भारत की 145 करोड़ जनशक्ति और 500 वर्षों की समस्याओं का समाधान: सीएम योगी का संदेश
सारांश
Key Takeaways
- स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग हानिकारक है।
- बच्चों को अच्छी किताबों और योग पर ध्यान देना चाहिए।
- भारत की विशेषता में त्योहारों और परंपराओं का योगदान है।
- युवा पीढ़ी को नशे के खिलाफ जागरूक रहना चाहिए।
- भारत की समृद्ध विरासत का संरक्षण आवश्यक है।
जालोर, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृशक्ति से अपील की है कि छोटी उम्र के बच्चों को रोने या नाराज होने दिया जाए, कुछ समय बाद वे ठीक हो जाएंगे, लेकिन स्मार्टफोन कभी न दें। स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग न केवल समय की बर्बादी कर रहा है, बल्कि यह आँखों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। यह सोचने की क्षमता को कम और बुद्धि को कुंठित कर रहा है, जिसके कारण लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। स्मार्टफोन के अनेक गेम नकारात्मक दिशा में जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चे स्मार्टफोन पर जितना समय बिताते हैं, उतना समय अगर वे अच्छी किताबें पढ़ने, योग या व्यायाम में लगाएं, तो उनका जीवन अधिक सुंदर और व्यवस्थित होगा। स्मार्टफोन का लगातार उपयोग नशे की तरह खतरनाक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में 200 से अधिक देश हैं, लेकिन भारत के समान कोई नहीं है। भारत की विशेषता को समझने के लिए त्योहारों, परंपराओं, ऋषियों-मुनियों, विद्वानों, सैनिकों, किसानों, युवाओं, बहन-बेटियों और माताओं के योगदान को पहचानना आवश्यक है। उन्होंने सिरे मंदिर के आसपास बंदरों के चौराहे का उदाहरण देते हुए कहा कि जब हम यहाँ रुके, तो कई बंदर आए। हमने एक बंदर को रोटी दी, वह खाने लगा, लेकिन जब तक उसने पहली रोटी खाई, तब तक दूसरी रोटी नहीं ली। मनुष्यों को यह शालीनता सीखनी चाहिए। मनुष्य को हड़पने और संचय की बजाय जरूरतमंदों तक पहुंचाने का भाव रखना चाहिए। लोभ को नियंत्रित करना साधना है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना परम साधना है।
राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को गोरक्षपीठाधीश्वर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालोर के श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर (सिरे मंदिर) के 375 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्मसभा में भाग लिया।
धर्मसभा में उन्होंने युवा पीढ़ी को सलाह दी कि स्मार्टफोन का उपयोग आवश्यकतानुसार ही करें। परिवार के लिए समय निकालें, बातचीत करें। भोजन या पूजा के समय फोन का उपयोग न करें, बाद में कॉलबैक करें। स्मार्टफोन एक समय बाद डिप्रेशन का कारण बन सकता है। छोटी-छोटी बातों के कारण आत्महत्याओं की प्रवृत्ति बढ़ रही है। विफलता का सामना करें और उसे सफलता में बदलने का प्रयास करें। विफलता से डरें नहीं, बल्कि चुनौतियों का सामना करें। कोई भी भाग्य नहीं ले सकता, सब कुछ ईश्वरीय कृपा से ही मिलता है। लोभ-लालच से मुक्त होकर देश और समाज के बारे में सोचें।
सीएम योगी ने कहा कि देश के दुश्मन और नशे के सौदागर युवा पीढ़ी को नशे के जाल में फंसाना चाहते हैं। हमें नशे के कारोबारियों को सफल नहीं होने देना है। किसी देश के भविष्य का आकलन करना है तो युवा पीढ़ी को देखना चाहिए। यदि वे सही दिशा में हैं, तो देश नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। उन्होंने अपील की कि नशे के सौदागरों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे या गांव में प्रवेश न करने दें।
