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पुरुषोत्तम मास विशेष: ताड़ीपत्री का चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर, 16वीं सदी की विजयनगर विरासत

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पुरुषोत्तम मास विशेष: ताड़ीपत्री का चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर, 16वीं सदी की विजयनगर विरासत

सारांश

पुरुषोत्तम मास में आंध्र प्रदेश के ताड़ीपत्री का चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर श्रद्धा और इतिहास का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। 16वीं सदी में विजयनगर साम्राज्य के काल में निर्मित यह मंदिर 1520 के गरुड़ मंडप और हम्पी-शैली की स्थापत्य कला के लिए विख्यात है।

मुख्य बातें

चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के ताड़ीपत्री में स्थित है।
मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल में हुआ था।
परिसर में स्थित गरुड़ मंडपम का निर्माण वर्ष 1520 के आसपास हुआ; यह ग्रेनाइट के रथ-स्वरूप में निर्मित है।
वार्षिक ब्रह्मोत्सवम उत्सव सितंबर-अक्टूबर में आयोजित होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
मंदिर सुबह 6 से 11 बजे और शाम 5 से रात 8 बजे तक खुला रहता है; निकटतम रेलवे स्टेशन अनंतपुर है।

पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी पावन अवसर पर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के ताड़ीपत्री में स्थित चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर श्रद्धालुओं और इतिहास-प्रेमियों दोनों के लिए एक अनिवार्य गंतव्य बनकर उभरता है। यह मंदिर भगवान विष्णु के स्वरूप वेंकटेश्वर को समर्पित है और दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा का जीवंत प्रमाण है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल के दौरान हुआ था। वह युग दक्षिण भारत में कला, स्थापत्य और संस्कृति के उत्कर्ष का काल था, और यह मंदिर उसी स्वर्णिम दौर की भव्यता को आज भी संजोए हुए है। मंदिर परिसर में स्थित प्रसिद्ध गरुड़ मंडपम का निर्माण वर्ष 1520 के आसपास कराया गया था, जो आज भी अपनी कलात्मक सुंदरता के लिए विख्यात है।

वास्तुकला की भव्यता

मंदिर में प्रवेश करते ही ऊंचा गोपुरम दूर से ही दृष्टिगोचर होता है। स्तंभों, दीवारों और प्रवेश द्वारों पर उकेरी गई नक्काशीदार मूर्तियां उस काल के शिल्पकारों की असाधारण प्रतिभा की गवाही देती हैं। गोपुरम के पश्चात् गरुड़ मंडप आता है, जिसे ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित पहियों वाले रथ के स्वरूप में तैयार किया गया है। इसकी संरचना प्रसिद्ध हम्पी के विट्ठल मंदिर के पत्थर के रथ की स्मृति दिलाती है, यद्यपि आकार में यह अपेक्षाकृत छोटा है।

गरुड़ मंडप के सामने लगभग चालीस स्तंभों वाला विशाल मुख मंडप स्थित है। इसके बाद रंग मंडप और मुख्य गर्भगृह आता है, जहां भक्त भगवान वेंकटरमण के दर्शन करते हैं। मंदिर परिसर में अनेक छोटे देवालय भी हैं, जो विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित हैं।

धार्मिक मान्यता और उत्सव

मंदिर से जुड़ी लोकप्रिय मान्यता के अनुसार, यह वही पवित्र स्थान है जहां भगवान वेंकटेश्वर ने अपने भक्त चिंताला वेंकटरमण को दिव्य दर्शन दिए थे। इसी घटना की स्मृति में इस मंदिर की स्थापना की गई और कालांतर में यह आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। यहां आयोजित होने वाला वार्षिक ब्रह्मोत्सवम सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है, जो सितंबर और अक्टूबर के बीच मनाया जाता है। इस पर्व में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं और भगवान की भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं।

पर्यटन और आसपास के दर्शनीय स्थल

पर्यटन की दृष्टि से भी यह क्षेत्र अत्यंत समृद्ध है। ताड़ीपत्री का प्राचीन किला और गांडिकोटा किला इतिहास-प्रेमियों को अतीत की अनूठी झलक दिखाते हैं। मंदिर के आसपास के बाजार स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक मूर्तियों, पारंपरिक रेशमी साड़ियों और हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुओं के लिए प्रसिद्ध हैं।

दर्शन समय और कैसे पहुंचें

चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है। मंदिर पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा बेंगलुरु का केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा ताड़ीपत्री पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन अनंतपुर रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक सुगमता से पहुंचा जा सकता है। पुरुषोत्तम मास में इस मंदिर का दर्शन आध्यात्मिक शांति के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनमोल अनुभूति प्रदान करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि ताड़ीपत्री जैसे स्थल — जो वास्तुकला और आस्था दोनों में उतने ही समृद्ध हैं — मुख्यधारा की कवरेज से वंचित रह जाते हैं। विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य परंपरा को संरक्षित करने वाले ऐसे मंदिरों पर ध्यान देना न केवल धार्मिक पर्यटन को विकेंद्रित करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति देगा। गरुड़ मंडपम जैसी संरचनाओं का संरक्षण और उनका व्यापक प्रचार-प्रसार सांस्कृतिक विरासत नीति की प्राथमिकता सूची में होना चाहिए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के ताड़ीपत्री में स्थित है। यह भगवान विष्णु के स्वरूप वेंकटेश्वर को समर्पित है और दक्षिण भारत की प्राचीन मंदिर परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
इस मंदिर का निर्माण कब और किसने करवाया?
इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल के दौरान हुआ था। परिसर में स्थित गरुड़ मंडपम का निर्माण वर्ष 1520 के आसपास कराया गया था।
मंदिर के दर्शन का समय क्या है?
चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है। गर्भगृह में मुख्य देवता के दर्शन इन्हीं समयों में किए जा सकते हैं।
मंदिर तक कैसे पहुंचा जा सकता है?
निकटतम हवाई अड्डा बेंगलुरु का केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा ताड़ीपत्री पहुंचा जा सकता है। निकटतम रेलवे स्टेशन अनंतपुर रेलवे स्टेशन है, जहां से टैक्सी या बस द्वारा मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
पुरुषोत्तम मास में इस मंदिर का क्या महत्व है?
सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास के दौरान भगवान विष्णु के मंदिरों में दर्शन, पूजा और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। चिंताला वेंकटरमण स्वामी मंदिर विष्णु के स्वरूप वेंकटेश्वर को समर्पित होने के कारण इस माह विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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