चंद्रबाबू नायडू ने चक्रवात 'मुरासु' प्रभावित गुंटूर, बापटला, प्रकाशम का किया हवाई सर्वेक्षण
सारांश
मुख्य बातें
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 4 नवंबर 2026 को चक्रवात 'मुरासु' से तबाह गुंटूर, बापटला और प्रकाशम जिलों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत कार्यों की स्थिति का जायज़ा लिया। यह सर्वेक्षण ऐसे समय में हुआ जब राज्य एक साथ दो प्राकृतिक आपदाओं — तटीय क्षेत्रों में चक्रवाती प्रकोप और रायलसीमा में गहरे सूखे — की दोहरी मार झेल रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री नायडू ने अधिकारियों को करमचेडु, कोथापटनम, चिराला, चिलकलुरिपेट और पारचुर में जमा जलभराव को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए। बाद में आरटीजीएस में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने जिला कलेक्टरों को सड़क यातायात बाधित न होने देने की सख्त हिदायत दी।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि एलुरु जिले के आदिवासी इलाकों में भारी वर्षा अब भी जारी है और कुछ क्षेत्रों में छोटे सिंचाई टैंक ओवरफ्लो हो रहे हैं। एलुरु के जिला कलेक्टर ने स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया।
रायलसीमा में सूखे की संकटपूर्ण स्थिति
नायडू ने स्पष्ट किया कि जहाँ तटीय आंध्र प्रदेश चक्रवाती चुनौतियों से जूझ रहा है, वहीं रायलसीमा और अनेक अन्य क्षेत्र कम वर्षा तथा 'अल नीनो' के प्रभाव के कारण भीषण सूखे की चपेट में हैं। उन्होंने केंद्रीय टीम का ध्यान अनंतपुर जिले की ओर दिलाया, जहाँ देशभर में दूसरी सबसे कम बारिश दर्ज की गई है।
राज्य सरकार ने 21 जिलों के 388 मंडलों को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया है। किसानों को हुए नुकसान का आकलन करते हुए केंद्रीय सहायता की मांग वाली रिपोर्ट पहले ही केंद्र को सौंपी जा चुकी है।
अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम से मुलाकात
सूखे की स्थिति का आकलन करने आई अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम (आईएमसीटी) ने बुधवार को मुख्यमंत्री नायडू से मुलाकात की। यह टीम 2 और 3 नवंबर को दो समूहों में कुरनूल, नंद्याल, अनंतपुर और श्री सत्य साईं जिलों का दौरा कर चुकी थी। टीम के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को सूखे के आकलन के अपने निष्कर्षों से विस्तार से अवगत कराया।
नायडू ने बताया कि इस आकलन से वर्षा की कमी, फसलों के नुकसान, किसानों की कठिनाइयों और राज्य द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों की स्पष्ट तस्वीर सामने आई है। उन्होंने कहा कि इस साल राज्य में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है, जिससे खरीफ फसलों को भारी क्षति पहुँची है।
केंद्र से विशेष माँगें
मुख्यमंत्री नायडू ने केंद्रीय टीम से अनुरोध किया कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत काम के दिनों की न्यूनतम संख्या बढ़ाकर 200 दिन की जाए और इसका उपयोग कृषि कार्यों के लिए करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इस कदम से कृषि मजदूरों की कमी दूर होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त अवसर भी सृजित होंगे।
इसके साथ ही नायडू ने बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि इसके लिए जमीनी स्तर पर पर्याप्त मानव संसाधन जुटाना एक बड़ी चुनौती है।
आगे की राह
नायडू ने घोषणा की कि राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर केंद्र को सूखे की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश एक साथ चक्रवात राहत और सूखा सहायता — दोनों मोर्चों पर केंद्रीय सहयोग की प्रतीक्षा में है, जो राज्य की राजकोषीय और प्रशासनिक क्षमता पर असाधारण दबाव डाल रहा है।