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अभिनव गुप्त जयंती: भैरव गुफा बीरवाह में कश्मीरी पंडितों और धर्मगुरुओं का आस्था-संगम

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अभिनव गुप्त जयंती: भैरव गुफा बीरवाह में कश्मीरी पंडितों और धर्मगुरुओं का आस्था-संगम

सारांश

हज़ारों साल पुरानी भैरव गुफा में एक बार फिर आस्था और एकता की लौ जली — जब कश्मीरी पंडित, श्रद्धालु और मुस्लिम धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ एक साथ आचार्य अभिनव गुप्त को नमन करने पहुँचे। यह आयोजन केवल जयंती नहीं, कश्मीर की साझा तहज़ीब की वापसी का संकेत है।

मुख्य बातें

25 जून को बीरवाह, बडगाम की भैरव गुफा में आचार्य अभिनव गुप्त की जयंती पर कश्मीरी पंडितों और श्रद्धालुओं का बड़ा जमावड़ा हुआ।
धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ ने सांप्रदायिक सद्भाव और इंसानी भाईचारे का आह्वान किया।
लतीफ ने कश्मीरी पंडित समुदाय से जल्द से जल्द कश्मीर लौटने की अपील की।
श्रद्धालुओं ने भैरव गुफा में सुरक्षा और सम्मान का माहौल बताया, बिना किसी भय के माथा टेका।
आचार्य अभिनव गुप्त दसवीं-ग्यारहवीं सदी के महान कश्मीरी दार्शनिक थे जिनकी साधना-स्थली यही गुफा मानी जाती है।

बडगाम जिले के बीरवाह स्थित ऐतिहासिक भैरव गुफा में 25 जून को दार्शनिक आचार्य अभिनव गुप्त की जयंती के अवसर पर कश्मीरी पंडितों, श्रद्धालुओं और धर्मगुरुओं का अभूतपूर्व जमावड़ा देखा गया। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लोग इस पवित्र स्थल पर माथा टेकने और प्रार्थना करने पहुँचे, जहाँ कश्मीर शैववाद के महान प्रणेता ने कभी गहन ध्यान साधना की थी।

मुख्य घटनाक्रम

गुरुवार को भैरव गुफा, बीरवाह में जुटे श्रद्धालुओं ने आचार्य अभिनव गुप्त के कश्मीर शैववाद और आध्यात्मिक चिंतन पर पड़े स्थायी प्रभाव को नमन किया। वहाँ पहुँचे एक श्रद्धालु ने बताया कि अभिनव गुप्त की जयंती पर भैरव गुफा में आना एक अत्यंत रूहानी अनुभव है। उन्होंने कहा कि यहाँ आने वाले लोगों की संख्या अपेक्षा से कहीं अधिक थी — नौजवान और बुजुर्ग, सभी इस अवसर पर एकत्र हुए।

श्रद्धालुओं का अनुभव

एक अन्य श्रद्धालु ने कहा कि जिस गुफा में अभिनव गुप्त ने ध्यान लगाया था, वहाँ पहुँचकर उसी दिव्य ऊर्जा का अहसास होता है। उन्होंने भावुक होकर बताया कि हज़ारों वर्षों बाद उन्हीं रास्तों से चलकर इस पवित्र स्थल तक पहुँचना और माथा टेकना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे कश्मीर के लिए एक आशीर्वाद है। एक महिला श्रद्धालु ने भी यहाँ की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि अब उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं है और उन्हें पर्याप्त सम्मान मिलता है। उन्होंने अन्य लोगों से भी इस स्थल पर आने की अपील की।

सांप्रदायिक सद्भाव का संदेश

इस अवसर पर गुफा पहुँचे धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ ने सांप्रदायिक सद्भाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग धर्म, जाति और विचारधारा के लोगों को प्रेम और सौहार्द के साथ मिलकर रहना चाहिए। लतीफ ने इस्लाम के मानवीय भाईचारे के संदेश को रेखांकित करते हुए कहा कि वह बेहतर इंसान है जो दूसरों के काम आए।

