दहिसर में पीयूष गोयल ने किया 'सुविधा केंद्र' का उद्घाटन, उत्तर मुंबई की झुग्गियों को मिलेगी स्वच्छता और पेयजल सुविधा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 8 जून 2026 को मुंबई के दहिसर क्षेत्र में एक नए 'सुविधा केंद्र' का उद्घाटन किया। यह केंद्र झुग्गी बस्तियों में रहने वाले नागरिकों को आधुनिक शौचालय, लॉन्ड्री सुविधा और मात्र ₹1 प्रति लीटर की दर पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराएगा। उत्तर मुंबई का यह पहला और इस राष्ट्रव्यापी पहल के तहत देश का 25वाँ सुविधा केंद्र है।
सुविधा केंद्र में क्या-क्या मिलेगा
गोयल ने उद्घाटन समारोह में बताया कि इन केंद्रों में आधुनिक शौचालयों के साथ-साथ लॉन्ड्री सेवा और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की गई है। जल पुनर्चक्रण तकनीक के उपयोग से जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा, 'शौचालय केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की गरिमा और सम्मान से जुड़ा विषय है।'
किसके सहयोग से बने ये केंद्र
यह पहल हिंदुस्तान यूनिलीवर, एचएसबीसी, जेएसडब्ल्यू और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के संयुक्त सहयोग से शुरू की गई है। गौरतलब है कि इस तरह के सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल को शहरी स्वच्छता अभियानों में तेज़ी से अपनाया जा रहा है, जहाँ सरकारी संसाधनों की सीमाओं को कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) से पूरा किया जाता है।
महिलाओं को रोज़गार, अगले तीन वर्षों में 100 और केंद्र
गोयल ने जानकारी दी कि अगले तीन वर्षों में ऐसे 100 और सुविधा केंद्र स्थापित करने की योजना है। इन केंद्रों का संचालन स्थानीय महिलाओं की भागीदारी से होगा, जिससे उन्हें रोज़गार और आत्मनिर्भरता के अवसर मिलेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब शहरी महिला रोज़गार दर को बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
झुग्गी पुनर्विकास तक का सेतु
गोयल ने स्वीकार किया कि झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोग परिस्थितियों और मजबूरियों के कारण वहाँ जीवन बिताते हैं। उन्होंने कहा कि स्लम पुनर्विकास योजनाओं के ज़रिए हर झुग्गीवासी को पक्का और सम्मानजनक घर दिलाना लक्ष्य है, लेकिन जब तक यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं होता, तब तक बेहतर बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना आवश्यक है।
आम जनता पर असर
मुंबई में लाखों लोग अनौपचारिक बस्तियों में रहते हैं, जहाँ स्वच्छता और पेयजल की पहुँच सीमित है। यह केंद्र उन परिवारों के लिए तत्काल राहत का स्रोत बन सकता है जो खुले में शौच या दूषित जल पर निर्भर हैं। केंद्रीय मंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल मुंबई को स्वच्छ, सुविधाजनक और समावेशी शहर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगी।