कर्नाटक में कांग्रेस के तीन साल: सिद्धारमैया बोले — 'कर्नाटक मॉडल, गुजरात मॉडल से बेहतर'
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मंगलवार, 19 मई 2026 को तुमकुरु में कर्नाटक कांग्रेस सरकार के तीन वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित 'तीन साल की उपलब्धियों के प्रति समर्पण सम्मेलन' का उद्घाटन किया और दावा किया कि 'कर्नाटक विकास मॉडल' भाजपा के 'गुजरात मॉडल' से कहीं बेहतर है। यह आयोजन तुमकुरु जिला प्रशासन और जिला पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।
सम्मेलन में क्या हुआ
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 'नव कर्नाटक' विकास मॉडल प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया और तुमकुरु जिले में ₹682 करोड़ की प्रमुख विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस विशाल सम्मेलन की अध्यक्षता गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने की, जबकि राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने आयोजन की देखरेख की। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, समस्त कैबिनेट मंत्री और विधायक भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
वादों की पूर्ति पर सरकार का दावा
सिद्धारमैया ने कहा कि गृह मंत्री जी. परमेश्वर की अध्यक्षता में तैयार किए गए पार्टी के चुनावी घोषणापत्र में किए गए 580 वादों में से कांग्रेस सरकार ने 290 से अधिक वादे पूरे कर दिए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि शेष वादे भी अगले दो वर्षों के भीतर पूरे किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता संभालने के तुरंत बाद पाँच गारंटी योजनाओं को लागू किया गया और अन्य कई वादों की पूर्ति की दिशा में काम जारी है।
भाजपा और गुजरात मॉडल पर हमला
भाजपा पर निशाना साधते हुए सिद्धारमैया ने दावा किया कि भाजपा गुजरात में 35 वर्षों से सत्ता में है, लेकिन वहाँ वास्तविक विकास नहीं हुआ। उन्होंने गुजरात में हाल ही में हुई एक कथित घटना — जिसमें एक मकान मालिक ने ₹2,500 के बकाया किराए को लेकर एक गरीब किरायेदार परिवार की 13 वर्षीय लड़की का यौन उत्पीड़न किया — का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 'गुजरात के वास्तविक मॉडल' को दर्शाती है। उन्होंने कहा, 'हमने सभी जातियों और धर्मों के लोगों के विकास के लिए काम किया है और भाजपा के विपरीत जाति व धर्म के नाम पर विभाजनकारी राजनीति नहीं की।'
मोदी सरकार पर महंगाई का आरोप
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले डीजल, पेट्रोल और सोने की कीमतें काफी कम थीं, जबकि आज कीमतें आसमान छू रही हैं। उन्होंने कहा कि इस महंगाई की मार गरीब और मध्यम वर्ग दोनों को झेलनी पड़ रही है।
आगे की राह
कर्नाटक सरकार के शेष दो वर्षों में घोषणापत्र के बचे हुए वादों को पूरा करने की चुनौती बनी रहेगी। गौरतलब है कि यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज़ है और विपक्ष सरकार की उपलब्धियों पर सवाल उठा रहा है। सरकार के दावों की असली परीक्षा आने वाले विधानसभा चुनाव में होगी।