मध्य प्रदेश में एमएसपी के तहत गेहूं की खरीदारी की तारीख पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- गेहूं की खरीदी 10 अप्रैल से शुरू होगी।
- कांग्रेस ने तारीख बढ़ाने पर सवाल उठाए हैं।
- डिजिटल भुगतान प्रणाली को मजबूत किया जाएगा।
- किसानों को समय पर उचित मूल्य मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।
- राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
भोपाल, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं की खरीदारी 10 अप्रैल से प्रारंभ होने जा रही है। यह महत्वपूर्ण निर्णय कैबिनेट मंत्रियों की समिति द्वारा लिया गया है। कांग्रेस ने सरकार द्वारा गेहूं खरीदारी की तिथि को तीसरी बार बढ़ाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
राज्य में रबी विपणन वर्ष 2026-27 के तहत गेहूं की खरीद के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस संबंध में सोमवार को कैबिनेट मंत्रियों की समिति की एक उच्च स्तरीय बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई, जिसमें राज्य में गेहूं उपार्जन की व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा की गई।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि कैबिनेट समिति ने यह तय किया है कि इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और भोपाल संभाग में गेहूं की खरीद 10 अप्रैल 2026 से शुरू होगी। अन्य संभागों में उपार्जन कार्य 15 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा।
सरकार ने सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसमें खरीदी केंद्रों की स्थापना, भंडारण क्षमता, परिवहन व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया को सुदृढ़ करना शामिल है। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि बैठक में वैश्विक परिदृश्य, विशेषकर मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न परिस्थितियों पर चर्चा हुई।
समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों से गेहूं की खरीदारी की प्रक्रिया को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संचालित किया जाए, ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इस बात पर भी जोर दिया गया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य समय पर मिले और भुगतान प्रक्रिया में कोई देरी न हो। इसके लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा निगरानी तंत्र को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया कि समय पर और व्यवस्थित गेहूं खरीद से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि प्रदेश में खाद्यान्न प्रबंधन भी मजबूत होगा। इसके साथ ही, बदलते वैश्विक हालातों के मद्देनजर यह कदम राज्य की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव ने राज्य सरकार पर गेहूं उपार्जन की तारीख को तीसरी बार बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अन्नदाताओं की महीनों की मेहनत खुले आसमान के नीचे पड़ी है और सरकार तारीख बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि किसान विरोधी सरकार की संवेदनहीनता का यह उदाहरण है कि पहले 16 मार्च, फिर 1 अप्रैल और अब 10 अप्रैल की तारीख दी गई है।