7 नवंबर 2026
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10वें दीपोत्सव में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं — प्रभु श्रीराम का जीवन संदेश: कर्तव्य सत्ता से और चरित्र वैभव से बड़ा

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10वें दीपोत्सव में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल बोलीं — प्रभु श्रीराम का जीवन संदेश: कर्तव्य सत्ता से और चरित्र वैभव से बड़ा

सारांश

अयोध्या के 10वें दीपोत्सव में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने श्रीराम के जीवन से कर्तव्य, चरित्र और लोक कल्याण का संदेश दिया। सरयू तट पर हजारों दीपों के बीच प्रतीकात्मक राज्याभिषेक हुआ और 'आलोकित अयोध्या' की परिकल्पना साकार हुई।

मुख्य बातें

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 7 नवंबर 2026 को अयोध्या के रामकथा पार्क में 10वें दीपोत्सव को संबोधित किया।
उन्होंने कहा — 'सत्ता से बड़ा कर्तव्य, अधिकार से बड़ा दायित्व और वैभव से बड़ा चरित्र है' — यही प्रभु श्रीराम का जीवन संदेश है।
समारोह में प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से श्रीराम का आगमन, भरत मिलाप और प्रतीकात्मक राज्याभिषेक संपन्न हुआ।
राज्यपाल ने बताया कि विगत 10-12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना ऐतिहासिक उपलब्धि है।
उन्होंने 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और चंद्रयान-3 की सफलता का उल्लेख करते हुए आत्मनिर्भर भारत की प्रगति रेखांकित की।
सरयू की निर्मलता और पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वच्छता, जल संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 7 नवंबर 2026 को अयोध्या के रामकथा पार्क में आयोजित 10वें दीपोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन यह शाश्वत संदेश देता है — सत्ता से बड़ा कर्तव्य है, अधिकार से बड़ा दायित्व है और वैभव से बड़ा चरित्र है। उन्होंने कहा कि राम केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार, एक संस्कार और भारत की आत्मा हैं।

समारोह का स्वरूप और आयोजन

सरयू नदी के पावन तट पर असंख्य दीपों की स्वर्णिम आभा के बीच 'आलोकित अयोध्या-अलौकिक अयोध्या' की परिकल्पना साकार होती दिखी। रामकथा पार्क में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम, माता सीता एवं अनुज लक्ष्मण का प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से अयोध्या आगमन हुआ।

भावपूर्ण 'भरत मिलाप' के पश्चात विधि-विधान से पूजन-अर्चन और आरती-वंदन किया गया। त्रेतायुग की स्मृतियों को ताज़ा करते हुए प्रभु श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी संपन्न हुआ, जिसके साक्षी हजारों श्रद्धालु बने।

रामराज्य की अवधारणा और सामाजिक संदेश

राज्यपाल पटेल ने कहा कि रामराज्य की परिकल्पना केवल शासन व्यवस्था का आदर्श नहीं, बल्कि न्याय, समानता, संवेदना और लोक कल्याण पर आधारित समाज की स्थापना का संकल्प है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास का स्मरण करते हुए कहा कि उनके महाकाव्यों ने श्रीराम के चरित्र और आदर्शों को जन-जन और घर-घर तक पहुँचाया।

राज्यपाल ने युवाओं से भगवान श्रीराम के जीवन से अनुशासन, नेतृत्व, धैर्य और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया।

अयोध्या का विकास और रोज़गार के अवसर

राज्यपाल ने कहा कि अयोध्या आज अपनी प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक विकास की नई ऊँचाइयों से जोड़ रही है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की निरंतर बढ़ती संख्या से होटल, धर्मशाला, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प, फूल-माला और स्थानीय उत्पादों से जुड़े हजारों परिवारों के लिए रोज़गार के असीमित अवसर सृजित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि अयोध्या की रामलीला, लोककला, संगीत और पारंपरिक खानपान को अब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। साथ ही उन्होंने सरयू नदी की निर्मलता और पर्यावरण सुरक्षा पर विशेष जोर देते हुए नागरिकों से स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक पहचान

राज्यपाल ने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता, आदित्य-एल1, स्पेस डॉकिंग तकनीक और 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप्स ने दुनिया को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवा दिया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विगत 10-12 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालना भारत की एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये योजनाएँ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में सुख, सुरक्षा और सम्मान का प्रकाश पहुँचाने के लिए कार्यरत हैं।

सामाजिक संकल्प और दीपावली का वास्तविक संदेश

राज्यपाल पटेल ने उपस्थित जनसमूह को संकल्प दिलाया कि किसी गरीब बच्चे की शिक्षा का दीप नहीं बुझने दिया जाएगा, किसी बेटी के सपनों को सीमित नहीं होने दिया जाएगा और किसी बुजुर्ग को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी खुशियों की रोशनी से दूसरों के जीवन में आशा का संचार करना ही दीपावली का वास्तविक संदेश है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उनकी स्वतंत्र सत्यापन की माँग समय-समय पर उठती रही है। अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण निर्विवाद रूप से जारी है, लेकिन पर्यटन-आधारित रोज़गार की स्थिरता और स्थानीय समुदायों तक उसकी वास्तविक पहुँच जैसे प्रश्न मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनुत्तरित रह जाते हैं।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या का 10वाँ दीपोत्सव कब और कहाँ आयोजित हुआ?
10वाँ दीपोत्सव 7 नवंबर 2026 को अयोध्या के रामकथा पार्क में आयोजित हुआ। सरयू नदी के तट पर हजारों दीप जलाए गए और प्रतीकात्मक राज्याभिषेक सहित कई सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दीपोत्सव में क्या मुख्य संदेश दिया?
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सिखाता है कि सत्ता से बड़ा कर्तव्य, अधिकार से बड़ा दायित्व और वैभव से बड़ा चरित्र है। उन्होंने युवाओं से श्रीराम के जीवन से अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सीखने का आह्वान किया।
10वें दीपोत्सव में कौन-से प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए?
समारोह में प्रतीकात्मक पुष्पक विमान से श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का अयोध्या आगमन, भावपूर्ण भरत मिलाप, विधि-विधान से पूजन-अर्चन और प्रतीकात्मक राज्याभिषेक संपन्न हुआ। इसके साक्षी हजारों श्रद्धालु बने।
राज्यपाल ने अयोध्या के विकास के बारे में क्या कहा?
राज्यपाल पटेल ने कहा कि अयोध्या अपनी प्राचीन आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक विकास से जोड़ रही है। बढ़ते पर्यटन से होटल, हस्तशिल्प, परिवहन और स्थानीय उत्पादों से जुड़े हजारों परिवारों को रोज़गार मिल रहा है, और अयोध्या की लोककला व रामलीला को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है।
राज्यपाल ने पर्यावरण संरक्षण पर क्या कहा?
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सरयू नदी की निर्मलता बनाए रखने पर जोर देते हुए नागरिकों से स्वच्छता, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि दीपोत्सव की सार्थकता तभी है जब दीपों का प्रकाश प्रकृति के संरक्षण का माध्यम भी बने।
राष्ट्र प्रेस
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