चीन के 70 करोड़ कैमरे विदेशी नागरिकों पर रख रहे रीयल-टाइम नज़र, लीक डेटाबेस से हुआ खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने एक अत्यंत परिष्कृत निगरानी प्रणाली विकसित की है, जो देश में मौजूद विदेशी नागरिकों की रीयल-टाइम लोकेशन, दैनिक गतिविधियों और सामाजिक संबंधों को निरंतर ट्रैक करती है — यह दावा साइबर सुरक्षा शोध संगठन नेटअस्करी के एक विश्लेषण में किया गया है, जिसे न्यू टैंग डायनेस्टी (NTD) टेलीविजन ने उद्धृत किया। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रणाली का नाम 'डायनमिक कंट्रोल प्लेटफॉर्म फॉर ओवरसीज पर्सनल' है और यह 70 करोड़ से अधिक निगरानी कैमरों वाले नेटवर्क का हिस्सा है।
निगरानी प्रणाली कैसे काम करती है
नेटअस्करी के विश्लेषण के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म सुरक्षा कैमरों, चेहरा पहचान तकनीक, वीज़ा रिकॉर्ड और मोबाइल डेटा को एकीकृत कर विदेशी नागरिकों का व्यापक डोज़ियर तैयार करता है। कथित तौर पर इस डेटाबेस में पासपोर्ट नंबर, जन्मतिथि, राष्ट्रीयता, नियोक्ता का नाम, चीनी मोबाइल नंबर और फ़ोटो जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी संग्रहीत की जाती है।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि सिस्टम लोगों के सामाजिक संबंध और मूवमेंट पैटर्न भी दर्ज करता है — यानी कौन किससे मिलता है, कौन किसका सहकर्मी है, और क्या दो लोगों को एक ही कैमरे में एक साथ देखा गया है।
पत्रकार भी निशाने पर
NTD की लेखिका मैरी मैन ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से 'फाइव आइज़' गठबंधन — अर्थात ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूज़ीलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका — के नागरिकों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, 'यह सिस्टम खास चीनी शहरों में, पड़ोस के ब्लॉक स्तर तक इन नागरिकों के सटीक वितरण पर नज़र रखता है।'
ब्रिटेन के एक प्रमुख दैनिक की रिपोर्टर सोफिया यान ने कथित तौर पर इस डेटाबेस में अपनी व्यक्तिगत प्रोफाइल खोज निकाली। मैरी मैन के अनुसार, यान ने कहा: 'आप देख सकते हैं कि कौन एक-दूसरे को जानता है, कौन क्लासमेट है, कौन कलीग है, क्या वे एक ही मोहल्ले में रहते हैं, क्या उन्हें कैमरे में एक साथ देखा गया है।'
विदेशी पत्रकारों को विशेष निगरानी सूची में रखे जाने का भी दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के दौरे को कवर करने गए कई अमेरिकी पत्रकारों को सीसीपी ने वीज़ा देने से इनकार कर दिया — इनमें द एपोक टाइम्स के व्हाइट हाउस रिपोर्टर ट्रैविस गिलमोर, NTD टेलीविजन रिपोर्टर मारी ओत्सु और फोटो जर्नलिस्ट लेई चेन शामिल थे।
प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, चीन में इस समय 116 मीडिया पेशेवर जेल में बंद हैं, जिसके चलते वह दुनिया में पत्रकारों को सबसे अधिक कैद करने वाला देश बना हुआ है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में चीन को उत्तर कोरिया और इरिट्रिया के ठीक ऊपर तीसरे सबसे खराब देश के रूप में स्थान दिया गया है। गौरतलब है कि चीन में अब प्रत्येक दो नागरिकों पर एक निगरानी उपकरण मौजूद होने का अनुमान है।
आगे क्या
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब पश्चिमी देश चीन की तकनीकी निगरानी क्षमताओं को लेकर पहले से सतर्क हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ये दावे सत्यापित होते हैं, तो यह राजनयिक और नागरिक स्वतंत्रता दोनों स्तरों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। फिलहाल चीनी सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।