11 जुलाई 2026
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दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट तोड़ा, MCA डिग्रीधारी अंशुल यादव इटावा से गिरफ्तार

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दिल्ली साइबर पुलिस ने फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट तोड़ा, MCA डिग्रीधारी अंशुल यादव इटावा से गिरफ्तार

सारांश

दिल्ली साइबर पुलिस ने उस रैकेट को तोड़ा जो असली सरकारी ट्रांसपोर्ट पोर्टल की नकली वेबसाइट बनाकर देशभर के नागरिकों को ठग रहा था। MCA डिग्रीधारी अंशुल यादव, जो वेबसाइट बनाकर साइबर ठगों को बेचता था, इटावा से गिरफ्तार; 2 लैपटॉप, सोर्स फाइल्स और डोमेन दस्तावेज बरामद।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने 26 मई 2026 को फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट का भंडाफोड़ किया।
MCA डिग्रीधारी अंशुल यादव को उत्तर प्रदेश के इटावा से गिरफ्तार किया गया।
आरोपी ने ' परिवहन डॉट ऑनलाइन ' नाम की फर्जी वेबसाइट बनाई, जो असली सरकारी ट्रांसपोर्ट पोर्टल जैसी दिखती थी।
एक पीड़ित से ₹1,099 की प्रारंभिक ठगी के बाद बार-बार रकम माँगी गई; शिकायत एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हुई।
पुलिस ने 2 लैपटॉप , 2 मोबाइल फोन , सोर्स फाइल्स, लॉगिन डिटेल्स और डोमेन दस्तावेज बरामद किए।
ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के ज़रिए ट्रांसफर की जाती थी; अंतरराज्यीय नेटवर्क की जाँच जारी।

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम सेल, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट ने 26 मई 2026 को एक सुनियोजित फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट का भंडाफोड़ किया, जो नकली सरकारी पोर्टल बनाकर देशभर के नागरिकों से ऑनलाइन ठगी कर रहा था। इस मामले में उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी अंशुल यादव को गिरफ्तार किया गया है, जो MCA डिग्रीधारी है और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित साइबर अपराधी बताया जा रहा है।

कैसे काम करता था यह रैकेट

पुलिस के अनुसार, आरोपी अंशुल यादव ने 'परिवहन डॉट ऑनलाइन' नाम से एक फर्जी वेबसाइट तैयार की थी, जिसे जानबूझकर असली सरकारी ट्रांसपोर्ट सेवा पोर्टल की हूबहू नकल के रूप में डिज़ाइन किया गया था। इस पोर्टल पर वाहन नंबर प्लेट बुकिंग और अन्य सरकारी सेवाओं के नाम पर नागरिकों से पैसे वसूले जाते थे।

एक पीड़ित ने बताया कि उसने गूगल पर 'वाहन नंबर प्लेट बुकिंग' खोजा, जिसके बाद वह इस फर्जी वेबसाइट पर पहुँच गया। वेबसाइट को असली समझकर उसने ₹1,099 का ऑनलाइन भुगतान कर दिया। इसके बाद अलग-अलग बहानों से लगातार और रकम माँगी जाने लगी, जिससे संदेह होने पर उसने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

जाँच का तरीका और गिरफ्तारी

शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में एफआईआर दर्ज की गई। जाँच के दौरान पुलिस ने डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल, डोमेन डिटेल्स और आईपी लॉग्स का विश्लेषण किया। इसी तकनीकी जाँच में आरोपी का मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल सुराग सामने आए, जिससे इटावा निवासी अंशुल यादव की पहचान हुई और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी के पास से 2 लैपटॉप, 2 मोबाइल फोन, फर्जी वेबसाइट की सोर्स फाइल्स, लॉगिन डिटेल्स, पासवर्ड और डोमेन से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं।

आरोपी की तकनीकी दक्षता

पुलिस के अनुसार, अंशुल यादव को वेबसाइट डिज़ाइनिंग, डोमेन होस्टिंग, बैकएंड मैनेजमेंट और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन की गहरी तकनीकी जानकारी थी। इसी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर वह फर्जी सरकारी वेबसाइटें बनाता और उन्हें साइबर ठगों को उपलब्ध कराता था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में सरकारी डिजिटल सेवाओं के नाम पर साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं।