सीएम योगी ने कहा कि ऋषि-मुनियों का साधना क्षेत्र इतना आध्यात्मिक था कि शेर और गाय एक ही जगह पर पानी पीते थे। उन्होंने शिव परिवार का उल्लेख करते हुए कहा कि मां पार्वती दुर्गा का प्रतीक हैं, उनकी सवारी शेर और भोलेनाथ की सवारी बैल है। गणपति की सवारी चूहा है, भोलेनाथ के गले में नाग है और कार्तिकेय की सवारी मोर है, फिर भी सब मिलकर जीवन चक्र को संचालित कर रहे हैं। जहां विरोध को समाहित करने की क्षमता हो और समतामूलक समाज को एकता के सूत्र में जोड़ने की ताकत हो, वही भारत है। भारत ने दुनिया को जीने की कला सिखाई है। ऋषि-मुनियों की साधना, वीरों और वीरांगनाओं के बलिदान, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और श्रमिकों के पसीने से भारत का निर्माण हुआ है। जब समाज का हर तबका योगदान देगा, तो देश ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ बनेगा।
गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि नाथ संप्रदाय की परंपरा हर काल में धराधाम पर विद्यमान है। संत, योगी, योगेश्वर सदैव अजर-अमर हैं। इनकी कृपा भक्तों और श्रद्धालुओं पर बरसती है। हम भी प्रयास करें क्योंकि देश, समाज, और धर्म के लिए किया गया योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। समाज को बांटने का पाप करने वालों को समझाएं और उन्हें दूर करने का प्रयास करें। सीएम ने वीरमदेव, कीर्ति चौहान जैसे वीरों को याद करते हुए कहा कि यह देश वीरों और वीरांगनाओं के बलिदान से बना है। चित्तौड़गढ़ में रानी पद्मिनी ने हजारों वीरांगनाओं के साथ जौहर किया था। जालोर में भी अलाउद्दीन खिलजी और उसके बाद इस परंपरा को देखा गया। उन्होंने सिरे मंदिर की बारीक कारीगरी, दुर्लभ कला और शिलालेखों का जिक्र करते हुए महाराजा मान सिंह के योगदान की भी चर्चा की।
सीएम योगी ने कहा कि भारतवासी समृद्ध विरासत के वारिस हैं, इसलिए इसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी हमारी होनी चाहिए। दुनिया में सबसे अधिक कामकाजी (56-60 फीसदी) लोग भारत में हैं, जो परिश्रम और पुरुषार्थ करते हैं। इनकी ताकत ही भारत की ताकत है। भारत पीएम मोदी के नेतृत्व में दुनिया की बड़ी ताकत बनने की ओर अग्रसर है। नेतृत्व इस बात पर निर्भर करता है कि ताकत का उपयोग किस प्रकार किया जाता है। पहले की सरकारों ने बांटने पर विश्वास किया, जिसके कारण हम जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर बंटे। कश्मीर और नक्सलवाद की समस्या, भाषाई विवाद, जातीय संघर्ष और अराजकता का तांडव था। शासन की सुविधाओं का लाभ गरीबों, दलितों, वंचितों और अतिपिछड़ों को नहीं मिल सका। पीएम मोदी ने देश को एक स्वर में जोड़ने का कार्य किया। कश्मीर और नक्सलवाद की समस्या का समाधान निकाला और गरीबों को बिना भेदभाव सुविधाएं और अधिकार प्रदान किए। ट्रेन, सड़क, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट, मेट्रो, इंजीनियरिंग कॉलेज, आईआईएम, एम्स जैसी संस्थाएं स्थापित की।
सीएम योगी ने कहा कि पिछली सरकारें आस्था को अंधविश्वास मानती थीं, लेकिन पीएम मोदी ने कहा कि सनातन धर्म की आस्था भारत की आस्था है। आस्था के बिना कोई समाज आगे नहीं बढ़ सकता। इसके लिए उन्होंने कार्य भी प्रारंभ किया। राम मंदिर का निर्माण 1947, 1948, 1949 या 1950 में भी हो सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हम अभिवादन में राम-राम कहते हैं, लेकिन पिछली सरकारें कहती थीं कि राम-कृष्ण हुए ही नहीं। जिन्होंने राम को नकारा, उन्हें प्रभु ने भी ठुकरा दिया। अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है। जब 145 करोड़ जनशक्ति का भारत बोलता है, तो 500 वर्ष की विकट समस्या का समाधान भी होता है। जब हम एकजुट होकर सोचेंगे, बोलेंगे और सामूहिक प्रयास करेंगे, तो राम मंदिर जैसी सफलता प्राप्त होगी। काशी में काशी विश्वनाथ धाम बन गया है। मथुरा-वृंदावन में भी ऐसी व्यवस्था चल रही है। बस करने की इच्छाशक्ति और मन में भाव होना चाहिए।