डेविस कप क्वालिफायर्स राउंड 2: भारत-साउथ कोरिया भिड़ंत 18-19 सितंबर को सोल में, 'फाइनल 8' की राह दांव पर
सारांश
मुख्य बातें
डेविस कप क्वालिफायर्स के दूसरे राउंड में भारत का सामना 18-19 सितंबर को साउथ कोरिया से होगा। यह मुकाबला सोल के ओलंपिक टेनिस सेंटर में हार्ड कोर्ट पर खेला जाएगा, जहाँ जीतने वाली टीम सीधे नवंबर में होने वाले प्रतिष्ठित 'फाइनल 8' में जगह बनाएगी। यह भारत के लिए मौजूदा क्वालिफाइंग फॉर्मेट के तहत अब तक का सबसे बड़ा मौका है।
दोनों टीमों की मौजूदा स्थिति
डेविस कप रैंकिंग में दोनों टीमें एक-दूसरे के बेहद करीब हैं — साउथ कोरिया इस समय 16वें स्थान पर है, जबकि भारत 19वें पायदान पर। 'हेड-टू-हेड' रिकॉर्ड में कोरियाई टीम 6-5 से आगे है, जो इस टकराव को और कड़ा बनाता है। भारत अपनी टीम का चयन 10 अगस्त को करेगा।
हार्ड कोर्ट: भारत के लिए चुनौती
कोर्ट की सतह इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकती है। साउथ कोरियाई खिलाड़ी आमतौर पर हार्ड कोर्ट पर अधिक सहज माने जाते हैं। गौरतलब है कि 2016 में चंडीगढ़ में जब दोनों टीमें भिड़ी थीं, तो भारत ने ग्रास कोर्ट चुना था और एशिया/ओशिनिया ग्रुप-वन मुकाबला 4-1 से जीता था। इस बार परिस्थितियाँ पूरी तरह अलग हैं — मेज़बानी साउथ कोरिया के पास है और सतह भी उनके अनुकूल।
भारत का सफर: बेंगलुरु से सोल तक
भारत ने फरवरी में बेंगलुरु में नीदरलैंड्स को 3-2 से हराकर इस दौर में प्रवेश किया था। उस मैच में दक्षिणेश्वर सुरेश ने दोनों सिंगल्स मुकाबले जीते और युकी भांबरी के साथ मिलकर डबल्स में भी सफलता दिलाई। निर्णायक पाँचवें मैच में सुरेश ने गाइ डेन ओडेन को 6-4, 7-6(4) से पराजित कर भारत की जीत सुनिश्चित की। यह 2019 में शुरू हुए मौजूदा फॉर्मेट के तहत भारत की पहली बार दूसरे राउंड में एंट्री थी।
साउथ कोरिया का दमदार प्रदर्शन
साउथ कोरिया ने पहले राउंड में बुसान में 2016 की चैंपियन अर्जेंटीना को 3-2 से हराकर बड़ा उलटफेर किया। इस जीत में क्वोन सूनवू की भूमिका अहम रही, जो उस समय अपनी मिलिट्री सर्विस पर थे और फिर भी मज़बूत दक्षिण अमेरिकी टीम के खिलाफ कोरिया की वापसी में सहायक बने। उल्लेखनीय है कि साउथ कोरिया 2022 और 2023 में डेविस कप फाइनल्स के 16-टीम संस्करण के लिए क्वालीफाई कर चुका है।
आगे क्या होगा
सोल में होने वाला यह मुकाबला सही मायनों में 'करो या मरो' वाला है। जीतने वाली टीम नवंबर में होने वाले डेविस कप 'फाइनल 8' में पहुँचेगी और दुनिया की शीर्ष-8 टीमों में शामिल होगी। भारत के लिए यह मौका मौजूदा क्वालिफाइंग प्रणाली के तहत हालिया गति को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदलने का है।