मराठा और कुनबी अलग-अलग हैं, बैकडोर से ओबीसी में घुसपैठ बर्दाश्त नहीं: मंत्री छगन भुजबल
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल ने 4 सितंबर को मराठा आरक्षण विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि मराठा और कुनबी दो अलग-अलग समुदाय हैं और जो व्यक्ति कुनबी नहीं है, उसे अनुचित तरीके से ओबीसी श्रेणी में शामिल करने का वे पुरज़ोर विरोध करेंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सर्वोच्च न्यायालय पहले ही यह निर्णय दे चुका है कि मराठा समाज पिछड़े वर्ग की परिभाषा में नहीं आता।
मुख्य बयान: कुनबी और मराठा एक नहीं
भुजबल ने मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कुनबी समुदाय कानूनी रूप से ओबीसी सूची में सम्मिलित है और उसे मिलने वाले लाभ उचित हैं। परंतु जो व्यक्ति कुनबी नहीं है, उसका 'बैकडोर' यानी पिछले दरवाज़े से ओबीसी में प्रवेश स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'यह मैं नहीं बोल रहा, सुप्रीम कोर्ट बोल रहा है कि मराठा समाज पिछड़ा नहीं है।'
न भय, न पक्षपात — मंत्री का संकल्प
भुजबल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी मंत्री या अधिकारी को अनुचित दबाव में आकर निर्णय नहीं लेने चाहिए। उनके अनुसार, 'हम लोगों ने बिना किसी भय और पक्षपात के मंत्री पद की शपथ ली है — न पक्ष लेंगे, न घबराएंगे और न डर के काम करेंगे।' उन्होंने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए कहा कि धरना-प्रदर्शन करना सबका हक है, लेकिन दबाव की राजनीति चलने नहीं दी जाएगी।
मुख्यमंत्री से होगी बातचीत
भुजबल ने संकेत दिया कि वे इस मसले पर मुख्यमंत्री से चर्चा करेंगे। उनका कहना था कि सामान्य प्रशासनिक मामलों में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि कोई निर्णय ओबीसी सहित अन्य आरक्षित वर्गों के हितों को प्रभावित करता है, तो वह सार्वजनिक रूप से सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जो आरक्षण में पहले से हैं, उनके अधिकारों पर आँच नहीं आनी चाहिए — गलत ढंग से घुसपैठ नहीं होनी चाहिए।'
मनोज जरांगे के आंदोलन पर प्रतिक्रिया
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे की चेतावनियों पर भुजबल ने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात कहने और मोर्चा निकालने का अधिकार है। हालाँकि, इसके परिणामों की ज़िम्मेदारी भी संबंधित पक्ष की होगी। आरक्षण सुधार के व्यापक सवाल पर उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर का मसला है और अभी स्थानीय संदर्भ में ही बात हो रही है।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा वर्षों से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने पहले मराठा समुदाय को अलग आरक्षण देने के राज्य सरकार के निर्णय को खारिज कर दिया था। अब कुनबी प्रमाण-पत्र के ज़रिए ओबीसी सूची में प्रवेश की कोशिशों को लेकर ओबीसी नेताओं में असंतोष बढ़ रहा है। भुजबल का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ भी पृष्ठभूमि में चल रही हैं और आरक्षण का मुद्दा चुनावी समीकरणों को सीधे प्रभावित करता है।