चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर याचिका: राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 2 नवंबर तक दिया समय
सारांश
मुख्य बातें
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2026 को आजाद समाज पार्टी के प्रमुख एवं नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को जांच पूरी करने के लिए 2 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख भी 2 नवंबर ही तय की है।
मामले की पृष्ठभूमि
दलित अधिकार कार्यकर्ता एवं पीएचडी स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने सांसद चंद्रशेखर आजाद पर शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, मानसिक एवं भावनात्मक शोषण करने तथा धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए हैं। डॉ. घावरी के अनुसार, स्विट्जरलैंड में पढ़ाई के दौरान वर्ष 2021 के आसपास उनकी चंद्रशेखर आजाद से पहचान हुई थी।
शिकायत में आरोप है कि दोनों करीब तीन वर्षों तक संबंध में रहे, किंतु सांसद बनने के पश्चात आजाद ने उनसे दूरी बना ली। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें विवाह का आश्वासन दिया गया था, जिसके आधार पर संबंध बने — इसी को आधार बनाकर उन्होंने जुलाई 2025 में आपराधिक शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की स्थिति
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायत पर जांच जारी है और मामले से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां अभी तक प्राप्त नहीं हुई हैं। पुलिस के अनुसार, बैंक से जुड़ी आवश्यक विवरण अब तक उपलब्ध नहीं हो सके हैं, जिससे जांच प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हो सकी।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अदालत ने पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब की हो — पिछली सुनवाई में भी ऐसा ही हुआ था। इस पैटर्न पर शिकायतकर्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है।
शिकायतकर्ता पक्ष की दलीलें
डॉ. रोहिणी घावरी की ओर से पेश वकील ने अदालत में पुलिस की जांच की गति पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने तर्क दिया कि शिकायत जुलाई 2025 में दर्ज कराई गई थी, लेकिन एक वर्ष से अधिक समय बाद भी पुलिस केवल प्रारंभिक जानकारियां जुटाने में लगी हुई है।
वकील ने यह भी कहा कि आरोपी एक मौजूदा सांसद हैं और जांच में लगातार देरी निष्पक्ष कार्रवाई को प्रभावित कर सकती है। उनका तर्क था कि शादी का झांसा देकर यौन संबंध बनाने जैसे गंभीर आपराधिक आरोपों में विस्तृत प्रारंभिक जांच के बजाय तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी।
अदालत का रुख
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पुलिस को जांच आगे बढ़ाने और आवश्यक जानकारी जुटाने के लिए अतिरिक्त समय देते हुए अगली सुनवाई 2 नवंबर 2026 तय कर दी है। यह ऐसे समय में आया है जब न्यायपालिका पर यह दबाव बढ़ रहा है कि सांसदों या प्रभावशाली व्यक्तियों के खिलाफ शिकायतों में जांच में देरी न हो।
आगे क्या होगा
2 नवंबर 2026 की अगली सुनवाई में दिल्ली पुलिस को अपनी जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखनी होगी। सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर अदालत यह तय करेगी कि एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया जाए या नहीं। यह मामला दलित राजनीति, सांसदीय जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया की गति — तीनों के संदर्भ में व्यापक ध्यान आकर्षित कर रहा है।