27 अक्टूबर 2026
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चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट हलफनामा 'गलत': कांग्रेस की जांच की मांग, SIR विवाद गहराया

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चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट हलफनामा 'गलत': कांग्रेस की जांच की मांग, SIR विवाद गहराया

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग के SIR हलफनामे को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में 'बिल्कुल गलत' करार दिया है। सर्वसम्मति के दावे को चुनाव आयुक्तों के डिसेंट नोट्स से विरोधाभासी बताया जा रहा है। फॉर्म 6 में बदलाव और लाखों वोट काटे जाने के आरोपों के साथ यह विवाद अब सीधे कोर्ट की परीक्षा का सामना कर रहा है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने हलफनामे को 'बिल्कुल गलत' बताया; कहा — चुनाव आयुक्तों के बयान विरोधाभासी हैं।
सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर लाखों मतदाताओं के नाम काटे गए; एक घर से 50-100 वोट दर्ज होने की शिकायतों पर कोई जवाब नहीं।
NCP (SP) नेता क्लाइड क्रास्टो ने याद दिलाया कि आयोग ने फॉर्म 6 बदलाव को पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बताया था, जिसे CJI ने खारिज किया था।
इंडिया गठबंधन ने सभी आंतरिक रिकॉर्ड और डिसेंट नोट्स सुप्रीम कोर्ट में पेश करने की माँग की है।

कांग्रेस और विपक्षी नेताओं ने 27 अक्टूबर 2026 को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के उस हलफनामे को 'बिल्कुल गलत' करार दिया, जो आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दाखिल किया था। नेताओं ने माँग की है कि हलफनामे की स्वतंत्र जाँच हो और विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का ठोस जवाब दिया जाए।

हलफनामे में क्या दावा किया गया

भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में स्पष्ट किया कि मतदाता सूचियों के SIR से जुड़े सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू एवं विवेक जोशी द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग का यह दावा ही अब विवाद का केंद्र बन गया है, क्योंकि इससे पहले खबरें आई थीं कि दो आयुक्तों ने कुछ फैसलों पर 'डिसेंट नोट' (असहमति पत्र) दर्ज कराए थे।

कांग्रेस नेताओं के आरोप

कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट में इंडी गठबंधन ने माँग की थी कि इससे जुड़े सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएँ। लेकिन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसा कोई रिकॉर्ड कोर्ट में पेश नहीं किया गया है। हमें उम्मीद है कि सभी रिकॉर्ड पेश किए जाएंगे और चुनाव आयुक्तों के डिसेंट नोट्स की भी जाँच की जाएगी।'

माथर ने आगे कहा, 'रिकॉर्ड की जाँच के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि सर्वसम्मति से कोई फैसला लिया गया था या नहीं। फॉर्म नंबर 6 में बदलाव को लेकर सार्वजनिक रिकॉर्ड में स्पष्ट विसंगतियाँ हैं और यह भी दर्ज है कि आयोग ने इस फॉर्म पर अपना रुख किस प्रकार पलटा।'

कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने आरोप लगाया कि SIR की आड़ में फॉर्म 6 से छेड़छाड़ कर लाखों-करोड़ों मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने कहा, 'जिन इलाकों में चुनाव से पहले नए नाम जोड़े गए थे, वहाँ SIR के बहाने वोट काट दिए गए हैं। एक ही घर से 50, 60 या 100 वोट दर्ज होने की लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं।'

वरिष्ठ नेताओं ने बताया विरोधाभासी

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने हलफनामे को 'बिल्कुल गलत' करार देते हुए कहा, 'पहले दो चुनाव आयुक्तों ने खुद कहा था कि फैसलों पर उनकी सहमति नहीं ली गई। अब कोर्ट में यह कहना कि सब कुछ सर्वसम्मति से हुआ, यह विरोधाभासी है।'

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने एक और अहम बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि जब फॉर्म 6 में बदलावों पर सवाल उठे थे, तब आयोग ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ये बदलाव किए गए। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया था कि कोर्ट ने कोई ऐसा निर्देश नहीं दिया। क्रास्टो ने कहा, 'अब इतने दिनों बाद आयोग का यह कहना कि कोई बदलाव नहीं हुआ और जो हुआ वह सर्वसम्मति से हुआ — यह हलफनामा अपने आप में संदिग्ध है।'

पृष्ठभूमि: SIR विवाद क्या है

गौरतलब है कि SIR (Special Intensive Revision) मतदाता सूचियों की समीक्षा की एक प्रक्रिया है, जिसे लेकर विपक्षी दलों ने आरोप लगाए हैं कि इसके नाम पर बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए। इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में इस प्रक्रिया को चुनौती दी है और सभी संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की माँग की है। यह पहली बार नहीं है जब आयोग और विपक्ष के बीच मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर टकराव हुआ हो — लेकिन सुप्रीम कोर्ट में हलफनामे की सत्यता पर सीधे सवाल उठाना इस विवाद को एक नई गंभीरता देता है।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई में यह तय कर सकता है कि सभी आंतरिक रिकॉर्ड और डिसेंट नोट्स पेश किए जाएँ। कांग्रेस और सहयोगी दलों ने संकेत दिया है कि वे कोर्ट में इस हलफनामे की जाँच की माँग और तेज करेंगे। यह मामला आने वाले दिनों में संसदीय बहस का भी विषय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर उसका खंडन — यह दर्शाता है कि जवाबदेही का तंत्र कमजोर है। मतदाता सूची की शुचिता पर उठते सवाल लोकतंत्र की बुनियाद को प्रभावित करते हैं; इसलिए रिकॉर्ड की पारदर्शी प्रस्तुति ही एकमात्र रास्ता है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग का SIR हलफनामा क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
भारत निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) से जुड़े सभी फैसले तीनों आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए। विपक्ष का कहना है कि यह दावा दो आयुक्तों के डिसेंट नोट्स से विरोधाभासी है, इसलिए हलफनामे की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए।
फॉर्म 6 में बदलाव को लेकर क्या आरोप हैं?
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR के नाम पर फॉर्म 6 में बदलाव कर लाखों मतदाताओं के नाम सूचियों से हटाए गए। पहले आयोग ने इन बदलावों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बताया था, लेकिन CJI ने ऐसे किसी निर्देश से इनकार किया था।
डिसेंट नोट्स क्या होते हैं और ये इस मामले में क्यों अहम हैं?
डिसेंट नोट वह दस्तावेज है जो किसी संस्था का सदस्य तब दर्ज कराता है जब वह बहुमत के फैसले से सहमत न हो। इस मामले में यदि दो चुनाव आयुक्तों ने डिसेंट नोट दर्ज कराए तो आयोग का 'सर्वसम्मति' का दावा कानूनी रूप से कमजोर पड़ता है, और यही कारण है कि विपक्ष इन नोट्स को कोर्ट में पेश करवाना चाहता है।
इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में क्या माँगें रखी हैं?
इंडिया गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में माँग की है कि SIR से जुड़े सभी आंतरिक रिकॉर्ड और डिसेंट नोट्स पेश किए जाएँ। नेताओं ने यह भी माँग की है कि हलफनामे की सत्यता की स्वतंत्र जाँच हो।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सुप्रीम कोर्ट अगली सुनवाई में आयोग से सभी आंतरिक रिकॉर्ड और डिसेंट नोट्स पेश करने का निर्देश दे सकता है। कांग्रेस और सहयोगी दल संसद में भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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