छगन भुजबल का दो-टूक बयान: 'दूसरों को जो न्याय मिला, वही मुझे भी मिलना चाहिए'
सारांश
मुख्य बातें
एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल ने सोमवार, 8 जून को यह स्पष्ट किया कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं हुआ, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो न्याय अन्य नेताओं को मिला है, उसके वे भी उतने ही हकदार हैं। 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए पार्टी उम्मीदवार राजेंद्र जैन के नामांकन दाखिल होने के बाद मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए भुजबल ने यह बयान दिया।
भुजबल की असली माँग क्या थी
छगन भुजबल ने माना कि वे स्वयं राज्यसभा का नामांकन चाहते थे और उनकी यह भी इच्छा थी कि यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाए, तो उनके भतीजे और पूर्व सांसद समीर भुजबल को राज्य कैबिनेट में मंत्री पद दिया जाए। उन्होंने पार्टी के समक्ष यह प्रस्ताव रखा था, जिस पर अंतिम निर्णय तक केवल एक दिन शेष था।
समानता का तर्क: दूसरे नेताओं का हवाला
भुजबल ने अपने तर्क को पुष्ट करने के लिए महायुति सरकार के कई उदाहरण सामने रखे। उन्होंने कहा कि एनसीपी विधायक मकरंद पाटिल राज्य कैबिनेट में मंत्री हैं, जबकि उनके भाई नितिन पाटिल राज्यसभा सदस्य हैं। इसी तरह सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम हैं और उनके बेटे पार्थ पवार राज्यसभा में हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे लोकसभा में हैं।
भाजपा पर आरोप से इनकार
भुजबल ने इस बात को सिरे से खारिज किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उनके प्रस्ताव का विरोध किया था। उनके अनुसार, भाजपा ने कहा कि समीर भुजबल को राज्य कैबिनेट के अगले विस्तार के दौरान शामिल करने पर विचार किया जाएगा। भुजबल ने कहा, 'यह कहना गलत है कि भाजपा ने इसे ठुकरा दिया।'
भुजबल का अंदाज़: 'कबड्डी खिलाड़ी हूं, शतरंज का नहीं'
जब पत्रकारों ने सीधे पूछा कि क्या उनके साथ अन्याय हुआ, तो भुजबल ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में जवाब दिया — 'कैसा अन्याय? आजकल चीजें ऐसे ही चलती हैं। हमारी नीति है — आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों। मैं कबड्डी खिलाड़ी हूं, शतरंज का खिलाड़ी नहीं।' उन्होंने जोर देकर कहा कि वे नाराज नहीं हैं, लेकिन बराबरी का हक माँगने में कोई संकोच नहीं।
राजेंद्र जैन का नामांकन और पार्टी की अंदरूनी राजनीति
गौरतलब है कि जब समीर भुजबल के लिए मंत्री पद की माँग पूरी न होने पर छगन भुजबल ने अपना नाम वापस लिया, तो पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने अपने करीबी सहयोगी राजेंद्र जैन के नाम की सिफारिश की। इस नाम को एनसीपी की कोर कमेटी और विशेष रूप से पार्थ पवार ने मंजूरी दी। यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर उन समीकरणों को उजागर करता है जहाँ पारिवारिक राजनीति और गठबंधन की गणित एक साथ चलती है। भुजबल ने याद दिलाया कि वे एनसीपी की स्थापना के समय से ही पार्टी को खड़ा करने में अग्रणी भूमिका में रहे हैं। आने वाले कैबिनेट विस्तार में समीर भुजबल का नाम एक बार फिर चर्चा में होगा।