किंग आइलैंड पर 28 पेंगुइन मृत, ऑस्ट्रेलिया में एच5एन1 बर्ड फ्लू जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया राज्य के निकट स्थित किंग आइलैंड पर 28 पेंगुइन और तीन ग्रेटर क्रेस्टेड टर्न पक्षी मृत पाए गए हैं। तस्मानिया के प्राकृतिक संसाधन और पर्यावरण विभाग ने 20 अगस्त को पुष्टि की कि इन पक्षियों के नमूने एच5एन1 एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस की जांच के लिए भेज दिए गए हैं। यह द्वीप तस्मानिया के उत्तर-पश्चिमी तट से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित है।
मुख्य घटनाक्रम
निगरानी दलों ने बुधवार, 19 अगस्त को किंग आइलैंड पर इन पक्षियों के शव खोजे। घटना नियंत्रण अधिकारी वेस फोर्ड ने बताया कि मृत पक्षियों को गुरुवार को वहाँ से हटाया गया, ताकि संक्रमण के प्रसार का खतरा कम किया जा सके। फोर्ड के अनुसार, 20 अगस्त तक तस्मानिया में एच5एन1 के 11 मामलों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है, और ये सभी मामले राज्य के उत्तर-पश्चिमी इलाके या किंग आइलैंड में सामने आए हैं।
तस्मानिया और ऑस्ट्रेलिया में वायरस का प्रसार
तस्मानिया में एच5एन1 का पहला मामला 13 अगस्त को दर्ज किया गया था। इससे करीब दो महीने पहले, जून में, ऑस्ट्रेलिया की मुख्य भूमि पर इस वायरस की पहली बार पुष्टि हुई थी। ऑस्ट्रेलिया के संघीय कृषि, मत्स्य और वानिकी विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 18 अगस्त तक देशभर के वन्यजीवों में एच5एन1 के 262 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि अब तक पोल्ट्री फार्मों या कृषि क्षेत्र में इस वायरस का कोई मामला सामने नहीं आया है।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया और अपील
वेस फोर्ड ने कहा, 'तस्मानिया के लोग यहाँ के वन्यजीवों, खासकर पेंगुइन, की बहुत परवाह करते हैं। इसलिए ऐसी खबरें समुदाय के लिए दुखद और परेशान करने वाली हो सकती हैं।' उन्होंने यह भी चेताया कि आने वाले दिनों में किंग आइलैंड, उत्तर-पश्चिमी तट और तस्मानिया के अन्य हिस्सों से बीमार और मृत पक्षियों की और रिपोर्टें आने की आशंका है।
आम जनता के लिए सावधानियाँ
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी बिल्लियों को घर के अंदर रखें और कुत्तों को पट्टे पर ही बाहर ले जाएँ, ताकि पालतू जानवरों के संक्रमित होने का खतरा कम हो। साथ ही नागरिकों को बीमार या मृत जानवरों के संपर्क से बचने की सख्त सलाह दी गई है।
क्या होगा आगे
प्रयोगशाला परिणामों के आधार पर तस्मानिया के प्राकृतिक संसाधन विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। वन्यजीव विशेषज्ञों की नज़र इस बात पर है कि क्या वायरस पोल्ट्री क्षेत्र तक पहुँचता है, जो ऑस्ट्रेलिया की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा होगा।