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दरियाई घोड़ा: एक अद्भुत जीव जो पानी में सांस लेता है और 3200 किलोग्राम तक का हो सकता है

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दरियाई घोड़ा: एक अद्भुत जीव जो पानी में सांस लेता है और 3200 किलोग्राम तक का हो सकता है

सारांश

जानें दरियाई घोड़े की अद्भुत विशेषताओं के बारे में, जो इसे नदियों के इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती हैं। यह विशाल जीव कैसे पानी में सांस लेता है और क्या हैं इसके संरक्षण के लिए चुनौतियाँ।

मुख्य बातें

दरियाई घोड़ा पानी में सांस ले सकता है।
इसका वजन १३०० से ३२०० किलोग्राम तक हो सकता है।
ये शाकाहारी होते हैं और नदियों के इकोसिस्टम को संतुलित रखते हैं।
इनका संरक्षण इकोसिस्टम के लिए आवश्यक है।
आईयूसीएन में इनकी स्थिति 'सुभेद्य' है।

नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। धरती पर कई अद्भुत जीव-जंतु मौजूद हैं, जिनकी शारीरिक विशेषताएँ और ताकत चौंकाने वाली होती हैं। इनमें से एक है दरियाई घोड़ा या हिप्पोपोटामस, जो पानी में डूबकर भी आसानी से सांस ले सकता है। ये शाकाहारी जीव होते हैं और इनका वजन १३०० से लेकर ३२०० किलोग्राम तक हो सकता है।

बिहार सरकार के वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, ये जीव नदियों के इकोसिस्टम को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। मूल रूप से अफ्रीकी महाद्वीप से संबंधित होने के बावजूद, पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना चिड़ियाघर) में इन्हें देखा जा सकता है, जहाँ ये पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करते हैं।

दरियाई घोड़े का नाम ग्रीक शब्द 'रिवर हॉर्स' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'जल का घोड़ा', लेकिन इनका घोड़ों से कोई संबंध नहीं है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ये सूअरों के दूर के रिश्तेदार हैं। ये शाकाहारी जीव नदियों और झीलों के किनारे समूह में निवास करते हैं। ये दुनिया के दूसरे सबसे भारी ज़मीन पर रहने वाले स्तनधारी माने जाते हैं, जिनकी लंबाई १४ फीट, ऊँचाई ५ फीट और वजन लगभग ३२०० किलोग्राम तक हो सकता है। इनका मजबूत शरीर छोटे-ठिगने पैरों पर टिका होता है, जिनके सिरे पर चौड़े नाखून होते हैं।

एक खास बात यह है कि इसके आँखें, कान और नाक सिर के ऊपरी भाग पर होते हैं, जिससे ये पानी में डूबे रहने पर भी बाहर निकलते रहते हैं। इससे ये पानी में रहते हुए भी सांस लेना, देखना और सुनना संभव बनाते हैं। जब ये पूरी तरह डूब जाते हैं, तो उनकी नाक और कान अपने आप बंद हो जाते हैं ताकि पानी अंदर न जाए। ये शाम के समय पानी से बाहर निकलते हैं और घास चरते हैं। जानकारी के अनुसार, ये एक रात में ५० किलोग्राम से ज्यादा घास खा सकते हैं और सूर्योदय से पहले वापस पानी में लौट जाते हैं ताकि धूप से बच सकें। आवश्यकता पड़ने पर ये ४८ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकते हैं।

दरियाई घोड़ों की चमड़ी बहुत सख्त होती है, जो समय के साथ मजबूत हो जाती है। पुराने समय में इसका उपयोग हीरा चमकाने में किया जाता था। चमड़ी के नीचे मोटी चर्बी की परत होती है, जो गुलाबी तैलीय तरल निकालती है और चमड़ी को नम और स्वस्थ रखती है। इनकी शरीर पर बाल बहुत कम होते हैं।

इन जानवरों को कई खतरे हैं, जैसे आवास का नुकसान, सूखा, अवैध शिकार और दांत, खाल, खोपड़ी, मांस की अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण ये संकट में हैं। आईयूसीएन की रेड लिस्ट में सामान्य दरियाई घोड़ा 'सुभेद्य' श्रेणी में रखा गया है। इसके मुख्य कारण आवास हानि, पानी की कमी और शिकार हैं। वहीं, छोटा दरियाई घोड़ा 'लुप्तप्राय' श्रेणी में है, जिसकी संख्या तेजी से घट रही है।

आईयूसीएन के हिप्पो स्पेशलिस्ट ग्रुप के अनुसार, दोनों प्रजातियों के संरक्षण के लिए अलग-अलग चुनौतियाँ हैं। पिग्मी हिप्पो के लिए आवास हानि और मानवीय गतिविधियाँ मुख्य खतरा हैं, लक्ष्य गिरावट रोकना और आवास संरक्षण बढ़ाना है। दरियाई घोड़े नदियों में घास खाकर पानी को साफ रखते हैं और मछलियों के लिए स्थान बनाते हैं, इसलिए इनका संरक्षण इकोसिस्टम के लिए आवश्यक है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो नदियों के इकोसिस्टम को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके संरक्षण के लिए हमें जागरूकता और प्रयासों की आवश्यकता है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दरियाई घोड़ा किस प्रकार का जीव है?
दरियाई घोड़ा एक शाकाहारी स्तनधारी है, जो पानी में डूबकर भी सांस ले सकता है।
दरियाई घोड़े का वजन कितना होता है?
दरियाई घोड़े का वजन 1300 से 3200 किलोग्राम तक हो सकता है।
दरियाई घोड़े का संरक्षण क्यों आवश्यक है?
दरियाई घोड़े का संरक्षण इकोसिस्टम के लिए जरूरी है, क्योंकि यह पानी को साफ रखने में मदद करता है।
दरियाई घोड़ा कहाँ पाया जाता है?
दरियाई घोड़ा मुख्य रूप से अफ्रीकी महाद्वीप पर पाया जाता है, लेकिन इसे चिड़ियाघरों में भी देखा जा सकता है।
क्या दरियाई घोड़े की त्वचा का उपयोग होता है?
हाँ, इसके चमड़े का उपयोग पुराने समय में हीरा चमकाने के लिए किया जाता था।
राष्ट्र प्रेस
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