कांग्रेस ने 'वंदे मातरम' को भी बांटा — दिलीप घोष का तीखा हमला, राहुल के ओबीसी बयान पर भी निशाना
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने 21 अगस्त को कोलकाता में कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि पार्टी ने पहले देश को बांटा और अब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को भी बांट दिया है। कांग्रेस के केवल दो पद गाने के रुख, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ओबीसी संबंधी बयान, जादवपुर यूनिवर्सिटी की घटना और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बंगाल दौरे — इन सभी विषयों पर घोष ने अपनी बेबाक राय रखी।
वंदे मातरम विवाद पर घोष का हमला
कांग्रेस द्वारा 'वंदे मातरम' के केवल दो पद गाने पर अड़े रहने को लेकर दिलीप घोष ने कहा, 'कांग्रेस ने देश को बांटा है और अब 'वंदे मातरम' को भी बांट दिया है। उन्होंने समाज में बांटने की राजनीति ला दी, जिसे जनता ने नकार दिया है।' उन्होंने आगे जोड़ा, 'अंग्रेजों से सीखी हुई 'फूट डालो और राज करो' की नीति अब नहीं चलेगी।'
राहुल गांधी के ओबीसी बयान पर पलटवार
गौरतलब है कि हाल ही में राहुल गांधी ने ओबीसी और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरकार ने दबाव में जाति जनगणना पर सहमति तो दी, लेकिन जनगणना प्रक्रिया में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की तरह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग कॉलम नहीं रखा गया।
इस पर दिलीप घोष ने कहा, 'जहाँ-जहाँ उन्होंने ऐसा ज़्यादा किया है, वहाँ हम जीते हैं। उन्होंने कभी लोगों को न्याय या सुविधा नहीं दी, सिर्फ राजनीति की। कांग्रेस आज भी उसी से बाहर नहीं निकल पा रही है।'
जादवपुर यूनिवर्सिटी घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया
जादवपुर यूनिवर्सिटी में हुई घटना को लेकर घोष ने कहा कि वहाँ कुछ समूह सक्रिय हैं जो लगातार देश-विरोधी नारे लगाते हैं और उत्तेजक हरकतें करते हैं। उन्होंने कहा, 'वहाँ इसके पहले राज्यपाल से बदतमीजी की गई थी, वो सबने देखी। उस समय हम लोगों ने वहाँ जाकर प्रोटेस्ट भी किया था। समाज के अंदर, देश के अंदर इस प्रकार की एंटी-नेशनल एक्टिविटी, एंटी-सोशल एक्टिविटी नहीं चलनी चाहिए।'
अमित शाह के बंगाल दौरे का महत्व
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे पर घोष ने कहा कि शाह का बंगाल पर विशेष ध्यान पिछले 10-12 वर्षों से बना हुआ है। उन्होंने कहा, 'यहाँ संगठन बनाना और इसे जीत दिलाना उनकी विशेष प्राथमिकता रही है। बदलाव भी हुआ है लेकिन सबसे संवेदनशील सीमा — बंगाल और बांग्लादेश की सीमा — यहीं पश्चिम बंगाल में है। गृह मंत्री ने हमेशा इस सीमा को सुरक्षित रखने और कानून-व्यवस्था पर नज़र रखी है।'
यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में BJP और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच राजनीतिक तनाव चरम पर है और अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ दोनों दलों में तेज़ हो रही हैं।