29 अगस्त 2026
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दक्षिण कोरिया-फ्रांस रक्षा साझेदारी मजबूत, उत्तर कोरिया-रूस सैन्य गठजोड़ पर साझी चिंता

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दक्षिण कोरिया-फ्रांस रक्षा साझेदारी मजबूत, उत्तर कोरिया-रूस सैन्य गठजोड़ पर साझी चिंता

सारांश

पेरिस में हुई उच्चस्तरीय बैठक में दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने उत्तर कोरिया-रूस के गहराते सैन्य गठजोड़ पर साझी चिंता जताई और रक्षा सहयोग के संस्थागत ढाँचे को विस्तार देने पर सहमति बनाई — यह संकेत है कि कोरियाई प्रायद्वीप की सुरक्षा अब यूरोपीय रणनीतिक एजेंडे का हिस्सा बन चुकी है।

मुख्य बातें

दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने 29 अगस्त 2026 को पेरिस में रणनीतिक संवाद आयोजित किया।
उप रक्षा मंत्री किम होंग-चोल और महानिदेशक गिलॉम ओलानिए ने बैठक में भाग लिया।
दोनों देशों ने उत्तर कोरिया-रूस के बढ़ते सैन्य सहयोग पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
गोपनीय सैन्य सूचना-साझाकरण समझौते में संशोधन और संयुक्त सैन्य अभ्यास पर सहमति बनी।
सोल ने पेरिस से उत्तर कोरिया के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व नीति पर निरंतर समर्थन का आग्रह किया।
दक्षिण कोरिया यूरोपीय देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को व्यापक आधार देने की दिशा में सक्रिय है।

दक्षिण कोरिया और फ्रांस ने 29 अगस्त 2026 को पेरिस में आयोजित उच्चस्तरीय रणनीतिक संवाद के दौरान उत्तर कोरिया और रूस के बीच गहराते सैन्य गठजोड़ पर गंभीर चिंता व्यक्त की और द्विपक्षीय रक्षा एवं रणनीतिक समन्वय को और सुदृढ़ करने पर सहमति जताई। दोनों देशों के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने कोरियाई प्रायद्वीप और यूरोप की परस्पर जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

बैठक का विवरण और प्रमुख प्रतिभागी

दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह बैठक शुक्रवार, 29 अगस्त को पेरिस में संपन्न हुई। दक्षिण कोरिया की ओर से नीति मामलों के उप रक्षा मंत्री किम होंग-चोल तथा फ्रांस की ओर से सशस्त्र बल एवं पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय में अंतरराष्ट्रीय संबंध एवं रणनीति के महानिदेशक गिलॉम ओलानिए ने इस संवाद में भाग लिया। दोनों पक्षों ने उत्तर कोरिया के परमाणु एवं मिसाइल खतरों का संयुक्त आकलन साझा किया और इस बात पर जोर दिया कि यूरोप तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

उत्तर कोरिया-रूस गठजोड़ पर साझी चिंता

यह बैठक ऐसे समय में हुई जब उत्तर कोरिया और रूस के सैन्य संबंध कथित तौर पर लगातार गहरे होते जा रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरिया के सैन्य समर्थन की सार्वजनिक रूप से सराहना की है और उत्तर कोरिया द्वारा रूस को हथियार तथा सैन्य सहायता उपलब्ध कराने की खबरें भी सामने आती रही हैं। सोल का मानना है कि रूस से बढ़ते सैन्य एवं तकनीकी संबंध उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब दक्षिण कोरिया ने किसी यूरोपीय भागीदार के साथ इस मुद्दे पर सीधी बातचीत की हो, लेकिन हाल के महीनों में उत्तर कोरिया-रूस सहयोग की कथित गति ने इन चर्चाओं को नई तात्कालिकता दे दी है।

रक्षा सहयोग का संस्थागत विस्तार

दोनों देशों ने रक्षा सहयोग के संस्थागत ढाँचे को मजबूत करने पर भी सहमति जताई। इसके तहत गोपनीय सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़े द्विपक्षीय समझौते में संशोधन की संभावना पर चर्चा हुई। साथ ही, संयुक्त सैन्य अभ्यास और विभिन्न सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर सहमति बनी।

