सोनौली बॉर्डर पर थाई महिला गिरफ्तार: फर्जी आधार, वोटर ID और पैन कार्ड मोबाइल में मिले
सारांश
मुख्य बातें
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सोनौली इमिग्रेशन चेकपोस्ट पर 16 अगस्त 2026 को एक थाई महिला को फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। महराजगंज जिले की इमिग्रेशन टीम ने नेपाल से भारत लौट रही इस महिला को नियमित जांच के दौरान पकड़ा, जिसके मोबाइल फोन में कथित तौर पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड की डिजिटल प्रतियां मिलीं। पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुई पहचान
सोनौली इमिग्रेशन कार्यालय पर अधिकारी नेपाल से भारत में प्रवेश कर रहे यात्रियों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान महिला ने अपना थाई पासपोर्ट संख्या AC2825032 और वीजा प्रस्तुत किया। अधिकारियों को महिला की बोलचाल और भाषा को लेकर संदेह हुआ, जिसके बाद गहन पूछताछ की गई। जांच में महिला की पहचान थाईलैंड निवासी चोन चुतिचिराफत के रूप में हुई।
महिला के मोबाइल फोन की तलाशी में 'करुणा रुपनी देवी दासी', पत्नी मित्रलाल खनाल, निवासी वैष्णव नगर, रमनरेती, वृंदावन, मथुरा के नाम से बने कथित फर्जी दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियां बरामद हुईं। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी संख्या ZMY4348066 और पैन कार्ड संख्या DAFPD459D शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम: 20 साल की पृष्ठभूमि
पूछताछ में सामने आया कि चोन चुतिचिराफत की शादी वर्ष 2005 में थाईलैंड में नेपाली नागरिक मित्रलाल खनाल से हुई थी। वर्ष 2006 में वह पति के साथ भारत आई और मथुरा में किराए के मकान में रहने लगी। वर्ष 2011 में दंपति ने मथुरा में जमीन खरीदकर मकान बनाया।
आरोप है कि इसके बाद महिला की पहचान बदलकर उसके नाम से कथित तौर पर फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कराए गए। महिला के दो बच्चे — नंदनी (20 वर्ष) और नीरज (18 वर्ष) — मथुरा में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। महिला 19 मई 2026 को नेपाल घूमने गई थी और 16 अगस्त 2026 को वापस लौटते समय सोनौली सीमा पर पकड़ी गई।
पुलिस की कार्रवाई
इमिग्रेशन अधिकारियों ने पूछताछ के बाद महिला को सोनौली पुलिस के हवाले कर दिया। सोनौली कोतवाल महेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार थाई महिला से पूछताछ जारी है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस फर्जी पहचान बनाकर दस्तावेज तैयार कराने और उनके इस्तेमाल के आरोपों की जांच कर रही है।
सीमा सुरक्षा पर सवाल
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-नेपाल सीमा पर अवैध प्रवेश और फर्जी दस्तावेजों के ज़रिये नागरिकता हासिल करने के प्रयासों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से सतर्क हैं। गौरतलब है कि खुली सीमा होने के कारण सोनौली बॉर्डर पर यात्रियों का भारी आवागमन होता है, जो इमिग्रेशन जांच को और अधिक जटिल बनाता है। मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।