पुरुषोत्तम मास 2026: गया का विष्णुपद मंदिर — नारायण के पदचिन्हों पर 18वीं सदी की अहिल्याबाई की विरासत
सारांश
मुख्य बातें
पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के पावन अवसर पर बिहार के गया जिले में स्थित विष्णुपद मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। फल्गु नदी के तट पर स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु के साक्षात पदचिन्हों पर निर्मित माना जाता है और पितरों की मुक्ति के लिए देशभर में श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस स्थल पर पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मंदिर की पौराणिक पृष्ठभूमि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर भगवान विष्णु ने गयासुर नामक राक्षस को मोक्ष प्रदान किया था। उस दिव्य घटना के प्रमाण स्वरूप भगवान के चरणों के निशान आज भी मंदिर के गर्भगृह में एक शिला पर स्पष्ट रूप से अंकित हैं। यह शिला भक्तों के लिए साक्षात दर्शन का माध्यम बनती है, जहाँ वे फूल, चंदन और दूध अर्पित कर पूजन करते हैं। गौरतलब है कि गया को सनातन परंपरा में पितृ-तीर्थ के रूप में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है।
18वीं सदी की स्थापत्य विरासत
मंदिर का वर्तमान भव्य स्वरूप 18वीं शताब्दी में मराठा महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित कराया गया था। लाल पत्थरों से निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला में नक्काशीदार स्तंभ, सुसज्जित शिखर और भगवान विष्णु की चरण पादुका विशेष रूप से दर्शनीय हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अहिल्याबाई होल्कर द्वारा निर्मित कराए गए मंदिरों की श्रृंखला — काशी विश्वनाथ से लेकर सोमनाथ तक — को उनकी स्थापत्य विरासत के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
पिंडदान और पितृ-मोक्ष की परंपरा
सनातन धर्म में पिंडदान की परंपरा विशेष महत्व रखती है। श्राद्ध पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु फल्गु नदी के तट पर स्नान कर पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि यहाँ अर्पित पिंड से पितरों को सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है। पुरुषोत्तम मास में दान-पुण्य और नारायण-पूजन का विशेष विधान होने के कारण इस अवधि में मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या उल्लेखनीय रूप से बढ़ जाती है।
आसपास के तीर्थ स्थल
विष्णुपद मंदिर के निकट कई अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल हैं। मंगला गौरी मंदिर में देवी गौरी की शक्ति-पूजा होती है। ब्रह्मयोनि पर्वत आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व का स्थान है। अक्षय वट पितरों के लिए विशेष पूजा का केंद्र माना जाता है। इसके अतिरिक्त, लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित महाबोधि मंदिर (बोधगया) यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है, जहाँ महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था।
दर्शन की व्यावहारिक जानकारी
मंदिर गया जंक्शन रेलवे स्टेशन से मात्र 4-5 किलोमीटर की दूरी पर है और यहाँ ऑटो, ई-रिक्शा व टैक्सी सुलभ हैं। पटना हवाई अड्डे से गया की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। मंदिर प्रातः 5 बजे से रात्रि 9 बजे तक खुला रहता है। ध्यान देने योग्य है कि मंदिर परिसर में मोबाइल फोन, कैमरा तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना प्रतिबंधित है। दर्शन के लिए सितंबर से अप्रैल का समय सर्वाधिक अनुकूल माना जाता है। पूर्णिमा, अनंत चतुर्दशी और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे विशेष पर्वों पर भी भक्त बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं।