मानसून सत्र: PM और गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर कांग्रेस का वॉकआउट, सदन ठप
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र में 6 अगस्त को विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच गतिरोध और गहरा हो गया, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) समेत विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति को लेकर कड़ा विरोध जताया और पूरे दिन के लिए वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि जिम्मेदार मंत्रियों की गैरमौजूदगी से सदन का सुचारु संचालन बाधित हो रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सदन के बाहर मीडिया से कहा कि सदन के संचालन के लिए सरकार की गंभीरता अनिवार्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सदन तभी चलेगा जब केंद्रीय गृह मंत्री उपस्थित होंगे, तो क्या वे सुबह 11 बजे नहीं आ सकते? तिवारी ने कहा, 'जिन मंत्रियों को जवाब देना होता है, वे 11 बजे तक आ जाते हैं — पाँच या दस मिनट में हम मौजूद होते हैं। उन्हें देखकर हम सवाल पूछते हैं। इसलिए मेरी नज़र में यह सही नहीं है।' उन्होंने यह भी बताया कि सभापति ने स्वयं निर्देश दिया था कि गृह मंत्री को सदन में बुलाया जाए।
तिवारी ने मंदिर निर्माण और चढ़ावा चोरी से जुड़े आरोपों पर भी प्रधानमंत्री से सीधे जवाब की माँग की। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक प्रधानमंत्री ने ही ट्रस्ट बनाया था और मंदिर के निर्माण में भी शामिल थे, फिर भी वे सदन में नहीं आ रहे। वे इस इमारत में आते हैं, संसद आते हैं, लेकिन सदन में नहीं आते।' इसी कारण विपक्ष ने पूरे दिन के लिए वॉकआउट किया।
सरकार पर चर्चा रोकने का आरोप
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष पहले दिन से चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सरकार ही बहस से बच रही है। उन्होंने कहा, 'चाहे चढ़ावा चोरी का मामला हो या छात्रों पर अत्याचार — वे किसी भी विषय पर चर्चा नहीं करना चाहते। मंत्री खुद नहीं आते और फिर विपक्ष पर दोष मढ़ते हैं।' वेणुगोपाल ने यह भी बताया कि सशस्त्र बलों के वेतन, पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें ऑडिट में गड़बड़ियाँ पाई गई हैं और लोक लेखा समिति (PAC) ने रक्षा मंत्रालय से स्पष्टीकरण माँगा है।
प्रयागराज में छात्र कार्यक्रम रद्द होने पर विरोध
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रयागराज प्रशासन द्वारा छात्रों के 'गूंज' कार्यक्रम की अनुमति रद्द किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आज़ादी होती है। राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी देश में छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। जिस तरह से प्रयागराज प्रशासन ने इजाजत रद्द की, यह उत्तर प्रदेश सरकार का अलोकतांत्रिक चेहरा दिखाता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यक्रम हर हाल में होंगे।
तमिलनाडु सांस्कृतिक विवाद पर कांग्रेस का पत्र
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने बताया कि पार्टी ने तमिलनाडु के राज्यपाल को पत्र लिखकर राज्य में स्थापित परंपरा — सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत 'तमिल थाई वाज्तु' से करने — को बनाए रखने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि राजभवन से इस परंपरागत क्रम को बदलने का निर्देश मिलने की जानकारी मिली थी, जिसके विरोध में यह पत्र लिखा गया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र के शेष दिनों में विधायी कार्यों की लंबी सूची लंबित है। गौरतलब है कि सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। यदि गतिरोध जारी रहा, तो महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान प्रभावित होने की आशंका है। संसदीय कार्यवाही के सामान्य होने की संभावना अब दोनों पक्षों के बीच संवाद पर निर्भर करती है।