21 अक्टूबर 2026
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दिल्ली ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 ड्राफ्ट जारी: 2.5 लाख की कैपिंग, 90 दिन में अनिवार्य होंगे ECC और लाइसेंस

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दिल्ली ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 ड्राफ्ट जारी: 2.5 लाख की कैपिंग, 90 दिन में अनिवार्य होंगे ECC और लाइसेंस

सारांश

दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट जारी किया — राजधानी में 2.5 लाख ई-रिक्शा की सीमा और 90 दिन में ECC, लाइसेंस व फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह के मुताबिक, एक महीने के सार्वजनिक परामर्श के बाद अंतिम पॉलिसी लागू होगी।

मुख्य बातें

दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट 21 अक्टूबर 2026 को सार्वजनिक डोमेन में जारी किया।
दिल्ली में ई-रिक्शा की कुल संख्या 2.5 लाख तक सीमित रखने का प्रस्ताव।
पॉलिसी लागू होने के बाद चालकों को 90 दिनों के भीतर ECC (अनुपालन प्रमाणपत्र) , बैज, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट प्राप्त करने होंगे।
निर्धारित समय-सीमा के बाद बिना प्रमाणपत्र के चलने वाले ई-रिक्शा जब्त किए जाएंगे।
सार्वजनिक सुझावों के लिए एक महीने का परामर्श काल तय; इसके बाद अंतिम पॉलिसी अधिसूचित होगी।
पॉलिसी में यात्री-क्षमता और अधिकतम गति से संबंधित स्पष्ट नियम भी शामिल।

दिल्ली सरकार ने ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 का ड्राफ्ट सार्वजनिक डोमेन में जारी कर दिया है, जिसके तहत राजधानी में ई-रिक्शा की कुल संख्या 2.5 लाख तक सीमित रखने का प्रस्ताव है और पॉलिसी लागू होने के बाद चालकों को 90 दिनों के भीतर अनिवार्य प्रमाणपत्र प्राप्त करने होंगे। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट पर अगले एक महीने तक सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे, जिसके बाद अंतिम पॉलिसी अधिसूचित की जाएगी।

पॉलिसी में क्या है खास

प्रस्तावित नीति के अनुसार, दिल्ली में प्रत्येक ई-रिक्शा के लिए ईसीसी (अनुपालन प्रमाणपत्र / ECC), बैज, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होंगे। इनमें से कोई भी दस्तावेज़ न होने पर ई-रिक्शा चलाना प्रतिबंधित रहेगा।

मंत्री पंकज सिंह ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित 90 दिन की समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई ई-रिक्शा बिना जरूरी कागज़ात के चलता पाया गया, तो उसे जब्त कर लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त पॉलिसी में यात्री-क्षमता और वाहन की अधिकतम गति को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

पंकज सिंह ने कहा कि यह पॉलिसी किसी दुर्घटना की प्रतिक्रिया में नहीं, बल्कि दिल्ली की परिवहन ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। उनके अनुसार, ई-रिक्शा शहर के अंदरूनी इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी का महत्वपूर्ण साधन हैं और सरकार चाहती है कि इनका उपयोग व्यवस्थित हो — जिससे ट्रैफिक जाम में कमी आए और आम नागरिकों को बेहतर सुविधा मिले।

गौरतलब है कि दिल्ली में ई-रिक्शा की बेतरतीब बढ़त और मानकों के अभाव की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। 2.5 लाख की कैपिंग का प्रस्ताव इसी संदर्भ में एक ठोस नियामक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

सार्वजनिक सुझाव प्रक्रिया

ड्राफ्ट पॉलिसी अभी अंतिम नहीं है — सरकार ने इसे सार्वजनिक डोमेन में रखकर एक महीने का परामर्श काल तय किया है। इस दौरान ई-रिक्शा चालक संघ, यात्री समूह और नागरिक अपनी राय दे सकते हैं। प्राप्त सुझावों के आधार पर अंतिम पॉलिसी तैयार की जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली सरकार शहरी परिवहन के विभिन्न स्तरों पर नियमन को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। सार्वजनिक परामर्श की यह प्रक्रिया नीति को व्यापक स्वीकार्यता दिलाने की कोशिश मानी जा रही है।