नेटवर्क का दायरा और आगे की जाँच

जाँच में सामने आया है कि इस रैकेट से जुड़े कई बैंक खातों और एकाधिक फर्जी वेबसाइटों के ज़रिए देशभर में ठगी की गई है। ठगी की रकम को म्यूल बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जाता था। पुलिस अब इस मामले में अन्य सहयोगियों की पहचान, बैंक ट्रांजैक्शन और पूरे नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जाँच कर रही है।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि यह एक संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत साइबर ठगी नेटवर्क था, जो सरकारी डिजिटल सेवाओं की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहा था। गौरतलब है कि इस तरह के 'गवर्नमेंट स्पूफिंग' रैकेट नागरिकों के सर्च इंजन व्यवहार का फायदा उठाते हैं, जो इस साइबर खतरे को और गंभीर बनाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े और पीड़ितों का भी पता लगाया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी डिजिटल सेवाओं में जनता के भरोसे पर हमले का संकेत है। जब एक MCA डिग्रीधारी व्यक्ति सरकारी पोर्टल की हूबहू नकल बनाकर गूगल सर्च नतीजों में शीर्ष पर आ सकता है, तो यह सवाल उठता है कि सरकारी वेबसाइटों की डिजिटल पहचान सुरक्षित करने के लिए क्या तंत्र मौजूद हैं। म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क यह भी दर्शाता है कि यह अकेले व्यक्ति का काम नहीं — एक पूरी आपूर्ति श्रृंखला है जो फर्जी वेबसाइट बनाने से लेकर रकम निकालने तक संगठित है। जब तक डोमेन रजिस्ट्रेशन और पेमेंट गेटवे स्तर पर सख्त सत्यापन नहीं होगा, ऐसे रैकेट बार-बार सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में पकड़ा गया फर्जी सरकारी वेबसाइट रैकेट क्या था?
यह एक संगठित साइबर ठगी नेटवर्क था जो 'परिवहन डॉट ऑनलाइन' जैसी नकली वेबसाइटें बनाकर सरकारी ट्रांसपोर्ट पोर्टल का रूप देता था और वाहन नंबर प्लेट बुकिंग के नाम पर नागरिकों से पैसे ठगता था। ठगी की रकम म्यूल बैंक खातों के ज़रिए अलग-अलग खातों में स्थानांतरित की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपी अंशुल यादव कौन है?
अंशुल यादव उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है और MCA डिग्रीधारी है। पुलिस के अनुसार उसे वेबसाइट डिज़ाइनिंग, डोमेन होस्टिंग, बैकएंड मैनेजमेंट और पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन की तकनीकी जानकारी थी, जिसका उपयोग वह फर्जी सरकारी वेबसाइटें बनाकर साइबर ठगों को बेचने में करता था।
पुलिस ने आरोपी तक कैसे पहुँची?
एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज होने के बाद साइबर पुलिस स्टेशन, सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट में एफआईआर दर्ज की गई। डिजिटल फॉरेंसिक, बैंक ट्रांजैक्शन ट्रेल, डोमेन डिटेल्स और आईपी लॉग्स की जाँच में आरोपी का मोबाइल नंबर और अन्य डिजिटल सुराग सामने आए, जिससे इटावा में उसकी पहचान हो सकी।
पीड़ितों से किस तरह ठगी की जाती थी?
लोग गूगल पर सरकारी सेवाएँ जैसे 'वाहन नंबर प्लेट बुकिंग' खोजते थे और फर्जी वेबसाइट पर पहुँच जाते थे। वेबसाइट को असली समझकर वे ₹1,099 जैसी प्रारंभिक राशि चुकाते थे, जिसके बाद अलग-अलग बहानों से बार-बार और रकम माँगी जाती थी।
पुलिस ने आरोपी के पास से क्या बरामद किया और आगे क्या होगा?
पुलिस ने 2 लैपटॉप, 2 मोबाइल फोन, फर्जी वेबसाइट की सोर्स फाइल्स, लॉगिन डिटेल्स, पासवर्ड और डोमेन दस्तावेज बरामद किए हैं। अब अधिकारी अन्य सहयोगियों की पहचान, बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और पूरे नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन की जाँच कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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