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चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर याचिका: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2 नवंबर तक दिया समय

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चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर याचिका: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2 नवंबर तक दिया समय

सारांश

नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ शादी के झांसे पर यौन शोषण की एफआईआर याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2 नवंबर तक जांच पूरी करने का समय दिया। जुलाई 2025 से दर्ज शिकायत पर बैंक विवरण न मिलने का हवाला देकर पुलिस ने मोहलत मांगी।

मुख्य बातें

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर याचिका पर जांच के लिए 2 नवंबर 2026 तक का समय दिया।
रोहिणी घावरी ने जुलाई 2025 में दर्ज कराई थी; आरोप है कि स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2021 में परिचय हुआ।
आरोप: शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना, मानसिक-भावनात्मक शोषण और धोखाधड़ी।
दिल्ली पुलिस ने कहा — बैंक संबंधी विवरण अब तक उपलब्ध नहीं, जांच अधूरी है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने जांच में देरी पर आपत्ति जताई और तत्काल एफआईआर की मांग दोहराई।
अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 को, तब पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को जांच पूरी करने के लिए 2 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी 2 नवंबर ही तय की है।

मामले की पृष्ठभूमि

दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने सांसद चंद्रशेखर आजाद पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, मानसिक एवं भावनात्मक शोषण करने तथा धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए हैं। डॉ. घावरी के अनुसार, स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2021 के आसपास उनकी चंद्रशेखर आजाद से पहचान हुई थी।

शिकायत में आरोप है कि दोनों करीब तीन वर्षों तक संबंध में रहे, किंतु सांसद बनने के पश्चात आजाद ने उनसे दूरी बना ली। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें विवाह का आश्वासन दिया गया था, जिसके आधार पर संबंध बने — इसी को आधार बनाकर उन्होंने जुलाई 2025 में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की स्थिति

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायत पर जांच जारी है और मामले से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं। पुलिस के अनुसार, बैंक से जुड़ी आवश्यक विवरण अब तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिससे जांच प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हो सकी।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की हो — पिछली सुनवाई में भी ऐसा ही हुआ था। इस पैटर्न पर शिकायतकर्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है।

शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलें

डॉ. रोहिणी घावरी की ओर से पेश वकील ने अदालत में पुलिस की जांच की गति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायत जुलाई 2025 में दर्ज कराई गई थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पुलिस केवल प्रारंभिक जानकारियां जुटाने में लगी हुई है।

वकील ने यह भी कहा कि आरोपी एक मौजूदा सांसद हैं और जांच में लगातार देरी निष्पक्ष कार्रवाई को प्रभावित कर सकती है। उनका तर्क था कि शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने जैसे गंभीर आपराधिक आरोपों में विस्तृत प्रारंभिक जांच के बजाय तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी।

अदालत का रुख

राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पुलिस को जांच आगे बढ़ाने और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 तय कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका पर यह दबाव बढ़ रहा है कि सांसदों या प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ शिकायतों में जांच में देरी न हो।

आगे क्या होगा

2 नवंबर 2026 की अगली सुनवाई में दिल्ली पुलिस को अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी। सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए या नहीं। यह मामला दलित राजनीति, सांसदीय जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की गति — तीनों के संदर्भ में व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस की क्षमता पर नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति पर सवाल उठाता है। शिकायतकर्ता का दलित समुदाय से संबंध और आरोपी की प्रमुख दलित राजनेता के रूप में पहचान — यह द्वंद्व मामले को केवल आपराधिक नहीं, राजनीतिक भी बनाता है। अदालत का बार-बार समय देना एक प्रक्रियात्मक जरूरत हो सकती है, लेकिन पीड़ित पक्ष के लिए यह न्याय में देरी जैसा ही है।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर याचिका का मामला क्या है?
दलित अधिकार कार्यकर्ता डॉ. रोहिणी घावरी ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, मानसिक-भावनात्मक शोषण और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने जुलाई 2025 में शिकायत दर्ज कराई और अदालत में याचिका दाखिल कर एफआईआर की मांग की है।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 2 नवंबर तक समय क्यों दिया?
दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि जांच जारी है और बैंक से जुड़े आवश्यक विवरण अभी तक उपलब्ध नहीं हुए हैं। इसी आधार पर अदालत ने पुलिस को जांच पूरी करने के लिए 2 नवंबर 2026 तक का अतिरिक्त समय दिया।
डॉ. रोहिणी घावरी कौन हैं और उन्होंने क्या आरोप लगाए हैं?
डॉ. रोहिणी घावरी एक दलित अधिकार कार्यकर्ता और पीएचडी स्कॉलर हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2021 में चंद्रशेखर आजाद से पहचान हुई, लगभग तीन वर्षों तक संबंध रहे, विवाह का आश्वासन दिया गया, और सांसद बनने के बाद आजाद ने दूरी बना ली।
शिकायतकर्ता पक्ष ने जांच पर क्या आपत्ति जताई?
शिकायतकर्ता के वकील ने कहा कि जुलाई 2025 से अब तक पुलिस केवल प्रारंभिक जानकारियां जुटाने में लगी है, जबकि शादी के झांसे पर आधारित यौन शोषण जैसे गंभीर मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज होनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी के सांसद होने से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
2 नवंबर 2026 को होने वाली अगली सुनवाई में दिल्ली पुलिस को अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करनी होगी। उसके बाद अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनकर यह तय करेगी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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