चक्रवात 'मुरासु': गृह मंत्री अमित शाह ने CM नायडू से की बात, NDRF-SDRF टीमें आंध्र प्रदेश में तैनात
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 नवंबर 2026 को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बातचीत की और भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' से उत्पन्न स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। शाह ने नायडू को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार हरसंभव मदद देने के लिए पूरी तरह तैयार है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही राहत कार्य में जुटी हैं।
गृह मंत्री शाह का बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू से चक्रवात 'मुरासु' के असर के बारे में बात की। उन्हें केंद्र से हर मुमकिन मदद का भरोसा दिलाया। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पहले से ही जमीन पर हैं, और प्रभावित लोगों की मदद कर रही हैं। भारत सरकार पक्के इरादे के साथ लोगों के साथ खड़ी है।'
एक अन्य पोस्ट में शाह ने कहा, 'मैंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू से फोन पर बात की और चक्रवात 'मुरासु' के असर के बारे में डिटेल में जाना। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार हर तरह की मदद और सपोर्ट देगी। भारत सरकार किसी भी तरह की स्थिति का सामना करने के पक्के इरादे के साथ आंध्र प्रदेश के लोगों के साथ खड़ी है।'
तूफान की स्थिति और मौसम विभाग का अपडेट
भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा मंगलवार सुबह 8 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार, भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' पिछले 6 घंटों में 8 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा और नेल्लोर तथा नरसपुर के बीच, ओंगोल के पास दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार किया। लैंडफॉल के दौरान हवा की गति 100-110 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई, जो झोंकों के साथ 120 किमी प्रति घंटा तक पहुँच रही थी।
IMD के अनुसार, मंगलवार सुबह 5:30 बजे IST तूफान बापटला से लगभग 40 किमी दक्षिण-पश्चिम, कावली से 80 किमी उत्तर-उत्तर-पूर्व, मछलीपट्टनम से 120 किमी पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम और नेल्लोर से 130 किमी उत्तर में स्थित था।
तूफान के कमज़ोर पड़ने का अनुमान
IMD ने बताया कि 'मुरासु' उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ेगा और दोपहर तक यह एक सामान्य 'चक्रवाती तूफान' में बदल सकता है, जिसमें हवा की गति 80-90 किमी प्रति घंटा और झोंकों के साथ 100 किमी प्रति घंटा रहने का अनुमान है। इसके बाद मंगलवार मध्यरात्रि तक यह और कमज़ोर होकर 'डीप डिप्रेशन' में तब्दील हो सकता है।
राहत एवं बचाव अभियान
यह ऐसे समय में आया है जब आंध्र प्रदेश के तटीय जिले पहले से ही भारी वर्षा की चपेट में हैं। NDRF और SDRF की टीमें ओंगोल, बापटला और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में लगी हैं। गौरतलब है कि तटीय आंध्र प्रदेश हर साल मानसून और उत्तर-पूर्व मानसून के मौसम में चक्रवाती तूफानों के प्रति संवेदनशील रहा है, और इस बार भी प्रशासन को त्वरित कार्रवाई करनी पड़ी है।
केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की यह तस्वीर आने वाले घंटों में बदलती परिस्थितियों पर निर्भर करेगी, क्योंकि तूफान के कमज़ोर पड़ने के बावजूद भारी बारिश और बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है।