दक्षिण कोरिया ने फ्रांस को उत्तर कोरिया के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अपनी नीति से अवगत कराया और इस दिशा में पेरिस से निरंतर समर्थन बनाए रखने का आग्रह किया।

व्यापक रणनीतिक संदर्भ

दक्षिण कोरिया की फ्रांस के साथ बढ़ती रक्षा साझेदारी को केवल उत्तर कोरिया की चुनौती तक सीमित नहीं देखा जा रहा। यूक्रेन युद्ध और हिंद-प्रशांत में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सोल यूरोपीय देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को व्यापक आधार देने की कोशिश कर रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में भी महत्वपूर्ण है जब दक्षिण कोरिया अमेरिका के साथ उत्तर कोरिया को लेकर घनिष्ठ समन्वय बनाए हुए है और वाशिंगटन-प्योंगयांग के बीच संभावित बातचीत की स्थिति पर भी सक्रिय नज़र रख रहा है।

आगे की राह

सोल का स्पष्ट कहना है कि किसी भी कूटनीतिक वार्ता से उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे पर ठोस प्रगति होनी चाहिए और कोरियाई प्रायद्वीप में दीर्घकालिक शांति व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इस पृष्ठभूमि में दक्षिण कोरिया-फ्रांस रक्षा सहयोग का यह नया अध्याय आने वाले समय में दोनों देशों के बीच और अधिक संस्थागत रूप लेने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इस साझेदारी की असली परीक्षा तब होगी जब गोपनीय सूचना-साझाकरण समझौते और संयुक्त अभ्यास ठोस रूप लेंगे — अभी तक ये केवल सहमति के स्तर पर हैं। वाशिंगटन-प्योंगयांग वार्ता की किसी भी संभावना में सोल की भूमिका और यूरोपीय समर्थन की सीमा, दोनों अभी अनुत्तरित प्रश्न हैं।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बीच पेरिस में क्या बैठक हुई?
29 अगस्त 2026 को पेरिस में दोनों देशों के वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के बीच उच्चस्तरीय रणनीतिक संवाद हुआ, जिसमें उत्तर कोरिया-रूस सैन्य गठजोड़ पर चिंता साझा की गई और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
उत्तर कोरिया और रूस के सैन्य सहयोग से दक्षिण कोरिया को क्यों चिंता है?
सोल का मानना है कि रूस से मिलने वाली सैन्य एवं तकनीकी सहायता उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु क्षमताओं को कथित तौर पर और उन्नत कर सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, उत्तर कोरिया ने यूक्रेन युद्ध में रूस को हथियार और सैन्य सहायता भी उपलब्ध कराई है।
इस बैठक में रक्षा सहयोग के किन पहलुओं पर सहमति बनी?
दोनों देशों ने गोपनीय सैन्य सूचना-साझाकरण समझौते में संशोधन की संभावना, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सैन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों के माध्यम से इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर सहमति जताई।
दक्षिण कोरिया की यूरोपीय देशों के साथ रक्षा साझेदारी का व्यापक उद्देश्य क्या है?
यूक्रेन युद्ध और हिंद-प्रशांत में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच सोल यूरोपीय देशों के साथ सुरक्षा संबंधों को व्यापक आधार देना चाहता है। यह साझेदारी केवल उत्तर कोरिया तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के व्यापक लक्ष्य से जुड़ी है।
उत्तर कोरिया के परमाणु मुद्दे पर दक्षिण कोरिया का क्या रुख है?
सोल का स्पष्ट कहना है कि किसी भी कूटनीतिक वार्ता से उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस प्रगति होनी चाहिए और कोरियाई प्रायद्वीप में दीर्घकालिक शांति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। दक्षिण कोरिया ने फ्रांस से इस नीति पर निरंतर समर्थन बनाए रखने का आग्रह किया है।
राष्ट्र प्रेस
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