चक्रवात 'मुरासु': CM चंद्रबाबू नायडू ने गुंटूर-बापटला के बाढ़ग्रस्त खेतों का पैदल दौरा किया, किसानों को राहत का वादा
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 6 नवंबर 2026 को चक्रवात 'मुरासु' से तबाह हुए गुंटूर और बापटला जिलों का जमीनी दौरा किया और प्रत्येक प्रभावित किसान तथा परिवार को सरकारी सहायता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने जलमग्न धान के खेतों और टूटी फसलों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करते हुए किसानों से सीधे संवाद किया।
मुख्य घटनाक्रम
बापटला जिले के दौरे में मुख्यमंत्री नायडू ने जिलेल्लमुडी से रेटुरु गाँव तक पैदल यात्रा की — सिंचाई नहरों और खेतों की नालियों के तटबंधों पर चलते हुए। रास्ते में उन्होंने किसानों, स्थानीय अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों से बारी-बारी रुककर बात की और चक्रवात से हुए नुकसान का विस्तृत ब्यौरा लिया।
जिलेलमुडी पुल पर मुख्यमंत्री ने बाढ़ के पानी की तीव्रता का जायज़ा लिया। किसानों और अधिकारियों ने बताया कि नदी में आए उफान के कारण आसपास के बड़े इलाके जलमग्न हो गए हैं।
किसानों की पीड़ा
रेटुरु गाँव में किसानों ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने पट्टिसीमा परियोजना से मिले सिंचाई जल के बाद अपनी फसलें बोई थीं और कटाई की उम्मीद बंधी ही थी कि चक्रवात आ गया। मुख्यमंत्री नायडू ने स्वीकार किया कि अल नीनो के प्रतिकूल प्रभावों से पहले से जूझ रहे किसानों के लिए यह दोहरी मार है।
चक्रवात का सबसे गंभीर असर गुंटूर, बापटला और प्रकाशम जिलों पर पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सक्रिय कदमों से संभावित नुकसान को कुछ हद तक कम करने में ज़रूर मदद मिली, परंतु क्षति का दायरा व्यापक है।
सरकार की राहत योजना
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि चक्रवात से हुए नुकसान का व्यापक आकलन जारी है और फसल बीमा तथा इनपुट सब्सिडी के ज़रिये किसानों को उनके निवेश के नुकसान की आंशिक भरपाई की जाएगी। अधिकारियों को फसल बीमा के बारे में किसानों में जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बुनियादी ढाँचे के मोर्चे पर मुख्यमंत्री ने बताया कि एक चक्रवात में गिरे 30,000 बिजली के खंभे बहाल कर दिए गए हैं, जबकि दूसरे चक्रवात में 10,000 खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं जिनकी मरम्मत जारी है। मत्स्यपालन तालाबों में बिजली आपूर्ति बहाल करने को प्राथमिकता दी जा रही है।
केंद्र से समन्वय और पड़ोसी राज्यों की मदद
नायडू ने बताया कि चक्रवात के प्रभाव से केंद्र सरकार को अवगत करा दिया गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्थिति की जानकारी ली है। राहत कार्यों में सहायता के लिए तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों से मदद माँगी जा रही है।
दीर्घकालिक समाधान के रूप में उन्होंने संकेत दिया कि पोलावरम परियोजना के पूरा होने पर शुरुआती मौसम की खेती के अवसर बढ़ेंगे, जिससे किसान चक्रवात के मौसम से पहले फसल की जल्दी बुवाई कर सकेंगे और जोखिम कम होगा।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने जनता से चक्रवात की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और सतर्क रहने का आग्रह किया। सरकार ने वादा किया है कि नुकसान के आकलन के बाद हर प्रभावित परिवार तक राहत पहुँचाई जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जमीनी निगरानी से राहत वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित होती है, बशर्ते कि आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।