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दिल्ली पुलिस ने फर्जी ट्रैवल बुकिंग वेबसाइट गिरोह का भंडाफोड़ किया, 3 गिरफ्तार; ₹10 लाख की ठगी उजागर

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दिल्ली पुलिस ने फर्जी ट्रैवल बुकिंग वेबसाइट गिरोह का भंडाफोड़ किया, 3 गिरफ्तार; ₹10 लाख की ठगी उजागर

सारांश

दिल्ली पुलिस ने फर्जी हेलीकॉप्टर और ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों के ज़रिए देशभर में ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के 3 सदस्यों को बिहार और उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया। गिरोह से जुड़ी 30 शिकायतों में ₹10 लाख की ठगी सामने आई है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस की साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 11 जून 2026 को अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं: ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार (नालंदा, बिहार) तथा श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम (ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश)।
गिरोह ने फर्जी हेलीकॉप्टर व ट्रैवल बुकिंग वेबसाइट और सोशल मीडिया पेड विज्ञापनों के ज़रिए ठगी की।
करीब 30 शिकायतों में लगभग ₹10 लाख की साइबर ठगी का अनुमान।
बरामदगी में 8 मोबाइल फोन , 2 लैपटॉप , 1 आईपैड , एटीएम/डेबिट कार्ड; ₹20,328 बैंक खाते में फ्रीज।

दिल्ली पुलिस की साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने 11 जून 2026 को एक संगठित अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन हेलीकॉप्टर और ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों के ज़रिए देशभर के नागरिकों को निशाना बना रहा था, और पुलिस के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़ी करीब 30 शिकायतों में लगभग ₹10 लाख की ठगी का अनुमान है।

मामले की शुरुआत

मामले की नींव उस शिकायत पर पड़ी जिसमें एक पीड़ित से ₹20,328 की ठगी की गई थी। आरोपियों ने फर्जी वेबसाइटें तैयार कर उन्हें सरकारी अथवा अधिकृत ट्रैवल पोर्टल जैसा रूप दिया और यात्रा बुकिंग का झाँसा देकर रकम वसूली। इसके बाद रिफंड या अतिरिक्त शुल्क के नाम पर पीड़ितों से और पैसे ऐंठे जाते थे। इस आधार पर साइबर थाना, साउथ जिला में प्राथमिकी दर्ज कर जाँच शुरू की गई।

तकनीकी जाँच और गिरफ्तारी

जाँच के दौरान पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन, डिजिटल पेमेंट चैनल, डोमेन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड, ईमेल अकाउंट, आईपी लॉग और होस्टिंग सर्विस से प्राप्त तकनीकी डेटा का गहन विश्लेषण किया। इस सर्विलांस के आधार पर पुलिस ने बिहार के नालंदा से ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में गिरोह के एक और प्रमुख सदस्य का नाम सामने आया — श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम, जो फर्जी वेबसाइटों को विकसित और संचालित करता था। उसे बाद में ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया।

ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पेड विज्ञापन चलाकर लोगों को इन फर्जी वेबसाइटों तक पहुँचाते थे। बुकिंग के नाम पर पहले भुगतान लिया जाता, फिर रिफंड या अतिरिक्त शुल्क के बहाने और रकम वसूली जाती थी। यह पूरा नेटवर्क म्यूल बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के ज़रिए रकम को आगे ट्रांसफर करता था — जो साइबर अपराधियों द्वारा धन शोधन की एक सुपरिचित विधि है। गौरतलब है कि फर्जी ट्रैवल पोर्टल घोटाले पिछले दो वर्षों में देशभर में तेज़ी से बढ़े हैं, खासकर तीर्थयात्रा और हेलीकॉप्टर सेवाओं के नाम पर।

बरामदगी और आगे की जाँच

पुलिस ने आरोपियों के पास से 8 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 1 आईपैड, कई एटीएम/डेबिट कार्ड और महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इसके अलावा ₹20,328 की राशि संबंधित बैंक खाते में फ्रीज कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क की परतें खोलती है और मामले की जाँच आगे भी जारी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी ट्रैवल बुकिंग से पहले वेबसाइट की प्रामाणिकता सरकारी पोर्टल पर सत्यापित करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो प्लेटफॉर्म की जवाबदेही कहाँ थी। म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क बताता है कि यह अकेले तीन लोगों का काम नहीं — आगे की जाँच में और कड़ियाँ उजागर होने की संभावना है। जब तक फर्जी डोमेन रजिस्ट्रेशन और विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सत्यापन की कोई बाध्यता नहीं होगी, ऐसे गिरोह उभरते रहेंगे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने किस साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया?
दिल्ली पुलिस की साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया जो फर्जी हेलीकॉप्टर और ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों के ज़रिए देशभर में ठगी कर रहा था। इस गिरोह से जुड़ी करीब 30 शिकायतों में लगभग ₹10 लाख की ठगी का अनुमान है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और कहाँ से पकड़े गए?
तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं — ओमप्रकाश कुमार और रोहित कुमार बिहार के नालंदा से, तथा श्रेयांश तिवारी उर्फ शिवम ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश से। श्रेयांश फर्जी वेबसाइटों को विकसित और संचालित करता था।
यह गिरोह ठगी कैसे करता था?
गिरोह सोशल मीडिया पर पेड विज्ञापन चलाकर लोगों को फर्जी ट्रैवल बुकिंग वेबसाइटों पर लाता था, जो सरकारी पोर्टल जैसी दिखती थीं। बुकिंग के नाम पर पैसे लेने के बाद रिफंड या अतिरिक्त शुल्क के बहाने और रकम वसूली जाती थी, और धन को म्यूल बैंक खातों के ज़रिए आगे ट्रांसफर किया जाता था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से क्या बरामद किया?
पुलिस ने 8 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, 1 आईपैड, कई एटीएम/डेबिट कार्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। इसके अलावा ₹20,328 की राशि संबंधित बैंक खाते में फ्रीज कर दी गई है।
फर्जी ट्रैवल वेबसाइट से बचने के लिए क्या करें?
किसी भी ट्रैवल या हेलीकॉप्टर बुकिंग से पहले वेबसाइट का URL सरकारी पोर्टल पर सत्यापित करें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर भुगतान करें। सोशल मीडिया विज्ञापनों के ज़रिए आई किसी भी बुकिंग लिंक पर बिना जाँचे भरोसा न करें।
राष्ट्र प्रेस
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