पंडित समुदाय की वापसी की अपील

सैयद अब्दुल लतीफ ने विशेष रूप से कश्मीरी पंडित समुदाय से अपील की कि वे जल्द से जल्द कश्मीर लौटें ताकि घाटी की साझा तहज़ीब और सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया जा सके। यह भावना इस आयोजन की उस व्यापक पृष्ठभूमि को दर्शाती है जिसमें कश्मीर की बहुलतावादी परंपरा को फिर से स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

आचार्य अभिनव गुप्त का महत्त्व

आचार्य अभिनव गुप्त दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के महान कश्मीरी दार्शनिक, रहस्यवादी और तंत्र-शास्त्र के प्रकांड विद्वान थे। उनकी रचनाएँ — विशेषतः 'तंत्रालोक' और 'अभिनवभारती' — आज भी भारतीय दर्शन और सौंदर्यशास्त्र की नींव मानी जाती हैं। भैरव गुफा, बीरवाह वह स्थान माना जाता है जहाँ उन्होंने अपने जीवन के अंतिम काल में ध्यान-साधना की थी और जहाँ से वे कथित तौर पर अपने शिष्यों सहित अदृश्य हो गए थे। यह स्थल कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र बिंदु है और अब सांप्रदायिक एकता का प्रतीक भी बनता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह भावना नीतिगत स्तर पर ठोस पहल में बदलती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि महिला श्रद्धालुओं ने 'अब डर नहीं' जैसी बात कही — जो घाटी में बदलाव का संकेत तो है, पर साथ ही यह याद दिलाता है कि यह सामान्यता अभी भी नाज़ुक है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आचार्य अभिनव गुप्त कौन थे और भैरव गुफा से उनका क्या संबंध है?
आचार्य अभिनव गुप्त दसवीं-ग्यारहवीं शताब्दी के महान कश्मीरी दार्शनिक, तंत्र-शास्त्री और सौंदर्यशास्त्री थे, जिन्होंने 'तंत्रालोक' जैसी अमर कृतियाँ रचीं। बीरवाह, बडगाम की भैरव गुफा वह स्थान मानी जाती है जहाँ उन्होंने अंतिम काल में ध्यान-साधना की थी।
25 जून को भैरव गुफा में क्या हुआ?
25 जून को आचार्य अभिनव गुप्त की जयंती पर कश्मीरी पंडित, श्रद्धालु और मुस्लिम धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ भैरव गुफा, बीरवाह में एकत्र हुए और प्रार्थना व श्रद्धांजलि अर्पित की। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक बड़ी संख्या में लोग पहुँचे।
धर्मगुरु सैयद अब्दुल लतीफ ने इस अवसर पर क्या कहा?
सैयद अब्दुल लतीफ ने सांप्रदायिक सद्भाव और इंसानी भाईचारे का संदेश दिया। उन्होंने कश्मीरी पंडित समुदाय से जल्द से जल्द कश्मीर लौटने की अपील की ताकि घाटी की साझा सांस्कृतिक विरासत पुनर्जीवित हो सके।
कश्मीरी पंडितों के लिए भैरव गुफा का क्या महत्त्व है?
भैरव गुफा, बीरवाह कश्मीरी पंडितों की गहरी आस्था का केंद्र है क्योंकि यह आचार्य अभिनव गुप्त की साधना-स्थली मानी जाती है। श्रद्धालुओं के अनुसार यहाँ आकर उन्हें एक विशेष दिव्य ऊर्जा का अनुभव होता है।
इस आयोजन में सुरक्षा और माहौल कैसा था?
वहाँ पहुँची महिला श्रद्धालुओं ने बताया कि भैरव गुफा में अब किसी प्रकार का भय नहीं है और उन्हें पूरा सम्मान मिलता है। उन्होंने व्यवस्था की सराहना करते हुए अन्य लोगों को भी यहाँ आने के लिए प्रोत्साहित किया।
राष्ट्र प्रेस
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