राजनीतिक माहौल

पॉलिसी की घोषणा के साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाओं को लेकर सरकार पर निशाना साधा। पंकज सिंह ने इसका जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस काम नहीं है, इसलिए वह ऐसे मुद्दों पर राजनीति करता है। मंत्री ने कहा कि फॉल्स सीलिंग का मामला साधारण मरम्मत का था, जो की जा रही है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर भी आप पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार के मोहल्ला क्लीनिकों की तुलना वर्तमान सरकार के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से नहीं की जा सकती, जहाँ बड़ी संख्या में मरीज़ उपचार करवा रहे हैं।

आगे क्या होगा

एक महीने के सार्वजनिक परामर्श के बाद सरकार अंतिम पॉलिसी अधिसूचित करेगी। पॉलिसी लागू होते ही मौजूदा ई-रिक्शा चालकों को प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए 90 दिन का समय मिलेगा। इस नीति का क्रियान्वयन दिल्ली के लाखों ई-रिक्शा चालकों और उन पर निर्भर यात्रियों — विशेषकर अंतिम-मील कनेक्टिविटी के लिए — के लिए निर्णायक साबित होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्रियान्वयन की चुनौती असली परीक्षा होगी — शहर में अनुमानित लाखों अनौपचारिक चालकों को 90 दिन में औपचारिक दस्तावेज़ी प्रक्रिया से गुज़ारना प्रशासनिक क्षमता की सीमाओं को परखेगा। 2.5 लाख की कैपिंग से उन हज़ारों चालकों का क्या होगा जो इस सीमा से बाहर रह जाएंगे, इसका ड्राफ्ट में कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है। सार्वजनिक परामर्श का एक महीना तभी सार्थक होगा जब चालक संघों की राय को नीति में वास्तविक जगह मिले, न कि यह महज औपचारिकता बने। यह पॉलिसी अंतिम-मील कनेक्टिविटी की रीढ़ को नियमित करने का अवसर है — बशर्ते कार्यान्वयन समावेशी हो।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 क्या है?
यह दिल्ली सरकार की प्रस्तावित नीति है जिसका ड्राफ्ट 21 अक्टूबर 2026 को जारी किया गया। इसके तहत राजधानी में ई-रिक्शा की संख्या 2.5 लाख तक सीमित रखने, तथा ECC, बैज, ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
ई-रिक्शा चालकों को प्रमाणपत्र बनवाने के लिए कितना समय मिलेगा?
पॉलिसी लागू होने की तारीख से 90 दिनों के भीतर सभी मौजूदा ई-रिक्शा चालकों को जरूरी प्रमाणपत्र प्राप्त करने होंगे। इस अवधि के बाद बिना दस्तावेज़ के चलने वाले ई-रिक्शा जब्त किए जाएंगे।
पॉलिसी कब लागू होगी?
ड्राफ्ट पॉलिसी अभी सार्वजनिक सुझावों के लिए एक महीने के लिए खुली है। इस परामर्श अवधि के बाद प्राप्त राय के आधार पर अंतिम पॉलिसी तैयार और अधिसूचित की जाएगी — सटीक तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
ECC (अनुपालन प्रमाणपत्र) क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
ECC यानी अनुपालन प्रमाणपत्र यह प्रमाणित करता है कि संबंधित ई-रिक्शा निर्धारित सुरक्षा और परिचालन मानकों को पूरा करता है। दिल्ली ई-रिक्शा पॉलिसी 2026 के तहत यह ड्राइविंग लाइसेंस, बैज और फिटनेस सर्टिफिकेट के साथ अनिवार्य किया जाएगा।
दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या 2.5 लाख तक सीमित क्यों की जा रही है?
सरकार के अनुसार, यह कदम शहर की परिवहन व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने, ट्रैफिक जाम कम करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री पंकज सिंह ने स्पष्ट किया कि यह किसी दुर्घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि नियोजित नियामक सुधार है।
राष्ट्र प्रेस
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