चंद्रशेखर आज़ाद के खिलाफ मुकदमे की याचिका: राऊज़ एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई 16 नवंबर तक टली
सारांश
मुख्य बातें
आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका पर राऊज़ एवेन्यू कोर्ट, नई दिल्ली में 2 नवंबर 2026 को निर्धारित सुनवाई टल गई। अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 16 नवंबर 2026 तय की है। शिकायतकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने सांसद पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, मानसिक व भावनात्मक शोषण और धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले का पृष्ठभूमि
दलित अधिकार कार्यकर्ता और पीएचडी शोधार्थी डॉ. रोहिणी घावरी के अनुसार, स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2021 के आसपास उनकी चंद्रशेखर आज़ाद से पहचान हुई थी। उनका आरोप है कि दोनों करीब तीन वर्षों तक संबंध में रहे, जिसके दौरान उन्हें विवाह का आश्वासन दिया गया था। शिकायत में कहा गया है कि सांसद बनने के बाद चंद्रशेखर ने उनसे दूरी बना ली।
डॉ. घावरी ने अपनी शिकायत जुलाई 2025 में दर्ज कराई थी और तब से यह मामला अदालती प्रक्रिया में है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और धोखाधड़ी के आरोपों को लेकर जवाबदेही की मांग तेज़ हुई है।
पुलिस जांच की स्थिति
23 अक्टूबर 2026 की पिछली सुनवाई में अदालत ने दिल्ली पुलिस को 2 नवंबर तक जांच पूरी करने का निर्देश दिया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायत पर जांच अभी जारी है और मामले से जुड़ी कुछ अहम जानकारियाँ — विशेष रूप से बैंक से संबंधित विवरण — अब तक प्राप्त नहीं हो सके हैं। पुलिस के अनुसार, इन्हीं कारणों से जांच प्रक्रिया में विलंब हो रहा है।
शिकायतकर्ता पक्ष की आपत्ति
शिकायतकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी की ओर से पेश वकील ने पुलिस की जांच की गति पर कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि शिकायत जुलाई 2025 में दर्ज हुई थी, लेकिन इतने महीनों बाद भी पुलिस केवल प्रारंभिक जानकारियाँ जुटाने तक सीमित है।
वकील ने यह भी कहा कि आरोपी एक मौजूदा सांसद हैं और जांच में लगातार देरी से निष्पक्ष कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने जैसे गंभीर आरोपों में विस्तृत प्रारंभिक जांच की आड़ में एफआईआर को टालना उचित नहीं है — ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी।
आरोप और कानूनी पहलू
शिकायत में लगाए गए आरोप — विवाह का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना, मानसिक व भावनात्मक शोषण और धोखाधड़ी — गंभीर आपराधिक श्रेणी में आते हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में, जहाँ आरोप स्पष्ट और संरचित हों, अदालतें पुलिस पर प्रारंभिक जांच को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने पर सवाल उठा सकती हैं।
गौरतलब है कि यह मामला अदालती निगरानी में है, जो दर्शाता है कि शिकायतकर्ता पक्ष ने थाना स्तर पर राहत न मिलने पर सीधे न्यायिक हस्तक्षेप की माँग की।
आगे क्या होगा
अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को राऊज़ एवेन्यू कोर्ट में होगी। अदालत उस दिन दिल्ली पुलिस से जांच की अद्यतन स्थिति मांग सकती है। यदि पुलिस तब भी बैंक विवरण और अन्य दस्तावेज़ी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाई, तो शिकायतकर्ता पक्ष सीधे एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की माँग कर सकता है।