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उत्तराखंड विरासत अभियान: धामी सरकार ने 10,404 में से 4,943 संपत्ति नामांतरण मामले निपटाए

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उत्तराखंड विरासत अभियान: धामी सरकार ने 10,404 में से 4,943 संपत्ति नामांतरण मामले निपटाए

सारांश

उत्तराखंड में सीएम धामी के विरासत अभियान ने 10,404 में से 4,943 निर्विवाद संपत्ति नामांतरण मामले निपटाए। 17 अक्टूबर के म्यूटेशन डे के आँकड़े बताते हैं कि धारा 33ए के 1,160 में से 1,108 मामले सुलझे — यानी लगभग 95% सफलता दर। शेष मामलों के लिए अधिकारियों को नियमित समीक्षा के निर्देश जारी।

मुख्य बातें

सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाए गए विरासत अभियान में कुल 10,404 प्रकरण दर्ज हुए।
4,943 प्रकरणों का निस्तारण पूर्ण; 5,461 मामले अभी प्रक्रियाधीन।
धारा 34 के तहत 9,244 मामलों में से 3,835 का निस्तारण; धारा 33ए के 1,160 में से 1,108 निपटाए गए।
17 अक्टूबर 2026 को म्यूटेशन डे का आयोजन किया गया।
मुख्यमंत्री ने शेष मामलों की नियमित समीक्षा और शीघ्र निस्तारण के निर्देश अधिकारियों को दिए।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर राज्यभर में चलाए गए विरासत अभियान के तहत निर्विवाद संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े हज़ारों मामलों का निस्तारण किया गया है। अभियान के अंतर्गत धारा 34 और धारा 33ए के तहत कुल 10,404 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 4,943 प्रकरणों का अब तक निस्तारण किया जा चुका है। इस पहल से राज्य के बड़ी संख्या में नागरिकों को राहत मिली है और विरासत संबंधी संपत्ति विवादों के समाधान की गति तेज़ हुई है।

अभियान का विवरण और आँकड़े

17 अक्टूबर 2026 को आयोजित म्यूटेशन डे के दौरान उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, धारा 34 के तहत 9,244 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 3,835 का निस्तारण किया गया। वहीं, धारा 33ए के तहत दर्ज 1,160 प्रकरणों में से 1,108 का निस्तारण हो चुका है। दोनों धाराओं को मिलाकर कुल 4,943 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया है।

मुख्यमंत्री का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा, "संपत्ति से जुड़े निर्विवाद मामलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार की प्राथमिकता है कि ऐसे मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित कर नागरिकों को राहत दी जाए।"

धामी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के तहत प्राप्त मामलों की नियमित समीक्षा करते हुए शेष प्रकरणों का भी शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में भू अभिलेखों के डिजिटलीकरण और राजस्व सेवाओं के सरलीकरण पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। विरासत अभियान के ज़रिए उन नागरिकों को सीधा लाभ मिल रहा है जो वर्षों से पैतृक संपत्ति के नामांतरण के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे हैं। गौरतलब है कि संपत्ति का नामांतरण न होने की स्थिति में नागरिक सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और अन्य अधिकारों से वंचित रह सकते हैं।

प्रशासनिक सुधार की दिशा

राज्य सरकार की इस पहल से राजस्व सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने, नागरिकों की समस्याओं के समाधान और प्रशासन के प्रति विश्वास मज़बूत करने में मदद मिल रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जनोन्मुखी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। अभियान के शेष 5,461 प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया भी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर यह है कि 10,404 में से केवल 4,943 यानी करीब 47% मामले ही निपटाए गए हैं — आधे से अधिक अभी भी लंबित हैं। धारा 33ए में 95% निस्तारण दर उत्साहजनक है, पर धारा 34 में यह मात्र 41% है, जो बताता है कि सबसे ज़्यादा मामलों वाली श्रेणी में काम अभी बाकी है। यह अभियान राजस्व सेवाओं की दीर्घकालिक बाधाओं को एक दो कैंप से हल करने की कोशिश है, जो स्वागतयोग्य है, लेकिन बिना स्थायी प्रक्रिया सुधार के ऐसे अभियान हर कुछ वर्षों में दोहराने की ज़रूरत पड़ती रहेगी।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तराखंड विरासत अभियान क्या है?
विरासत अभियान उत्तराखंड सरकार की एक पहल है जिसके तहत निर्विवाद संपत्ति हस्तांतरण (नामांतरण) के लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाता है। यह अभियान धारा 34 और धारा 33ए के तहत दर्ज प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने के लिए शुरू किया गया है।
अभियान में अब तक कितने मामले निपटाए गए हैं?
अभियान के तहत कुल 10,404 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 4,943 का निस्तारण किया जा चुका है। धारा 34 के 9,244 में से 3,835 और धारा 33ए के 1,160 में से 1,108 मामले हल किए गए हैं।
म्यूटेशन डे क्या होता है और यह कब आयोजित हुआ?
म्यूटेशन डे एक विशेष प्रशासनिक दिवस होता है जिस दिन संपत्ति नामांतरण के मामलों का एकमुश्त निस्तारण किया जाता है। उत्तराखंड में यह 17 अक्टूबर 2026 को आयोजित किया गया था।
संपत्ति नामांतरण न होने से नागरिकों को क्या परेशानी होती है?
संपत्ति का नामांतरण न होने पर नागरिक सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण और कानूनी अधिकारों से वंचित रह सकते हैं। इसके अलावा उन्हें सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और संसाधन दोनों बर्बाद होते हैं।
शेष लंबित मामलों का निस्तारण कब तक होगा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि शेष प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर नियमानुसार शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। हालाँकि सरकार ने अभी तक कोई निश्चित समय सीमा सार्वजनिक नहीं की है।
राष्ट्र प्रेस
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