रम किया और उन्हें क्लीन चिट मिलना न्यायसंगत था।
ज्ञानवापी में जलाभिषेक की मांग
इसी अवसर पर महंत राजू दास ने नागपंचमी के उपलक्ष्य में ज्ञानवापी परिसर में सोमवार को भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक की अनुमति देने की मांग भी उठाई। उन्होंने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार से अनुरोध करते हुए कहा, 'जब ज्ञानवापी में पाँच वक्त नमाज पढ़ी जा सकती है, तो साधुजन को कम से कम एक दिन — सोमवार को — भोले बाबा का जलाभिषेक करने की अनुमति मिलनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि जो शिवलिंग वहाँ मिला है, उसका जलाभिषेक होना धार्मिक आस्था का मूलभूत अधिकार है।
उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष
उत्तर प्रदेश के मंत्री ओपी राजभर ने स्पष्ट किया कि क्लीन चिट केवल अनिल मिश्रा और चंपत राय को दी गई है। उन्होंने बताया, 'जिन छह अन्य लोगों के नाम इस मामले में हैं, उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। वे लोग जेल में हैं और पूछताछ में उन्होंने अपनी संलिप्तता स्वीकार भी कर ली है।'
कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने इस क्लीन चिट पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया, 'सरकार ने पूरी तरह से उन्हें बचाने का काम किया है, और ये सभी लोग चढ़ावे की चोरी में शामिल हैं।' आलोचकों का कहना है कि बिना पारदर्शी जाँच के दी गई क्लीन चिट जनता के विश्वास को कमज़ोर करती है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर से जुड़े वित्तीय प्रबंधन को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों हलकों में बहस तेज है। छह आरोपियों के विरुद्ध चल रही न्यायिक प्रक्रिया और ज्ञानवापी में जलाभिषेक की मांग — दोनों मुद्दे आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकते हैं।